परीक्षा है, तो तनाव है। इंजीनियरिंग जैसी कड़ी प्रतिस्पर्धा वाली प्रवेश परीक्षा की तैयारी में तो तनाव का यह स्तर कई गुना बढ़ जाना आम बात है। एक तनाव अपने लिए बेहतर प्रदर्शन करने का और दूसरा अपने दोस्तों से बेहतर प्रदर्शन का यानी पीयर प्रेशर। पर, सवाल ये है कि अगर एक बार आपने यह तय कर लिया है कि आपको कोई प्रतियोगी परीक्षा पास करके दिखानी है, तो फिर अपने इस सपने को सच में तब्दील करने की राह में तनाव, पीयर प्रेशर जैसी वजहों को क्यों आने दिया जाए? जब जिंदगी में आगे ही बढ़ते जाना आपका लक्ष्य है, तो फिर किसी बात से या किसी व्यक्ति से डरना कैसा? आपकी हिम्मत और मेहनत के सामने तो किस्मत भी आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। यह भी सच है कि प्रतियोगी परीक्षा के इस दौर में आगे बढ़ना है, तो मेहनत और लगन के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। अगर तनाव और पीयर प्रेशर आपकी सफलता की राह में बाधा बन रही है, तो इस बात को समझना जरूरी है कि अगर आप इसे समस्या मानेंगे, तो जिंदगी भर आपको पग-पग पर इसका सामना करना पड़ेगा।
तनाव और पीयर प्रेशर का एक दूसरा पहलू भी होता है। अगर यह एक सीमा में हो तो आपके लिए फायदेमंद भी हो सकता है। यानी यह आपको ज्यादा मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी कर सकती है। पर, इसके लिए जरूरी है कि आप तनाव और पीयर प्रेशर को अपने ऊपर हावी न होने दें, बल्कि उसका उपयोग खुद को प्रेरित करने के लिए करें।
क्या है पीयर प्रेशर पीयर प्रेशर का मतलब है, साथ पढ़ रहे दोस्तों से यह डर होना कि कहीं उनकी तैयारी मुझसे अच्छी तो नहीं। कहीं वह परीक्षा में मुझसे बेहत नंबर न ले आए। पीयर प्रेशर का मुख्य कारण है खुद पर और अपनी प्रतिभा पर यकीन न होना और साथ ही खुद को पढ़ाई में दूसरों से कमजोर समझना।
क्या यह सही है?पीयर प्रेशर के बोझ तले दबना किसी तरह से अच्छी बात नहीं है। इसका आपके प्रदर्शन पर नकारात्मक असर ही पड़ेगा। पढ़ाई में ज्यादा मेहनत करने का आपका लक्ष्य अपने किसी साथी से ज्यादा नंबर लाने के लिए नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करना होना चाहिए। अगर आपको अपने दोस्तों से किसी तरह की प्रतियोगिता करनी ही है, तो उनके जितना मेहनत करने की प्रतियोगिता करें। उन्हें परीक्षा में पीछे छोड़ने की प्रतियोगिता करना ठीक नहीं है। कमाल तो तब होगा, जब आप इस स्वस्थ प्रतियोगिता के कारण उनसे भी अच्छी तैयारी कर पाएंगे। व्यर्थ की बातों में उलझना छोड़िए और किसी भी प्रकार के डर को अपने मन से निकालकर सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान दीजिए, आप किसी से भी पीछे नहीं रहेंगे।
क्या बला है स्ट्रैस?परीक्षा की तैयारी करते समय पाठय़क्रम को देखकर घबराना, असफल होने की चिंता, माता-पिता के सपने को पूरा करने का दबाव.. ये सब बातें अकसर आपको परेशान करती रहती हैं और दरअसल इन्हीं बातों का वृहद रूप तनाव का कारण बन जाता है। अपने भविष्य और करियर के लिए सोचना और चिंता करने में कोई बुराई नहीं है, पर अगर इस तनाव का असर आपके स्वास्थ्य पर, आपके लाइफ स्टाइल पर पड़ने लगे, तो यह परेशानी की बात है। दरअसल, ज्यादा तनाव का असर परीक्षा में आपके प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। इसलिए, तनाव से थोड़ी दूरी बनाए रखने में ही आपकी भलाई है।
पीयर प्रेशर के साइड इफेक्ट्सपरफॉरमेंस में कम : परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है, एकाग्रता। पर, अधिक तनाव एकाग्रता को भंग करता है, सोचने-समझने की क्षमता को कम करता है। तनाव का असर परीक्षा में प्रदर्शन पर पड़ता है।
शारीरिक नुकसान : तनाव का असर स्प्वास्थ्य पर भी पड़ता है। सिर दर्द, पेट में दर्द, धड़कन का तेज होना, घबराहट होने से बहुत पसीना आना, मांसपेशियों में खिंचाव आदि तनाव के कारण होने लगते हैं।
मानसिक नुकसान : तनाव से मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं, चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है, नींद नहीं आती और आत्मविश्वास दिन-ब-दिन कमजोर होने लगता है।
