भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के एक प्रोफेसर के कथित तौर पर गैर मान्यता प्राप्त संस्थान चलाने और छात्रों को ठगने के मामले में संस्थान ने प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय किया है। आईआईटी खड़गपुर के सूत्रों ने बताया कि संस्थान की आंतरिक जांच में आरोपी प्रोफेसर एके घोष को फर्जी संस्थान से जुड़ा पाया गया, जो बिना अनुमति के संचालित था। आईआईटी की आचार संहिता के तहत कोई भी प्रोफेसर आईआईटी से बिना अनुमति प्राप्त किए किसी संस्थान से नहीं जुड़ सकता है। आरोप लगने के बाद प्रो. अमित कुमार घोष को एयरोनाटिकल इंजीनियरिंग विभाग से बर्खास्त कर दिया गया और जांच के आदेश दिए गए थे। आईआईटी खड़गपुर के एयरोनाटिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख अमित कुमार घोष पर आरोप लगाया गया है कि वह इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग (आईईई) चलाने के साथ और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से मान्यता प्राप्त किए बिना छात्रों के लिए डिप्लोमा कोर्स पेश कर रहे थे। आईआईटी खड़गपुर के निदेशक दामोदर आचार्य ने इस विषय पर मानव संसाधान विकास मंत्री कपिल सिब्बल से मुलाकात की और सिब्बल के समक्ष इस विषय पर ब्योरा दिया था। मंत्रालय इस बात से स्तब्ध है कि आईआईटी जैसे इतने प्रतिष्ठित संस्थान का वरिष्ठ प्रोफेसर इस तरह की धोखाधड़ी में शामिल है। आईईई का संचालन खड़गपुर में एक अस्थाई परिसर में किया जा रहा था और वहां से इलेक्टि्रकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे थे। अमित कुमार घोष पर कथित तौर पर इस संस्थान में अध्यक्ष की हैसियत में काम करने का आरोप लगाया गया है जबकि वह आईआईटी खड़गपुर में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। ऐसे आरोप लगाए गए है कि आईईई को आईआईटी खड़गपुर की शाखा बता कर पिछले एक-दो वर्षो से छात्रों को दाखिला दिया जा रहा था(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,11.11.2010)।
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