केंद्रीय कर्मचारियों के लिए राहत वाली खबर है। रिटायरमेंट के वक्त उन्हें अब न तो डायरेक्टरेट ऑफ स्टेट से नो डिमांड सर्टिफिकेट लेने की जरूरत पड़ेगी और न ही उनकी दस फीसदी ग्रेच्युटी ही रोकी जाएगी। डिप्टी डायरेक्टर ऑफ स्टेट्स (पॉलिसी) ने इस बाबत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
गौरतलब है कि पूर्व की व्यवस्था में केंद्रीय कर्मचारी को रिटायर होने के बाद डायरेक्टरेट ऑफ स्टेट से इस आशय का ‘नो डिमांड सर्टिफिकेट’ प्राप्त करना होता था कि उसके नाम कोई सरकारी आवास आवंटित नहीं है। डायरेक्टरेट ऑफ स्टेट की ओर से यह सर्टिफिकेट लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) जारी करता था। सर्टिफिकेट जारी होने के बाद ही पेंशनर को रोकी गई दस फीसदी ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। रिटायरमेंट के बाद पेंशनरों को ‘नो डिमांड सर्टिफिकेट’ और अपनी दस फीसदी ग्रेच्युटी के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा। नई व्यवस्था के तहत अगर किसी कर्मचारी के नाम कोई सरकारी आवास आवंटित नहीं है तो रिटायरमेंट के बाद उसके दफ्तर का प्रशासनिक विभाग स्वयं कर्मचारी से संबंधित रिकार्ड खंगालेगा और विभाग का गजटेज अफसर यह प्रमाणित करेगा कि कर्मचारी के नाम कोई आवास आवंटित नहीं है। अब इसके लिए डायरेक्टरेट ऑफ स्टेट से ‘नो डिमांड सर्टिफिकेट’ लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी(अमर उजाला,इलाहाबाद,10.11.2010)।
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