कैसे दूर करें स्ट्रैस - परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी करनी है, तो ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताएं जो आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएं और तनाव को घटाएं।
- हेल्थ इज वैल्थ कहावत आप पर पूरी तरह से सटीक बैठती है। किसी भी काम को करने के लिए पहले आपका स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। इसके लिए अपने खान-पान को संतुलित रखें। पोषक तत्वों से भरपूर खाना आपको स्फूर्ति देगा और ध्यान लगाकर पढ़ाई करने की ऊर्जा भी। प्रोटीन युक्त आहार भरपूर मात्र में लें। सुबह कुछ देर एक्सरसाइज करें, इससे आप दिनभर एक्टिव रहेंगे और पढ़ाई पर ध्यान लगेगा।
- पढ़ाई के दौरान हर घंटे दस से पंद्रह मिनट का ब्रेक लें। इस समय आप खुद को रिलैक्स करने के लिए जो चाहें वह करें। इस वक्त आप टीवी देख सकते हैं, घूम सकते हैं, किसी से बात कर सकते हैं। ऐसा करने से आप फ्रेश होकर फिर से पढ़ाई पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
- अपनी सोच सकारात्मक रखें। हमेशा इस लक्ष्य के साथ पढ़ाई करें।
एक्सपर्ट की राय
हड़बड़ी से कुछ हाथ नहीं लगेगा
- पहले से तैयारी करें। यह नीति किसी भी तनाव का सामना करने की सबसे अच्छी रणनीति है। परीक्षा के पास आने पर हड़बड़ी के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।
- अगर आपकी तैयारी अच्छी है, तो तनाव या किसी भी अन्य तरह के दबाव को खुद पर हावी न होने दें। पिछले प्रश्नों का साथ-साथ अभ्यास भी करते रहें। अपने दोस्तों या फिर किसी दूसरे स्टूडेंट के साथ खुद की तुलना ना करें। सभी की क्षमता, योग्यता अलग-अलग होती है।
- असफलता से कभी न डरें। अगर किसी कारण से एक दरवाजा बंद भी हो जाता है, तो आपके सामने कई और दरवाजे बेहतर भविष्य की आहट के साथ खुल जाएंगे। तैयारी के दौरान असफलता के डर को अपने सामने न टिकने दें।
परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए खुद पर विश्वास की कमी, बच्चों की आम समस्या है। इस समस्या का प्रमुख कारण है, पीयर प्रेशर। अपने दोस्तों के साथ एक स्तर पर चल रही प्रतियोगिता के कारण बच्चों कई बार अध्यापक की बात को नजरंदाज कर परीक्षा की तैयारी में भी अपने साथियों की नकल करने लगते हैं। दूसरों जैसा बनने और दूसरों जैसा करने की इस होड़ में बच्चों का अपना प्रदर्शन कब प्रभावित हो जाता है, उन्हें पता भी नहीं चलता है।
के. एल. प्रसाद, संचालक, श्री चैतन्य कोचिंग इंस्टीटय़ूट
(कुसुमलता,हिंदुस्तान,दिल्ली,9.11.2010)
तनाव और पीयर प्रेशर का एक दूसरा पहलू भी होता है। अगर यह एक सीमा में हो तो आपके लिए फायदेमंद भी हो सकता है। यानी यह आपको ज्यादा मेहनत करने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित भी कर सकती है। पर, इसके लिए जरूरी है कि आप तनाव और पीयर प्रेशर को अपने ऊपर हावी न होने दें, बल्कि उसका उपयोग खुद को प्रेरित करने के लिए करें।
क्या है पीयर प्रेशर पीयर प्रेशर का मतलब है, साथ पढ़ रहे दोस्तों से यह डर होना कि कहीं उनकी तैयारी मुझसे अच्छी तो नहीं। कहीं वह परीक्षा में मुझसे बेहत नंबर न ले आए। पीयर प्रेशर का मुख्य कारण है खुद पर और अपनी प्रतिभा पर यकीन न होना और साथ ही खुद को पढ़ाई में दूसरों से कमजोर समझना।
क्या यह सही है?पीयर प्रेशर के बोझ तले दबना किसी तरह से अच्छी बात नहीं है। इसका आपके प्रदर्शन पर नकारात्मक असर ही पड़ेगा। पढ़ाई में ज्यादा मेहनत करने का आपका लक्ष्य अपने किसी साथी से ज्यादा नंबर लाने के लिए नहीं, बल्कि अपने सपनों को साकार करना होना चाहिए। अगर आपको अपने दोस्तों से किसी तरह की प्रतियोगिता करनी ही है, तो उनके जितना मेहनत करने की प्रतियोगिता करें। उन्हें परीक्षा में पीछे छोड़ने की प्रतियोगिता करना ठीक नहीं है। कमाल तो तब होगा, जब आप इस स्वस्थ प्रतियोगिता के कारण उनसे भी अच्छी तैयारी कर पाएंगे। व्यर्थ की बातों में उलझना छोड़िए और किसी भी प्रकार के डर को अपने मन से निकालकर सिर्फ अपनी तैयारी पर ध्यान दीजिए, आप किसी से भी पीछे नहीं रहेंगे।
