महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में राजनीति शास्त्र एमए प्रथम वर्ष की छात्रा आस्था ने सभी पेपरों की परीक्षा दी किंतु जब परिणाम (रिजल्ट) लेने पहुंची तो पता चला की वह परीक्षा में अनुपस्थित है। उसके होश उड़ गए। काफी जांच के बाद पता चला कि उसके अनुक्त्रमांक पर किसी दूसरे छात्र का रिजल्ट बन गया है। यह तो बानगी है। विद्यापीठ और उससे संबंद्ध विद्यालयों में ऐसे कई मामले हैं। परेशान छात्र-छात्राएं परीक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे हैं किंतु जिम्मेदार गोल-मटोल जबाव देकर टरका दे रहे हैं। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की इस साल आयोजित स्नातक और स्नातकोत्तर परीक्षा में जमकर लापरवाही हुई। परीक्षा किसी ने दी रिजल्ट किसी का बन गया। किसी छात्र-छात्रा का नाम गलत तो किसी के पिता का। किसी का विषय तो किसी अनुक्त्रमांक। किसी के एक प्रश्न पत्र का नम्बर गायब। इसी प्रकार विभिन्न कक्षाओं में परीक्षा देने वाले छात्रों के अंकपत्रों में तमाम त्रुटियां हैं। ऐसी गलतियों को ठीक कराने के लिए सिर्फ विद्यापीठ के ही नहीं इससे संबद्ध कॉलेजों के छात्र-छात्राएं और उनके परिजन परीक्षा विभाग के अफसरों से संपर्क साध रहे हैं लेकिन कोई लाभ नहीं। प्रतिदिन केंद्रीय कार्यालय की दौड़ लगा रहे इन लोगों को संबंधित बाबू से एक ही जवाब मिलता है कि सब ठीक हो जाएगा। छात्रों को कष्ट है कि विद्यापीठ प्रशासन के जिम्मेदार लोग भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे। वहीं संबंधित कर्मचारी काम के बोझ का हवाला देते हुए एक दूसरे पर टाल रहे है(दैनिक जागरण,वाराणसी,24.11.2010)।
Yah vartmaan shiksha pradali ka ek namuna hai.Dukh to is baat ka hai ki yah antim nahin hai.
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