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03 नवंबर 2010

छत्तीसगढ़ में नहीं है मुन्ना भाइयों को पकड़ने की मशीन

छत्तीसगढ़ में मुन्ना भाइयों को पकड़ने के लिए किसी भी तरह की जांच केवल कागजों तक ही सीमित है। फॉर्म भरने के समय जोर-शोर से प्रतिभागियों के अंगूठे के निशान के साथ ही उनके फुल साइज के पोस्टकार्ड फोटो भी मंगाए जाते हैं।

जांच के नाम पर छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल, माध्यमिक शिक्षा मंडल और चिकित्सा संचालनालय के पास एक भी ऐसी बायोमीट्रिक मशीन नहीं है, जिससे अंगूठे के निशान, फोटो या फिर वीडियोग्राफी की जांच की जाए।

2010 के प्री मेडिकल टेस्ट और परिवहन आरक्षक की परीक्षा में मुन्ना भाइयों के बैठने की पुष्टि के बाद भी किसी भी मंडल ने फर्जीवाड़े की जांच के लिए विभागों को हाईटेक करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

इसका असर यह हो रहा है कि व्यापमं की प्रत्येक बड़ी परीक्षा में मुन्ना भाइयों का ग्रुप आसानी से अपना काम कर रहा है। दैनिक भास्कर ने आला अधिकारियों का ध्यान इस ओर दिलाया तो उन्होंने अगली बैठक में मंडलों को हाईटेक करने के प्रस्ताव लाने की बात कही।

नकलचियों के आगे सभी फेल
पीएमटी, परिवहन आरक्षक, दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षा समेत सभी बड़ी परीक्षाओं में व्यापमं और माशिमं ने छात्रों से फुल साइज फोटो, अंगूठे के निशान, परीक्षा केंद्र की वीडियोग्राफी, फॉर्म खरीदी-जमा करते समय वीडियोग्राफी आदि की व्यवस्था की। इसके बाद भी हर परीक्षा में मुन्ना भाइयों ने सारे सिस्टम को फेल कर दिए। बीते पांच साल में एक भी बड़ी परीक्षा ऐसी नहीं हुई जिसमें फर्जीवाड़े की शिकायत न हुई हो।


जांच रिपोर्ट आने में लग जाते हैं महीनों
किसी भी तरह की बायोमेट्रिक जांच के लिए मंडल अपनी जिम्मेदारी पुलिस विभाग को सौंप देता है। इससे अब तक के सभी फर्जीवाड़े की जांच अटकी हुई है। बायोमेट्रिक जांच के लिए राजधानी में भी उच्च स्तरीय सुविधाएं नहीं हैं। इसलिए इनकी जांच के लिए निशानों को बंगलुरु, हैदराबाद, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में भेजा जाता है। इन स्थानों से रिपोर्ट आने में ही महीनों लग जाते हैं। इससे जांच का काम भी ठप पड़ जाता है(असगर खान,दैनिक भास्कर,रायपुर,3.11.2010)।

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