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03 नवंबर 2010

फायर इंजीनियरिंग में करिअर

कोलकाता के पार्क स्ट्रीट की स्टीफन कोर्ट बिल्डिंग में इसी साल मार्च में लगी आग ने 6 लोगों को मौत के आगोश में ले लिया, वहीं दर्जनों लोग घायल हुए। अक्तूबर 2009 में जयपुर के ऑयल डिपो में लगी आग पर हफ्तों की मशक्कत के बाद काबू पाया गया। इस दुर्घटना में 13 लोगों की जानें गईं और अनुमानत: 300 करोड़ का नुकसान हुआ। 2006 में मेरठ के मेले में लगी आग भी दिल दलहाने वाली थी। इस हादसे में 50 से अधिक लोगों की जान गई। वर्ष 2004 में तमिलनाडु के कुंभकोणम में बच्चों के स्कूल में ऐसी भीषण आग लगी कि 83 बच्चे असमय काल के गाल में समा गए।
ये सारी दुघर्टनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि आग यदि अनियंत्रित हो गई तो जान-माल का कितना नुकसान होगा, इसका अंदाजा आसानी से नहीं लगाया जा सकता। यहीं पर उन पेशेवरों की जरूरत महसूस होती है, जो आग लगने के कारणों को जानता है और उनसे बचाव के कौशल से लैस होते हैं। यदि किसी कारणवश आग लग गई तो उसे बुझाने के लिए त्वरित कार्रवाई करना भी जरूरी होता है। लिहाजा अग्निशमन एक विधा के रूप में अपनी महत्ता साबित करती है।
अग्निशमन को लेकर जहां एक तरफ जागरूकता जरूरी है, वहीं सरकार ने भी फायर सेफ्टी के कुछ मानक तय किए हैं। हर छोटी-बड़ी इमारत में अग्निशमन के इंतजामात पूरे हों, यह जरूरी कर दिया गया है। इसे देखने-समझने के लिए अग्निशमन के प्रोफेशनल्स की मांग होती है। यही वजह है कि इसे एक पूरे विषय के तौर पर पढ़ाने और शिक्षित करने के लिए पाठ्य़क्रम तैयार किए गए हैं। अग्निशमन से जुड़े पाठय़क्रम करने के बाद निस्संदेह एक बेहतरीन करियर का भी रास्ता खुलता है। स्पष्ट है कि आग की किस्में, इसके कारण और उसे बुझाने का हुनर फायर इंजीनियरिंग की शक्ल ले लेता है।
कार्य का स्वरूप
फायर इंजीनियरिंग एक कामयाब करियर के साथ-साथ जनसेवा से भी जुड़ा हुआ क्षेत्र है। फायर इंजीनियर्स का मुख्य काम होता है आग लगने के कारणों का पता लगाना और उसे रोकने के उपायों का विश्लेषण करना। फायर इंजीनियर्स आग पर नियंत्रण पाने के लिए जल्द से जल्द स्ट्रेटेजी बनाते हैं। अग्निशमन कर्मचारियों को हुक्म देते हैं कि कैसे और कहां किस तरह आग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। यह सिविल, इलेक्ट्रिकल, एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग से जुड़ा क्षेत्र है। मसलन, आग बुझाने के यंत्रों की तकनीकी जानकारी, स्प्रिंक्लर सिस्टम, अलार्म, पानी की बौछार का सबसे स्टीक इस्तेमाल, कम से कम समय और कम से कम संसाधनों में ज्यादा से ज्यादा जान और माल की रक्षा करना उसका उद्देश्य होता है।
योग्यताएं
