कौशल विकास और प्रवेश क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य शासन अब निजी कालेजों की ओर हाथ बढ़ाएगी। निजी इंजीनियरिंग कालेजों को पालीटेक्निक और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए कालेजों को दूसरी पाली शुरू करने के प्रस्ताव भी दिए जा सकते हैं। यह सारे प्रस्ताव 15 नवंबर को निजी तकनीकी कालेजों के सामने रखे जा सकते हैं। तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास नीति को स्वरूप देने में जुटे राज्य शासन ने अब निजी कालेजों से तालमेल बैठाने का निर्णय लिया है। इसके लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश के समस्त निजी तकनीकी कालेजों से एक डायरेक्टर एवं प्राचार्य को 15 नवंबर को बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक अव्वल तो इस बैठक में कालेज संचालकों से प्रदेश की प्रस्तावित तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास नीति-2010 पर सुझाव लिये जाएंगे। मगर शासन का सीधा जोर अधिक से अधिक संख्या में आईटीआई और पालीटेक्निक कालेज पर रहेगा। इसके लिए कालेज संचालकों के सामने सुविधाओं और सौगातों का खजाना भी खोला जाएगा। साथ ही जिन कालेजों में पहले से ही पालीटेक्निक चल रहे हैं, उन्हें सेकंड शिफ्ट खोलने के प्रस्ताव दिए जाएंगे। बताया जाता है कि राज्य शासन नई तकनीकी शिक्षा नीति में ऐसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर विचार कर रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में कुशल टेक्नीशियन तैयार किए जा सकें। इसके लिए शासन ने कई पाठ्यक्रम भी चिंहित किए हैं, जिन्हें बढ़ावा दिया जाना है।
मुख्यमंत्री ने दिए थे निर्देश :
इस संबंध में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जुलाई में विभागीय समीक्षा के दौरान निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने तकनीकी कालेज संचालकों से सहमति बनाने पर भी जोर दिया था, लेकिन शासन अभी तक नीति का मसौदा बनाने में ही व्यस्त था। इसके लिए बनी उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक भी हाल ही में आयोजित की गई है। इस कमेटी की रिपोर्ट कालेज संचालकों की राय मिलने पर फायनल की जाएगी। इसलिए है पूरी कवायद : मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हाल ही में तकनीकी शिक्षा को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है। इसमें कौशल विकास के साथ ही निजी भागीदारी बढ़ाने के संबंध में सिफारिश की गई हैं। इन्हें देखते हुए राज्य शासन ने प्रदेश की स्थिति का आंकलन किया है। साथ ही इंजीनियरिंग की बजाय अब आईटीआई और पालीटेक्निक कालेजों पर विशेष जोर दिया है। इसके तहत पीपीपी मॉडल पर संस्थान खोले जाना है। इस दिशा में निवेशकों को सस्ती दर पर जमीन के अलावा अन्य मदों में भी राहत के प्रस्ताव शासन द्वारा तैयार किए गए हैं(दैनिक जागरण,भोपाल,10.11.2010)।
bahut badhiya janakari di hai ...abhaar
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