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24 नवंबर 2010

यूपीपीसीएसःज्यादा अंक पाकर भी फेल क्यों?

उत्तर प्रदेश पीसीएस की प्री-परीक्षा में राजनीति विज्ञान विषय का चयन करने वाले प्रतियोगी छात्र हैरान और परेशान हैं। उनकी परेशानी जायज भी है, क्योंकि उनसे कम अंक पाने वाले दूसरे विषयों के छात्र परीक्षा उत्तीर्ण करने में सफल हो जाते हैं और उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। ऐसा क्यों हो रहा है? इसका उत्तर भी उन्हें नहीं मिल रहा है। इस सवाल पर उप्र लोक सेवा आयोग सिर्फ इतना कह कर चुप हो जाता है कि यह समस्या स्केलिंग पद्धति की देन है। राजनीति विषय पर अच्छी पकड़ के बावजूद पीसीएस प्री पास नहीं कर पाने से हताश छात्रों ने इस विषय से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया है। इस विषय के हजारों छात्रों ने तो दूसरे विषयों का चयन भी कर लिया है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे राकेश सिंह पीसीएस का मेन्स और आइएएस का इंटरव्यू तक दे चुके हैं। उनका कहना है कि राजनीति विज्ञान में छात्र, व्यक्ति से लेकर राज्य व अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था, संविधान, स्वतंत्रता-समानता, न्याय जैसे मूल्यों का अध्ययन करता है, जो एक प्रशासनिक अधिकारी के व्यक्तित्व को निखारता है, लेकिन स्केलिंग की वजह से इस अति महत्वपूर्ण विषय को न चाहते हुए भी छात्र छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। राजनीति विज्ञान से पीसीएस का दो बार मेन्स व तीन बार आइएएस का मेन्स दे चुके विकास सिंह कहते हैं कि अबतक किसी और विषय से परीक्षा की तैयारी की होती तो चयन हो गया होता, लेकिन विषय पर पकड़ और इसकी रोचकता के मोहपाश ने अभी तक मुझे बांधे रखा, लेकिन इस बार मैं इसे छोड़कर दूसरा विषय ले रहा हूं। दो बार पीसीएस मुख्य परीक्षा दे चुके चतुर्गुण जायसवाल कहते हैं कि राजनीति विज्ञान से तैयारी कर रहे पीसीएस के प्रतियोगी छात्र आयोग के भेदभावपूर्ण रवैये को लेकर कई बार ज्ञापन दे चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं होती। समस्या उन लोगों की ज्यादा है जो साहब बनने का सपना लेकर आए और अब ओवरएज होने की कगार पर हैं। जिनके एक या दो अटेम्प्ट ही बचे हैं, उनके लिए नया विषय लेकर नए सिरे से तैयारी करना बड़ा कठिन भी है और दुखद भी। स्केलिंग का क्या तरीका है इसे आयोग बताता भी नहीं। ऐसे में अब राजनीति विज्ञान छोड़ने के अलावा छात्रों के पास कोई चारा नहीं बचा है। पद्माकर वर्मा कहते हैं कि आयोग को सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूट टेस्ट (सीसैट) लागू कर देना चाहिए। आइएएस और पीसीएस का मेन्स दे चुके राजीव सचान कहते हैं कि उप्र लोक सेवा आयोग की स्केलिंग पारदर्शी नहीं है। इस बाबत लोक सेवा आयोग के सचिव बीबी सिंह का कहना है कि स्केलिंग किसी एक विषय को ध्यान में रखकर नही बनाई गई है। आंकड़े के बावत उनका मानना है कि हर एक को लेवल में लाने के लिए एक्सपर्ट कमेटी का स्केलिंग फार्मूला लागू किया जाता है(अमरीश शुक्ल,दैनिक जागरण,इलाहाबाद,24.11.2010)।

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