मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

23 नवंबर 2010

कोटा इंजीनियरिंग कॉलेजों के 'खेल' में विद्यार्थी फेल

इंजीनियरिंग कॉलेजों में चांदी कूटने की बात नई नहीं है, लेकिन इस बार तो हद ही कर दी। राज्य के कई इंजीनियरिंग कॉलेजों ने विद्यार्थियों से बीते हुए साल की भी फीस वसूल कर ली। सरकारी आदेशों को अपनी तरह से पढ़कर विद्यार्थियों को ऎसे समझाया, मानो सरकार ने ही पिछले साल की राशि वसूलने के लिए कहा हो। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय को भी इस संबंध में प्रदेश के कई जिलों से छात्रों ने मौखिक शिकायतें की हैं। उधर, सरकार का कहना है यदि किसी इंजीनियरिंग कॉलेज के खिलाफ शिकायत मिलती है तो कार्रवाई करेंगे।

राज्य स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की सिफारिश के बाद बढ़े हुए शुल्क के आदेश 20 अगस्त 2010 को तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी कर दिए गए। इन आदेशों को सत्र 2009-10 से प्रभावी मानते हुए कॉलेजों ने विद्यार्थियों से बढ़ी हुई राशि वसूलना शुरू कर दिया, जो अभी भी जारी है। वहीं, इसी आदेश की अनुपालना में राज्य के पॉलीटेक्निक कॉलेजों में एक ही वर्ष की बढ़ी हुई राशि वसूली जा रही है। इंजीनियरिंग कॉलेज के एक विद्यार्थी को गत वर्ष की बढ़ी हुई फीस के बदले 3 हजार रूपए अतिरिक्त देने पड़ रहे हैं।

यह है उलझन
'सत्र 2009-10 में पूर्व प्रवेशित तथा सत्र 2010-11 में नव प्रवेशित विद्यार्थियों के लिए वार्षिक अन्तरिम शुल्क संरचना निर्धारित की जाती है।' तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी आदेशों की इन पंक्तियों के चलते अलग-अलग मतलब लगाए जा रहे हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज इसे 2009-10 में प्रवेशित विद्यार्थियों पर भी प्रभावी मानते हुए राशि वसूल रहे हैं। वहीं तकनीकी शिक्षा मण्डल की ओर से पॉलीटेक्निक कॉलेजों के लिए निकाले गए आदेश में यह पंक्ति लिखी हुई है। 'यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि सत्र 2009-10 में प्रवेशित विद्यार्थियों से केवल सत्र 2010-11 एवं इससे अग्रिम अध्ययन हेतु उपरोक्तानुसार बढ़ा हुआ शुल्क लिया जाना है।' इसके चलते सिर्फ सत्र 2010-11 के लिए शुल्क बढ़ाया गया है।

इनका कहना है
हमने समिति द्वारा दिए गए निर्देशों में कोई फेरबदल नहीं किया, जैसे आदेश मिले वैसे ही कॉलेजों को जारी कर दिए-एस.के. सिंह, निदेशक, तकनीकी शिक्षा मण्डल, जोधपुर

पिछले साल का बकाया कुछ नहीं होता, जो हो चुका, वो हो चुका। बढ़ी हुई फीस 2010-11 से ही लागू होनी है। इसी तरह के आदेश जारी किए गए हैं। यदि दो साल की फीस ली जाती है तो गलत है-आर.के.गुप्ता, विशेषाधिकारी, तकनीकी शिक्षा

बीते साल का शुल्क नहीं लिया जा सकता, ऎसी कोई शिकायत नहीं मिली, यदि ऎसा हो रहा है और कोई हमें शिकायत करता है तो संबंधित कॉलेज के खिलाफ कार्रवाई करेंगे-विपिनचन्द्र शर्मा, सचिव, तकनीकी शिक्षा(राजस्थान पत्रिका,कोटा,23.11.2010)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।