नए साल में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली भाबरा को एक नई सौगात मिलने जा रही है। एक जनवरी से- जे रामजी, हमू "आजाद नी आवाज" रेडियो मा थी बोलीये छे (नमस्कार, हम "आजाद की आवाज" रेडियो से बोल रहे हैं) शब्दों के साथ एक आवाज रेडियो के ९०.४ मेगाहर्ट्ज पर सुनाई देगी।
इस अनूठे रेडियो से सभी कार्यक्रम भीली भाषा में ही प्रसारित किए जाएँगे। प्रदेश के १० आदिवासी बहुल जिलों में इस तरह के आदिवासी बोलियों के रेडियो केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा खोले जा रहे इन रेडियो केंद्र की तैयारियाँ जोरों पर हैं। प्रदेश के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी एवं वन्या के प्रभारी सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार ८ जिलों में अनुबंध हो चुका है। शेष जगह प्रक्रिया चालू है। मप्र शासन का उपक्रम "वन्या" इसके लिए संपूर्ण तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है। योजना के फील्ड समन्वयक गिरीश भटनागर ने बताया कि केंद्रों की तरंगें हवा में १२ किमी तक फैलेंगी और कोशिश होगी कि जिले के सभी ग्रामीणों तक पहुँचे(उमेश साहू/अशोक हिन्दुस्तानी,नई दुनिया,इन्दौर,23.11.2010)।
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