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10 नवंबर 2010

राजस्थानःसमान परीक्षा पर असमंजस

मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत कक्षा एक से आठ तक के सभी विद्यार्थियों के लिए शुल्क माफ कर देने से माध्यमिक शिक्षा के तहत आने वाली कक्षा छह से आठ तक की समान परीक्षा के लिए संकट खड़ा हो गया है।

कई जिलों में समान परीक्षा के संयोजक कक्षा छह, सात और आठ के लिए भी माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधानों से परीक्षा शुल्क मांग रहे हैं। प्रति विद्यार्थी आठ रूपए परीक्षा शुल्क है। चूंकि इन कक्षाओं के विद्यार्थियों से शुल्क नहीं लिया जा रहा, ऎसे में संस्था प्रधान असमंजस में है कि किस पेटे से राशि निकालकर समान परीक्षा योजना के लिए दी जाए। इसके लिए पूर्व में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों से एकमुश्त पच्चीस रूपए शुल्क वसूल करने का प्रस्ताव बनाया गया था, लेकिन इसे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत गलत मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया गया। इसके बाद अब तक निदेशालय इन कक्षाओं की समान परीक्षा के लिए शुल्क या बजट का निर्णय नहीं कर पाया है।

गौरतलब है कि प्रारम्भिक शिक्षा में इस समस्या के समाधान के लिए सभी संस्था प्रधानों को सर्वशिक्षा अभियान के तहत दूसरे मदों में लिए मिल रही राशि में से परीक्षा शुल्क समान परीक्षा योजना में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं, पर माध्यमिक शिक्षा से जुड़े विद्यालयों को ऎसा कोई शुल्क नहीं मिलता है।
दिशा-निर्देश नहीं

'कक्षा छह, सात और आठ के शुल्क के सम्बन्ध में अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। परीक्षाएं करीब आ रही हैं, ऎसे में परीक्षा आयोजन के लिए फण्ड की व्यवस्था तो शीघ्र ही करनी होगी।' -लियाकत अली खां, जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,10.11.2010)

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