क्या बला है स्ट्रैस?परीक्षा की तैयारी करते समय पाठय़क्रम को देखकर घबराना, असफल होने की चिंता, माता-पिता के सपने को पूरा करने का दबाव.. ये सब बातें अकसर आपको परेशान करती रहती हैं और दरअसल इन्हीं बातों का वृहद रूप तनाव का कारण बन जाता है। अपने भविष्य और करियर के लिए सोचना और चिंता करने में कोई बुराई नहीं है, पर अगर इस तनाव का असर आपके स्वास्थ्य पर, आपके लाइफ स्टाइल पर पड़ने लगे, तो यह परेशानी की बात है। दरअसल, ज्यादा तनाव का असर परीक्षा में आपके प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। इसलिए, तनाव से थोड़ी दूरी बनाए रखने में ही आपकी भलाई है।
पीयर प्रेशर के साइड इफेक्ट्सपरफॉरमेंस में कम : परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी है, एकाग्रता। पर, अधिक तनाव एकाग्रता को भंग करता है, सोचने-समझने की क्षमता को कम करता है। तनाव का असर परीक्षा में प्रदर्शन पर पड़ता है।
शारीरिक नुकसान : तनाव का असर स्प्वास्थ्य पर भी पड़ता है। सिर दर्द, पेट में दर्द, धड़कन का तेज होना, घबराहट होने से बहुत पसीना आना, मांसपेशियों में खिंचाव आदि तनाव के कारण होने लगते हैं।
मानसिक नुकसान : तनाव से मन में नकारात्मक विचार आने लगते हैं, चिड़चिड़ाहट बढ़ जाती है, नींद नहीं आती और आत्मविश्वास दिन-ब-दिन कमजोर होने लगता है।
कैसे दूर करें स्ट्रैस - परीक्षा के लिए बेहतर तैयारी करनी है, तो ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताएं जो आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएं और तनाव को घटाएं।
- हेल्थ इज वैल्थ कहावत आप पर पूरी तरह से सटीक बैठती है। किसी भी काम को करने के लिए पहले आपका स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। इसके लिए अपने खान-पान को संतुलित रखें। पोषक तत्वों से भरपूर खाना आपको स्फूर्ति देगा और ध्यान लगाकर पढ़ाई करने की ऊर्जा भी। प्रोटीन युक्त आहार भरपूर मात्र में लें। सुबह कुछ देर एक्सरसाइज करें, इससे आप दिनभर एक्टिव रहेंगे और पढ़ाई पर ध्यान लगेगा।
- पढ़ाई के दौरान हर घंटे दस से पंद्रह मिनट का ब्रेक लें। इस समय आप खुद को रिलैक्स करने के लिए जो चाहें वह करें। इस वक्त आप टीवी देख सकते हैं, घूम सकते हैं, किसी से बात कर सकते हैं। ऐसा करने से आप फ्रेश होकर फिर से पढ़ाई पर बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।
- अपनी सोच सकारात्मक रखें। हमेशा इस लक्ष्य के साथ पढ़ाई करें।
एक्सपर्ट की राय
हड़बड़ी से कुछ हाथ नहीं लगेगा
- पहले से तैयारी करें। यह नीति किसी भी तनाव का सामना करने की सबसे अच्छी रणनीति है। परीक्षा के पास आने पर हड़बड़ी के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।
- अगर आपकी तैयारी अच्छी है, तो तनाव या किसी भी अन्य तरह के दबाव को खुद पर हावी न होने दें। पिछले प्रश्नों का साथ-साथ अभ्यास भी करते रहें। अपने दोस्तों या फिर किसी दूसरे स्टूडेंट के साथ खुद की तुलना ना करें। सभी की क्षमता, योग्यता अलग-अलग होती है।
- असफलता से कभी न डरें। अगर किसी कारण से एक दरवाजा बंद भी हो जाता है, तो आपके सामने कई और दरवाजे बेहतर भविष्य की आहट के साथ खुल जाएंगे। तैयारी के दौरान असफलता के डर को अपने सामने न टिकने दें।
परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए खुद पर विश्वास की कमी, बच्चों की आम समस्या है। इस समस्या का प्रमुख कारण है, पीयर प्रेशर। अपने दोस्तों के साथ एक स्तर पर चल रही प्रतियोगिता के कारण बच्चों कई बार अध्यापक की बात को नजरंदाज कर परीक्षा की तैयारी में भी अपने साथियों की नकल करने लगते हैं। दूसरों जैसा बनने और दूसरों जैसा करने की इस होड़ में बच्चों का अपना प्रदर्शन कब प्रभावित हो जाता है, उन्हें पता भी नहीं चलता है।
के. एल. प्रसाद, संचालक, श्री चैतन्य कोचिंग इंस्टीटय़ूट
(कुसुमलता,हिंदुस्तान,दिल्ली,9.11.2010)
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