लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने बीएड विद्यार्थियों के साथ एक और धोखा किया है। अतिरिक्त प्रवेश वाले 150 से अधिक विद्यार्थियों के लिए केवल मेरठ के कॉलेजों की 200 सीटों को रिक्त दिखाया गया है। विसंगति दूर करने के नाम पर छलावा किये जाने से विद्यार्थी स्तब्ध हैं। बुधवार को एक बार फिर अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक चुके अभ्यर्थियों ने कुलपति का पुतला फूंककर अपना आक्रोश व्यक्त किया। गौरतलब है कि लविवि प्रशासन की गलती से कई कॉलेजों में सीटों से अधिक प्रवेश हो गए हैं। अतिरिक्त प्रवेशों के विद्यार्थियों को अन्य महाविद्यालयों में समायोजित करने के नाम पर उनकी काउंसिलिंग करायी जा रही है। मंगलवार को 168 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया। इन छात्रों के लिए केवल मेरठ के सात महाविद्यालयों का ही विकल्प रखा गया है। प्रदेश के कोने-कोने से आए अभ्यर्थियों का कहना है कि तीसरी काउंसिलिंग के लिए बचाकर रखे गए कॉलेजों के विकल्प भी खोले जाएं। लविवि प्रशासन ने गलती की और अब खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। बीएड छात्रों के साथ हर कदम पर धोखा करने के बाद भी लविवि अधिकारी नहीं पसीज रहे हैं। बुधवार को छात्रों ने अन्य कॉलेजों की मांग की लेकिन उसे बीएड के राज्य समन्वयक प्रो. अखिलेश चौबे ने सुना ही नहीं। अभ्यर्थी शिकायत लेकर कुलसचिव जीपी त्रिपाठी के पास पहुंचे तो प्रशासनिक भवन के गेट बंद कर दिये गए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने छात्रों को वहां से भगा दिया। छात्रों ने प्रो. चौबे से मिलने के लिए बीएड विभाग में हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ने पर प्रो.चौबे नीचे उतरकर विद्यार्थियों से मुखातिब हुए लेकिन कोई संतोषजनक तर्क नहीं दे सके। छात्र अपनी बात पर अड़ गए तो बहस और गालीगलौज शुरू हो गया। छात्रों ने लविवि प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दिया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नितिन मित्तल, अनुभव तिवारी, आशुतोष मिश्र समेत अन्य कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंच गए। प्रदेश भर से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ लविवि प्रशासन की ओर से किये गए दुर्व्यवहार के खिलाफ अभाविप कार्यकर्ताओं ने भी नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में बीएड छात्रों और अभाविप कार्यकर्ताओं ने कुलपति प्रो.मनोज कुमार मिश्र का पुतला फूंककर विरोध जताया। अभाविप ने पूरे प्रकरण में कुलपति द्वारा साधी गई चुप्पी पर असंतोष जताया है। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है(दैनिक जागरण,लखनऊ,11.11.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।