भोपाल के सरोजनी नायडू कन्या महाविद्यालय (नूतन), हमीदिया कॉलेज, महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय और उच्च शिक्षा उत्कृष्टता संस्थान जैसे कॉलेज में हिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन कोर्स नहीं है। इन कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले छात्रों के साथ बाध्यता है कि वे हिस्ट्री में प्लेन एमए करें और इसके बाद स्पेशलाइजेशन के लिए किसी दूसरे प्रदेश में जाकर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा करें। एक था जो बंद हो गया करीब 10 साल पहले तक राजधानी में बिरला ग्रुप द्वारा बिरला संग्रहालय में प्राच्य निकेतन संस्थान के माध्यम से एनशिएंट हिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन की सुविधा दी गई थी। प्राच्य निकेतन की लाइब्रेरी भी एनशिएंट हिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन के लिहाज से काफी सम्पन्न थी। व्यक्तिगत कारणों की वजह से प्राच्य निकेतन बंद हो गया और उसी के साथ शहर में हिस्ट्री सब्जेक्ट में स्पेशलाइजेशन का एक मात्र स्रोत भी खत्म हो गया। इसके बाद पिछले 10 सालों से न सरकार ने इस दिशा में ध्यान दिया और न ही किसी सरकारी और गैर सरकारी शिक्षा संस्थान ने। कठिन विषय है एनशिएंट हिस्ट्री महारानी लक्ष्मीबाई कॉलेज में इतिहास विभाग के प्रमुख प्रो. आरके अग्रवाल भी कहते हैं कि वर्तमान में शहर में एनशिएंट हिस्ट्री में स्पेशलाइजेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। यह सब्जेक्ट काफी कठिन है और इसमें आर्कियोलॉजी प्रमुख रूप से शामिल है। शहर के आस-पास एनशिएंट हिस्ट्री की रिसर्च के लिए आर्कियोलॉजिक साइट्स तो काफी हैं, मगर शहर में कोई ऐसा कोर्स नहीं चलता जो स्पेशलाइजेशन दे सके। हमारे यहां भी अधिक छात्रों के रुझान को देखते हुए मॉडर्न हिस्ट्री और आर्कियोलॉजी में ही स्पेशलाइज्ड एमए कोर्स है। नहीं है शहर में सुविधा हमीदिया में हिस्ट्री की प्रोफेसर डॉ. शैल प्रधान कहती हैं कि हमारे कॉलेज में भी सिर्फ प्लेन हिस्ट्री में एमए की सुविधा है। एनशिएंट हिस्ट्री में पीएचडी या स्पेशलाइजेशन करने के इच्छुक स्टूडेंट्स को अक्सर इसके लिए मुंबई या दूसरे शहरों की ओर जाना पड़ता है, जबकि भोपाल के अंदर और आस-पास एनशिएंट हिस्ट्री की रिसर्च के लिए काफी अच्छी साइट्स मौजूद हैं। कई थे स्पेशलाइजेशन कोर्स कुछ आंतरिक परेशानियों के कारण 2001 में प्राच्य निकेतन को बंद कर दिया गया। इस शिक्षण संस्थान में एनशिएंट हिस्ट्री, कल्चर और फोटोग्राफी को लेकर स्पेशलाइजेशन कोर्स होते थे। मैं खुद भी प्राच्य निकेतन की ही छात्रा रही हूं, इसलिए मुझे मालूम है कि संस्थान के बंद होने से शहर के छात्रों को क्या नुकसान पहुंचा है। कोर्स के बंद हो जाने के बाद भी संग्रहालय की लाइब्रेरी में सभी किताबें अभी भी उपलब्ध हैं, जो कोई भी लाइब्रेरी में पढ़ने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। - मधुलिका राठौर, क्यूरेटर, बिरला म्यूजियम(रश्मि प्रजापति,दैनिक जागरण,भोपाल,10.11.2010)
यह तो अच्छी खबर नही है।
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