सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विदेशों में स्थापित कॉलेजों के वे डेंटल छात्र जिन्हें भारत में अधिकारी डिग्री देते हैं, वे बिना किसी स्क्रीनिंग टेस्ट के यहां प्रैक्टिस कर सकते हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों से पास होने वाले अन्य छात्र ऐसा नहीं कर सकते हैं। डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया स्क्रीनिंग टेस्ट रेगुलेशन, 2009 की शीर्ष अदालत ने व्याख्या की। उसने कहा कि जिन छात्रों को भारत में अधिकारी डिग्री प्रदान करते हैं उन पर वे प्रावधान लागू नहीं होते जो भारत में पै्रक्टिस करने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों से पास होने वाले छात्रों पर लागू होते हैं। उन्हें स्क्रीनिंग टेस्ट से गुजरना पड़ता है। न्यायाधीश आरवी रवींद्रन और एचएल गोखले की पीठ ने एक फैसले में कहा, यद्यपि मॉरस कॉलेज भारत के बाहर स्थित है लेकिन इस कालेज के बीडीएस छात्रों को जो सफलतापूर्वक पढ़ाई पूरी करते हैं और भावनगर विश्वविद्यालय द्वारा ली जाने वाली परीक्षा पास करते हैं, भारतीय प्राधिकार से डिग्री मिलती है। उनके पास भारत के बाहर के प्राधिकार या संस्था द्वारा दी जाने वाली डिग्री नहीं होती है। न्यायालय ने यह फैसला मॉरीशस के मॉरस कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट्री हास्पिटल एंड ओरल रिसर्च इंस्टीट्यूट के कुछ छात्रों द्वारा दायर अपील को बरकरार रखते हुए सुनाया। इन छात्रों ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीआइ) द्वारा अनिवार्य स्क्रीनिंग टेस्ट से गुजरने के लिए उन पर जोर दिए जाने को चुनौती दी थी(दैनिक जागरण,दिल्ली,3.11.2010)।
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