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23 नवंबर 2010

लखनऊ विविःप्रधानमंत्री के साथ परेड देखने वाले छात्रों की सूची बनाने की कवायद तेज़

मेधावियों का हक मारने के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन अब खुद को बचाने की कवायद में जुटा है। प्रधानमंत्री के साथ परेड देखने के लिए टॉपर्स की सूची 31 अक्टूबर तक भेजी जानी थी, जो 21 नवंबर को बनानी शुरू की गई है। सोमवार को प्रशासनिक भवन में पूरे दिन हलचल रही और अधिकारी सूची के नाम तलाशने में जुटे रहे। हालांकि बीस दिन से अधिक विलंब होने के बाद अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आवेदन स्वीकार किया जाएगा या नहीं, यह अभी तय नहीं है। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री के साथ गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए देश के सौ टॉपर विद्यार्थियों का चयन मानव संसाधन विकास मंत्रालय (उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार) की ओर से किया जाता है। किराया, रहना और खाने का इंतजाम भी मंत्रालय ही करता है। इस सुनहरे अवसर के लिए लविवि से दस मेधावियों के नाम भी मांगे गए थे। गत 22 सितंबर और 19 अक्टूबर को मंत्रालय द्वारा दो बार पत्र भेजने के बाद भी लविवि प्रशासन ने मेधावियों की सूची नहीं बनाई। पत्र केवल अधिकारियों की फाइलों में ही दबे रह गए। आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर थी। अधिकारियों ने तो चिट्ठी मिलने की बात तक स्वीकार नहीं की। लविवि अधिकारियों की कारगुजारी को दैनिक जागरण ने 21 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया। इसके बाद चिट्ठी भी मिल गई। कार्यप्रणाली की कलई खुलने के बाद अब अधिकारी खुद को बचाने की कवायद में जुटे हैं। सभी संकाय से टॉपर छात्र-छात्राओं के नाम चुने गए और सूची बनायी गई है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा अब आवेदन स्वीकार किया जाएगा या नहीं, इस पर संशय है। हालांकि यदि मंत्रालय हरी झण्डी दे देता है तो यह दस मेधावियों के लिए एक सुनहरा अवसर होगा।

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