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23 नवंबर 2010

मंदी में एच आर का रोल रहा प्रमुख

वैश्विक मंदी ने दुनिया भर की बड़ी-बड़ी कंपनियों की नींव तक हिला दी थी। वहीं भारत मंदी के दौरान भी अच्छी हालत में रहा। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि भारत में मंदी आई ही नहीं थी बल्कि वैश्विक मंदी का प्रभाव था जिसे बढ़ा-चढ़ा कर बताया गया। इस दौरान लोगों ने वेतन कटौती से लेकर नौकरी से हाथ धोने तक की कठिनाइयां झेलीं।

प्रत्येक कंपनी में कर्मचारियों की भर्ती से लेकर सही क्षमता का चयन, प्रशिक्षिण, स्वस्थ कार्यस्थल बनाना आदि सभी जिम्मेदारियां ह्यूमन रिसोर्स के कंधों पर रहती है। ह्यूमन रिसोर्स ने मंदी के दौरान नीतियों में बदलाव कर कर्मियों और कंपनी की सेहत का काफी हद तक ध्यान रखा। भारत की सबसे बड़ी कर्मचारी भर्ती (स्टॉफिंग) कंपनी, टीमलीज सर्विसेज द्वारा जारी ताजा सर्वे "दफ्तरों में बहाली" में कर्मचारियों और नियोजकों के दृष्टिकोण प्राप्त करते हुए भारतीय श्रम शक्ति पर हाल की मंदी के प्रभावों का विश्लेषण किया गया। कठिन समय में कठोर उपाय अपनाने होते हैं - और मानव संसाधन के पहलू पर भारतीय कंपनियों ने किस प्रकार प्रतिक्रिया व्यक्त की? इस सर्वे में भारत के प्रमुख शहरों- नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद से ३५० कार्यकारी पेशेवरों और ५० मानव संसाधन पेशेवरों (नियोजक का दृष्टिकोण जानने के लिए) को शामिल किया गया। सर्वे का सबसे सराहनीय निष्कर्ष रहा कि अधिकांश कर्मचारी सहमत थे कि कार्य तथा अच्छे प्रदर्शन के प्रति प्रतिबद्धता कर्मचारियों को किन्हीं भी विपरीत दशाओं से अप्रभावित रखती है।

जहां कर्मचारियों व नियोजकों के मतों में कुछ भिन्नताएं हैं, वहीं अधिकांश लोग कंपनी में कटौती के बारे में भलीभांति जागरूक थे। करीब ५८ फीसदी मानव संसाधन पेशेवरों ने भी कहा कि बलपूर्वक कटौती के मसले को तर्कसंगत रूप से भलीभांति प्रबंधित किया गया। टीमलीज सर्विसेज की वाइस प्रेसिडेंट (आईटी सोर्सिंग) सुरभि माथुर गांधी ने इस संबंध में अपनी प्रतिक्रिया में कहा, "संवृद्धि का दौर फिर से आने के साथ, अच्छा प्रदर्शन न करने वाले कर्मचारियों को बनाए रखने से अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को होने वाले नुकसान पर समुचित कार्रवाई न करने वाली कंपनियों को अच्छी प्रतिभाएं अपने साथ जोड़े रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

सर्वे के मुख्य बिंदु
*बेहतर प्रदर्शन वाली नौकरी सदैव स्थिर रहती है। मंदी से बचे रहे ४५ फीसदी कर्मचारियों के लिए प्रतिबद्धता और अच्छा प्रदर्शन प्रमुख प्रेरक थे। सर्वे में शामिल ४५ फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि उनका संगठन सर्वश्रेष्ठ है और वे इसके प्रति वफादार रहेंगे (अहमदाबाद से सर्वाधिक प्रतिक्रियाएं)

* सर्वे में शामिल कुल कर्मचारियों में से ७० फीसदी ने महसूस किया कि उनके संगठन ने मानवशक्ति में संभावित कटौती के बारे में पहले ही भलीभांति सचेत कर दिया था जिससे वे खुद को परिस्थिति के लिए तैयार कर सके। अहमदाबाद और हैदराबाद के कर्मचारियों ने अपने नियोजकों के प्रयासों को सराहा। कोलकाता के लगभग ४३ फीसदी कर्मचारियों ने मंदी के कारण किसी जोखिम का सामना नहीं किया। अचानक निकाले जाने के सर्वाधिक मामले पुणे और दिल्ली में रहे।

*समग्र रूप में, ६२ फीसदी कर्मचारियों ने महसूस किया कि मंदी के दौरान, कंपनी से सफलतापूर्वक बाहर निकलना सुनिश्चित करने में मानव संसाधन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अहमदाबाद के कर्मचारी, एचआर की भूमिका से संतुष्ट दिखे ।

* पुणे के करीब ५० फीसदी कर्मचारी इन परिस्थितियों में एचआर की भूमिका से संतुष्ट नहीं रहे, क्योंकि प्रभावित कर्मचारियों को ऐसे निर्णय के पीछे के तर्कों से सहमत करने में वे (एचआर पेशेवर) असमर्थ रहे। इस अस्थिरता के दौरान, कोलकाता सबसे कम प्रभावित रहा। यहां ४३ फीसदी कर्मचारियों को इसका सामना नहीं करना पड़ा।

*५० फीसदी कर्मचारियों के अनुसार, मंदी के बाद पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया को संगठनों द्वारा भलीभांति प्रबंधित किया गया। अहमदाबाद के कर्मचारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रियाएं दीं।

*समग्र रूप में, ४१ फीसदी कर्मचारियों का मत था कि उनके संगठन को एचआर नीतियों को सुधारने की दिशा में कार्य करने की जरूरत है। बेंगलुरु और कोलकाता के कर्मचारियों ने अपनी राय में कहा कि कंपनियों को नई नीतियां लागू करनी चाहिए।

*अहमदाबाद के आधे कर्मचारियों के अनुसार, उनके संगठनों ने अपनी कर्मचारी नीतियों में बदलाव किए, जबकि दिल्ली के आधे कर्मचारियों के अनुसार, संगठन के प्रदर्शन मानकों में बदलाव किए गए।

*कुल कर्मचारियों में से ४७ फीसदी का कहना था कि नए कर्मचारियों की नियुक्ति करते समय इन दिनों कंपनियां अधिक सतर्कता से काम ले रही हैं और नए कर्मचारियों से वे अधिक उत्पादकता की अपेक्षा रखती हैं। पुणे के ६८ फीसदी कर्मचारियों के अनुसार, कंपनियां, पूर्व की भांति कर्मचारियों को नियोजित कर रही हैं और मंदी का उन पर कोई नकारात्मक असर नहीं है(आशुतोष वर्मा,नई दुनिया,दिल्ली,22.11.2010)

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