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22 नवंबर 2010

यूपीएससी जैसी होगी राजस्थान सिविल सेवा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि अपनी आरपीएससी, संघ लोक सेवा आयोग जैसी होगी। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में आरपीएससी ने बेहतरीन काम किया है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आरपीएससी के कामकाज को वक्त की जरूरत के मुताबिक ढालने के लिए सभी जरूरी मांगे पूरी की जाएंगी। मुख्यमंत्री रविवार को राजस्थान लोक सेवा आयोग कार्यालय परिसर में 1.55 करोड़ की लागत से बनने वाले गेस्ट हाउस का शिलान्यास करने के बाद आयोजित समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब आरएएस की एक परीक्षा, इंटरव्यू और चयन की प्रक्रिया में करीब ढाई वर्ष का समय लगता था। आयोग ने अब कैलेंडर बना लिया है और एक वर्ष में प्रक्रिया पूरी करने का प्रोसेस शुरू हो चुका है।

जवाबदेह बनाने पर जोर: उन्होंने अध्यक्ष एमएल कुमावत से कहा कि आयोग को यूपीएससी की तरह ढालने के लिए राज्य सरकार उनके साथ है। आयोग में कर्मचारियों, संसाधनों की कमी जल्द पूरी की जाएगी। उन्होंने आयोग की परीक्षा प्रणाली को योजनाबद्ध तरीके से आयोजित कर निर्धारित अवधि में परिणाम घोषित करने के लिए कार्यप्रणाली को और जवाबदेह बनाने पर बल दिया।

केंद्र सरकार भी करेगी मदद: केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार राज्यमंत्री सचिन पायलट ने इस अवसर पर कहा कि संचार क्रांति के युग में आरपीएससी को कनेक्टिविटी के लिए उनका मंत्रालय पूरी मदद करेगा। उन्होंने अयोग के अध्यक्ष से कहा कि वे डीपीआर बनाकर भेजें ताकि वे अपने मंत्रालय से पूरी मदद दिलवा सकें।

जल्द पूरी हों जरूरतें: इससे पूर्व आयोग के अध्यक्ष एमएल कुमावत ने कहा कि आयोग के समक्ष करीब 17 हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया लंबित हैं। लेकिन आयोग के पास संसाधनों की कमी है, मैन पावर नहीं है। उन्होंने कहा सरकार संसाधन उपलब्ध करा दे तो कामकाज में परिवर्तन आ सकता है। उन्होंने सीएम से आग्रह किया कि आयोग की जरूरतों को पूरा किया जाए।

भर्ती शुरू तो दलाल सक्रिय: मुख्यमंत्री ने जनता से अपील की कि वे दलालों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि कई बड़े कांड हुए हैं। जब भी कोई बड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू होती है तो दलाल सक्रिय हो जाते हैं। वे भर्ती के नाम पर लोगों से लाखों रुपए ठगते हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है।

पैसा देकर सलेक्शन तो फिर क्या उम्मीद करें: मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग पैसा देकर राजकीय सेवा में सलेक्ट होते हैं उनके दिलोदिमाग में काम संभालते ही एक ही बात घूमती रहती है कि सलेक्शन में जो पैसा लगाया उसकी जल्द से जल्द वसूली कैसे हो। ऐसे लोगों से पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही की क्या उम्मीद की जा सकती है।

इसीलिए जरूरी है गेस्ट हाउस: राजस्थान लोक सेवा आयोग परिसर में गेस्ट हाउस अत्यंत जरूरी है। दरअसल आयोग की विभिन्न परीक्षाओं, साक्षात्कारों के लिए देश् भर से विशेषज्ञ आते रहते हैं। आयोग इन्हें सर्किट हाउस में ठहराता है। इसीलिए गोपनीयता बरकरार नहीं रह पाती। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि इंटरव्यू के लिए बुलाए गए विशेषज्ञों से अभ्यर्थी या उनके परिजन, मिलने-जुलने वाले लोग ही सिफारिश करने पहुंच जाते हैं।

ऐसे में कई बार चयन प्रक्रिया पर संदेह उठ खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग गैस्ट हाउस के प्रस्ताव को खारिज कर चुका था, लेकिन जब गोपनीयता के बारे में बताया गया तो मंजूरी मिल गई। इस अवसर पर मेयर कमल बाकोलिया, संसदीय सचिव ब्रह्मदेव कुमावत, विधायक नसीम अख्तर, वासुदेव देवनानी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष जसराज जयपाल, आयोग के सदस्य एचएल मीणा, पीके दशोरा, केएल बैरवा, ब्रह्मसिंह गुर्जर, एसपीएस नांगल और सचिव डॉ. केके पाठक भी मौजूद थे(दैनिक भास्कर,अजमेर,22.11.2010)।

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