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27 नवंबर 2010

परफेक्शन और प्रोडक्टिविटी में संतुलन जरूरी

क्या आपका हररोज का काम आपको अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए बाध्य करता है? नियमित कार्य पूरा करने में भी दबाव का सामना करना पड़ता है? क्या आप खुद को परफेक्शनिस्ट कहेंगे, जो हमेशा अपने काम को बेहतर करने में लगे रहते हैं? हालांकि अपने काम की क्वालिटी का ध्यान रखना, उसे उच्च बनाए रखने का प्रयास करना, उसके लिए अतिरिक्त समय देना आपको हमेशा दूसरों से आगे रखता है। पर, कई बार अधिक परफेक्शनिस्ट एटीडय़ूड काम में बाधा भी पहुंचाता है। साथ ही आपको अपनी क्षमताओं के अनुसार परिणाम देने से रोक देता है। जानें कैसे:   
परफेक्शन, विलंबन का कारण: यह सुनने में आपको अजीब लग सकता है, पर हर सामान्य काम में भी परफेक्ट बने रहने की जरूरत कई बार काम को जटिल बना देती है। आप या तो काम को शुरू करने के लिए सही समय की प्रतीक्षा करने में लग जाते हैं अथवा यह मानने लग जाते हैं कि इस काम को आप बाद में अधिक समय निकालकर करेंगे।
कुशलता से समझौता: प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए कोई स्पष्ट उद्देश्य और समय-सीमा निर्धारित नहीं होना भी आपकी परफेक्शन की आदत को बढ़ाता है। यह जरूरी नहीं है कि हर काम में परफेक्ट रहने की जरूरत हो। एक्यूरेसी के साथ-साथ स्पीड और क्वांटिटी भी मायने रखती है। अत: जहां आपकी पूरी टीम सामान्य परफॉरमेंस के साथ अधिक काम कर लेती है, वहीं आप एक काम पर जरूरत से अधिक समय देने के कारण दूसरों की तुलना में कम काम कर पाते हैं। अत: संतुलन को समझना जरूरी है।
आगे बढ़ने से रोकना: प्रत्येक काम में त्रुटिहीन रहने के कारण ङोले जाने वाला अतिरिक्त दबाव कई बार काम शुरू होने से पहले ही उसमें अनेक तरह की कमियों और विश्लेषण की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है। अंतत: यह नजरिया आपको एक सर्कल में ही दौड़ते रहने के लायक बनाता है पर आप आगे बढ़ने से रोक देता है।
अपनी आदत में यूं करें बदलाव
तस्वीर का बड़ा पक्ष देखें
: यह अच्छा है कि आप किसी प्रोजेक्ट को बनाते हुए हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देते हैं। पर इन जानकारियों में ही उलझकर न रह जाएं। अपने दैनिक कार्यो को व्यवस्थित करें और एक की काम में खुद को लंबे समय तक उलझाकर नहीं रखें। इससे दूसरे कामों पर भी अपनी पकड़ बनाने का समय मिलेगा। समय विशेष पर अपना काम पूरी सावधानी से करें। एक दिन, सप्ताह व महीने को ध्यान में रखकर अपनी कुल प्रोडक्टिविटी पर ध्यान रखें।
काम पूरा करने के लिए : कार्यस्थल पर अपनी उत्पादकता बढ़ाने और अपने काम को सही ट्रैक पर रखने के लिए जरूरी है कि आप प्रत्येक काम का एक उद्देश्य भी ध्यान रखकर चलें। इससे किस काम पर कितना समय देना है यह समझने में मदद मिलेगी। काम को किस तरह पूरा करेंगे इस बारे में भी सोचकर रखें। अपने लिए लक्ष्य निर्धारित करें और उसे कार्य रूप में बांटने का प्रयास करें।
समय निर्धारित करें : यदि आपकी आदत है कि आप बार-बार अपने काम का मूल्यांकन करते हुए उसमें सुधार करते हैं या उसे पहले से बेहतर बनाते रहने की कोशिश करते रहते हैं, तो काम को पूरा करने के लिए एक समय-सीमा अवश्य तय कर लें। किसी एक चीज में आप हजारों सुधार कर सकते हैं और यह सिलसिला कितना ही लंबा चल सकता है, पर आपके लिए अपने कार्य की एक फिनिशिंग लाइन बनाना जरूरी होगा।
गलती करना सहज है : हम भरसक प्रयास करते हैं कि हमारा काम सौ प्रतिशत त्रुटिहीन हो। फिर भी गलतियां होती ही हैं। अपनी गलतियों को स्वीकार करके ही हम उनसे कुछ सीख सकते हैं और अपना विकास कर पाते हैं। अत: असफल  होने की व्याकुलता को छोड़ दें। यदि आपके प्रयास ईमानदार हैं, तो रास्ते हमेशा खुले रहेंगे।
(हिंदुस्तान,दिल्ली,22.11.2010)

3 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा आपने कि कई बार अधिक परफेक्शनिस्ट एटीडय़ूड काम में बाधा भी पहुंचाता है। साथ ही आपको अपनी क्षमताओं के अनुसार परिणाम देने से रोक देता है।

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  2. सटीक बात है , संतुलन अत्यावश्यक है!

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  3. संतुलित जीवनदृष्टि "अति" के दुष्प्रभावों से बचाती है जिससे हमारे जीवन के सभी क्षेत्र प्रभावित हो जाते है. इस विचार को इस विचारोत्तेजक आलेख में कार्यक्षेत्र के उदाहरण के द्वारा बखूबी समझाया गया है. आभार.
    सादर
    डोरोथी.

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