इस फील्ड के लिए जितनी जरूरत डिग्री की है, उससे ज्यादा जरूरत कुछ व्यक्तिगत योग्यताओं की भी है। आग बारूद से भरे कारखानों में लग सकती है और कैमिकल फैक्ट्री में भी, घनी आबादी वाले इलाकों व जंगलों में भी। ऐसे में साहस, धैर्य के साथ लीडरशिप क्वालिटी, क्विक डिसीजन लेने की क्षमता का होना जरूरी है, ताकि किसी भी बड़ी दुर्घटना को कंट्रोल कर सकें। फिर भी डिप्लोमा या डिग्री में दाखिले के लिए 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसमें प्रवेश के लिए ऑल इंडिया एंट्रेंस एग्जाम होता है। कैमिस्ट्री के साथ फिजिक्स या गणित विषय में 50 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना जरूरी है, लेकिन इन सबसे अलहदा है फिजिकल स्टैंडर्ड और उम्र। पुरुषों के लिए न्यूनतम लंबाई 165 सेंटीमीटर, वजन 50 किलोग्राम। वहीं महिलाएं कम से 157 सेंटीमीटर लंबी हों, वजन कम से कम 46 किलोग्राम हो। आई विजन दोनों के लिए 6/6 होना चाहिए और उम्र 19 साल से 23 साल के भीतर हो।
कौन-कौन से हैं कोर्स
डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी, पीजी डिप्लोमा इन फायर एंड सेफ्टी, बीएससी इन फायर इंजीनियरिंग, सर्टिफिकेट कोर्स इन फायर फाइटिंग, फायर टेक्नोलॉजी एंड इंडस्ट्रियल सेफ्टी मैनेजमेंट, इंडस्ट्रियल सेफ्टी सुपरवाइजर, रेस्क्यू एंड फायर फाइटिंग जैसे कोर्स शामिल हैं।
इन कोर्सेज की अवधि 6 महीने से लेकर तीन साल तक है। कोर्स के दौरान आग बुझाने की तकनीकी जानकारी से लेकर जान-माल के बचाव के साइंटिफिक फॉमरूलों की जानकारी दी जाती है, जैसे आग पर काबू पाने, खतरों से खेलने, उपकरणों का प्रयोग कैसे किया जाए, आदि गुण सिखाये जाते हैं।
कहां-कहां हैं अवसर
दिल्ली इंस्टीटय़ूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग के कैप्टन कृष्ण कुमार के मुताबिक इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं। पहले सिर्फ महानगरों में फायर स्टेशन होते थे, आज हर जिले में फायर स्टेशन हैं। इसके अलावा आज हर सरकारी और गैरसरकारी दफ्तर में एक फायर इंजीनियर की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। फायर इंजीनियर की अग्निशमन विभाग के अलावा आर्किटेक्चर और बिल्डिंग निर्माण, इंश्योरेंस एसेसमेंट, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, रिफाइनरी, गैस फैक्ट्री, निर्माण उद्योग, प्लास्टिक, एलपीजी तथा कैमिकल्स प्लांट, बहुमंजिली इमारतों व एयरपोर्ट, हर जगह इनकी खासी डिमांड है।
आमदनी का स्रोत
फायर इंजीनियरिंग का पाठय़क्रम पूरा करने के बाद नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ता। सरकारी मकहमे में तो अवसर हैं ही, प्राइवेट संस्थान भी बेहतर सैलरी पैकेज पर रखते हैं। हां प्राइवेट संस्थान जहां अनुभव के आधार पर वेतन फिक्स करते हैं, वहीं सरकारी संस्थानों में फिक्स सैलरी होती है।
प्रमुख संस्थान
इंडियन इंस्टिटय़ूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर
वेबसाइट
 : www.iitkgp.ac.in
राष्ट्रीय अग्निशमन सेवा महाविद्यालय, पालम रोड, नागपुर
वेबसाइट
 : www.nfscnagpur.nic.in
दिल्ली इंस्टीटय़ूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
वेबसाइट : www.dife.in
कॉलेज ऑफ फायर टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद
वेबसाइट : www.collegeoffiretechnology.com
इंटरनेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ फायर इंजीनियरिंग सेफ्टी एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट, पुणे
वेबसाइट
 : www.nifsindia.net
(फजले गुफरान,हिंदुस्तान,2.11.2010)

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