स्कूलों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक और बड़ी राहत का ऐलान किया है। अब बारहवीं के उन छात्रों के लिए 60 फीसदी हाजिरी ही पर्याप्त होगी जो खेलकूद प्रतियोगिताओं में शिरकत करते हैं। जबकि, सामान्य छात्रों के लिए परीक्षा में बैठने के लिए 75 फीसदी हाजिरी अनिवार्य है।
बोर्ड की ओर से तैयार इस नए नियम को स्कूलों में खेलकूद को बढ़ावा देने की कोशिशों के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले बोर्ड दसवीं तक के छात्रों के लिए रोजाना और 11-12वीं के लिए सप्ताह में दो खेल के पीरियड अनिवार्य कर चुका है।
बारहवीं बोर्ड में खिलाड़ी छात्रों को मिलने वाली इस राहत के लिए सीबीएसई ने परीक्षा नियमों में संशोधन किया है। सीबीएसई ने परीक्षा नियम 13.2(1) में संशोधन कर साफ किया है कि बोर्ड से संबंध किसी भी स्कूल का कोई भी छात्र बोर्ड की और से आयोजित होने वाली प्रमाण पत्र परीक्षाएं देने के लिए तब तक पात्र नहीं होगा जब तक उसकी उपस्थिति 75 फीसदी न हो।
हालांकि सीबीएसई या स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसजीएफआई) स्तर के खेलों में भाग लेने वाले छात्रों के संबंध में 60 फीसदी उपस्थिति लागू रहेगी, यानी ऐसे छात्रों को 75 फीसदी उपस्थिति की जरूरत नहीं है। राहत का यह नया नियम 12वीं के उन्ही छात्रों पर लागू होगा जो सीबीएसई या एसजीएफआई सरीखी खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हों।
इसी तरह, बोर्ड की स्कूल प्रमाण पत्र परीक्षा के संबंध में आंतरिक मूल्यांकन के विषय में उपस्थिति में कमी को माफ करने का अधिकार बोर्ड अध्यक्ष को होगा। अध्यक्ष गंभीर बीमारी के संबंध में उपस्थिति में कमी को माफ कर सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि अक्सर अभिभावकों की शिकायत रहती थी कि उनका बच्च खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेता है, जिसके चलते उसकी कक्षाओं में उपस्थिति कम हो जाती है और उसका खामियाजा परीक्षा के दौरान बच्चे को भुगतना पड़ता है।
इसी डर के चलते कई बार अभिभावक ही बच्चों को खेल प्रतियोगिता में हिस्सा न लेने का दबाव बनाते नजर आए। अब नियम में संशोधन के बाद एक तरह से खिलाड़ी छात्रों को पुराने नियम के हिसाब से उपस्थिति में 15 फीसदी की छूट प्राप्त हो गई है। इस नियम से अब उपस्थिति में कमी के डर के बिना बच्चे खेल प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकेंगे(दैनिक भास्कर,दिल्ली,23.11.2010)।
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