विगत कुछ वर्षों में भारत ने रत्न और आभूषणों के ग्लोबल मार्केट में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। ऐसे में यह क्षेत्र युवाओं के लिए काफी चमकदार क्षेत्र साबित हो रहा है। चूंकि इस क्षेत्र में अभी लोगों की डिमांड ज्यादा है और सप्लाई कम इसलिए यह क्षेत्र युवाओं के लिए कॅरिअर की असीम संभावनाओं से भरा पड़ा है, जो उन्हें भविष्य में ऊंचाइयों के साथ-साथ लाभ की भी पूरी गारंटी प्रदान करता है।
गौरतलब है कि भले ही सर्राफा बाजार में स्वर्ण के दाम दिनों-दिन नए रिकॉर्ड कायम कर रहे हों, लेकिन लोगों की ज्वैलरी के प्रति दीवानगी कम होने वाली नहीं है। आजकल नए फैशन के तहत लोग सोने के आभूषणों से ज्यादा महत्व डिजाइनर ज्वैलरी को देने लगे हैं। फिर चाहे वह आभूषण बहुमूल्य पत्थर का हो, चांदी का या फिर अन्य किसी धातु का। डिजाइनर ज्वैलरी की बाजार में मांग बढ़ने का यह अर्थ कतई नहीं है कि सोने का इस्तेमाल ज्वैलरी में होना बंद हो जाएगा। हां, लेकिन यह जरूर है कि इन दिनों सोने के अलावा भी ज्वैलरी डिजाइनिंग अन्य धातुओं के साथ की जा रही है। इसी नए फैशन एवं प्रयोगधर्मिता के कारण आज भारत अपनी पहचान वैश्विक बाजार में बना पाया है। वर्तमान में स्थिति यह है कि ज्वैलरी बाजार लगातार फैल रह है और इसकी मांग भी चरम पर है। ज्वैलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में काम करने के लिए तकनीकी ज्ञान बहुत जरूरी है। बिना तकनीकी ज्ञान के आप इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ सकते, इसलिए तकनीकी पाठ्यक्रम के माध्यम से इस व्यवसाय से जुड़े तमाम सूक्ष्य विषयों की जानकारियों में रेखाओं को खींचने के अभ्यास के साथ ही कलर साइंस, ज्यामिति, मैटालॉजी, जैमोलॉजी, पॉलिशिंग, कुंदनकारी, कटिंग, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, क्वालिटी कंट्रोल आदि की विस्तृत जानकारी शामिल होती है।
ज्वैलरी डिजाइनिंग से संबंध रखने वाले किसी भी कोर्स में प्रवेश लेने के लिए बारहवीं पास होना आवश्यक है। कई संस्थान एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। इस परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवार की कल्पनाशक्ति की क्षमता को जांचा एवं परखा जाता है। ज्वैलरी डिजाइनिंग में प्रमुख रूप से दो वर्षीय डिप्लोमा और एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स उपलब्ध हैं। इसके अलावा ४५ दिनों की अवधि के भी शॉर्ट टर्म कोर्सेज अलग-अलग संस्थानों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं जिसके तहत जैमोलॉजी, डायमंड/स्टोन सेटिंग, एनग्रेनिंग और इलेक्ट्रोप्लेटिंग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।
ज्वैलरी डिजाइनिंग के दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में इन सब आधारभूत बातों के अलावा ज्वैलरी डिजाइनिंग, व्यापार और निर्माण, व्यावसायिक ज्वैलरी डिजाइन आदि की ट्रेनिंग प्रशिक्षणर्थियों को दी जाती है, जिसके बाद वह ज्वैलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में सफल कॅरिअर बनाने में सक्षम रहता है। ज्वैलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर लेने के उपरांत रोजगार के कई विकल्प आपके सामने उपलब्ध रहते हैं। आप स्वतंत्र डिजाइनर के रूप में सरकारी या अर्द्धसरकारी संस्थानों में आसानी से रोजगार पा सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न ज्वैलरी डिजाइनिंग फर्म भी मनमाफिक सैलेरी पर ज्वैलरी डिजाइनरों की नियुक्ति करती हैं। इतना ही नहीं, भारतीय पारंपरिक कला की विदेशों में बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक्सपोर्ट हाउसों में ज्वैलरी डिजाइनरों की ही मांग नहीं बढ़ी है, बल्कि गहने बनाने वाली अनेक कंपनियां भी तेजी से इस क्षेत्र में अपनी पैठ जमा रही हैं।
ज्वैलरी डिजाइनिंग का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थानः
१. भारतीय रत्न विज्ञान संस्थान, एफ ब्लॉक, झंडेवालान, झांसी रोड, नई दिल्ली।
२. इंटरनेशनल पॉलिटेक्निक फॉर वूमेंस, साउथ एक्स पार्ट वन, नई दिल्ली।
३. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, हौजखास, नई दिल्ली।
४. रत्न शिल्पी प्रशिक्षण महाविद्यालय, जयपुर।
५. ज्वैलरी प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर, तारदेव, मुंबई।
(जयंतीलाल भंडारी,मेट्रो रंग,नई दुनिया,दिल्ली,22.11.2010)
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