स्कूल शिक्षा बोर्ड में बिना परीक्षा दिए प्रमाण पत्र हासिल करने के मामले में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद गर्मजोशी दिखाने वाला कर्मचारी महासंघ अब बैकफुट पर लौट आया है। कर्मचारी महासंघ ने पुलिस कार्रवाई में सहयोग जारी रखने और बोर्ड प्रबंधन के खिलाफ चुप्पी साधते हुए गांधीगिरी का फैसला लिया है।
उल्लेखनीय है कि स्कूल शिक्षा बोर्ड में बिना पेपर दिए प्रमाण पत्र हासिल करने के मामले में पुलिस ने बीते शुक्रवार को बोर्ड के दो अधिकारियों वरिष्ठ सहायक व कनिष्ठ सहायक को गिरफ्तार किया था। दोनों अधिकारियों की गिरफ्तारी पर गुस्साए कर्मचारी संगठन ने तमाम सदस्यों सहित पहले बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष व जिलाधीश आरएस गुप्ता के साथ भेंट की और उन्हें तमाम समस्याएं बताई। इसके बाद पुलिस अधीक्षक दिलजीत सिंह ठाकुर से भेंटकर गिरफ्तार अधिकारियों को छोड़ने की सिफारिश की, लेकिन जब इससे भी बात नहीं बनी तो कर्मचारी संगठन के सदस्य सदर थाने पहुंचे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। देर सायं तक कर्मचारी महासंघ की नारेबाजी चलती रही और संगठन ने पौने नौ बजे के करीब धरना प्रदर्शन यह कहकर बंद कर दिया कि शनिवार को जिलाधीश व बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष के साथ बैठक कर आगामी रणनीति बनाएंगे। इस बीच शनिवार को बोर्ड के कर्मचारी महासंघ के सदस्यों व पदाधिकारियों की बैठक हुई, लेकिन बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष आरएस गुप्ता से बैठक न हो सकी। सोमवार को शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष के साथ बोर्ड कर्मचारी महासंघ की बैठक हुई। इस दौरान उन्होंने बोर्ड कर्मचारियों को पुलिस कार्रवाई में बाधा न डालने की नसीहत दी थी, लेकिन चारों ओर से फजीहत होने और शुक्रवार को बोर्ड अधिकारियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद अब बोर्ड कर्मचारी महासंघ बैकफुट पर आ गया है। उधर, इस बाबत शिक्षा बोर्ड कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष मनोहर ठाकुर व महासचिव रतन हंस ने बताया कि महासंघ अब गांधीगीरी अपनाएगा और पहले की तरह पुलिस कार्रवाई में सहयोग करेगा। उन्होंने बताया कि महासंघ मांग करता है कि कोई निर्दोष न पिसे, जबकि दोषियों के खिलाफ तो महासंघ भी कार्रवाई चाहता है(दैनिक जागरण,धर्मशाला,24.11.2010)।
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