देश में किशोरवय प्रतिभाओं की खोज के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता आ रही है। यही कारण है कि इस बार दो महत्वपूर्ण परीक्षाओं में विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र ले जाने की छूट दी गई। इसे सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए सवालों की परिणति कहें या कुछ और, लेकिन प्रारंभिक शिक्षा की देश में सबसे प्रतिष्ठित मानी जाने वाली राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा (एनटीएसई) में इस बार विद्यार्थियों से प्रश्नपत्र वापस नहीं लिए गए।
गत वर्ष तक एसआईईआरटी की ओर से आयोजित किए जाने वाले एनटीएसई के प्रथम चरण में प्रश्न पत्र विद्यार्थियों से परीक्षा कक्ष में ही वापस ले लिए जाते थे, जिससे परीक्षा के बाद विद्यार्थी प्रश्नपत्र का मूल्यांकन नहीं कर पाते थे। इसके साथ ही परिणामों को चुनौती देने में भी असमर्थ रहते थे। एनसीईआरटी में राजस्थान से 248 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है, जिनकी दूसरे व तीसरे चरण की परीक्षा एनसीईआरटी द्वारा ली जाती है।
इसी तरह आईआईएससी बेंगलुरू द्वारा आयोजित की जाने वाली किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना में भी इस वर्ष से पारदर्शिता शुरू करते हुए विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र वितरित किए गए।
गत वर्ष हुई थी गड़बडियां
एसआईईआरटी की ओर से गत वर्ष हुई एनटीएसई परीक्षा के प्रथम चरण के परिणाम चौंकाने वाले रहे थे। कई ऎसे विद्यार्थी इस परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं हो सके थे, जो योग्य समझे जाते थे। इसके बाद कोटा के करीब ढाई सौ विद्यार्थियों ने सूचना के अधिकार के तहत विभिन्न जानकारियां मांगी, प्रश्नपत्र देखे और उत्तरों की जानकारी ली। इसके बाद एसआईईआरटी ने तीन सप्ताह में ही संशोधित परिणाम जारी किया था, जिसमें परिणाम बहुत बदले हुए थे।
इनका कहना है
इस संबंध में एनसीईआरटी की ओर से निर्देश मिल गए हैं कि विद्यार्थियों को प्रश्नपत्र देने हैं। पहले नहीं देते थे तो सूचना के अधिकार के तहत प्रश्नपत्र देखने के लिए आवेदन आते थे। 'आन्सर की' भी मांगी जाती थी। अब पारदर्शिता बढ़ जाएगी-लक्ष्मी नन्मा, समन्वयक, एसआईईआरटी, उदयपुर
गत वर्ष परिणामों में गड़बडियों के बाद आरटीआई का अभियान चलाया गया और एसआईईआरटी से कई जानकारियां मांगी गई। एनसीईआरटी से भी जवाब मांगे गए, जिसके बाद ही इस वर्ष से प्रश्नपत्र देने की शुरूआत की गई है। यह विद्यार्थियों के लिए बेहतर रहेगा। इसके साथ ही इन्हें ऑन्सर शीट और ओएमआर दिखाने के ऑप्शन भी देने चाहिए-नीलेश गुप्ता, प्रभारी, पीसीसीपी, रेजोनेन्स(राजस्थान पत्रिका,कोटा,23.11.2010)
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