बरकतउल्ला विवि में शिक्षकों का टोटा पड़ गया है। बीयू ने जैसे-तैसे विभाग तो खोल लिए, उनमें पाठ्यक्रम भी संचालित कर लिए, लेकिन यहां पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं।
हाल ये है कि आईटी विभाग में भौतिकी के शिक्षक तैनात हैं, तो योग विभाग में संस्कृत के शिक्षक। यहीं नहीं वे यहां के विभागाध्यक्ष भी बन चुके हैं। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीयू के विभागों में पढ़ाई किस तरह चल रही है।
बीयू को शिक्षकों को रिझाने के लिए विज्ञापन देना पड़ सकता है। यहां शिक्षक न होने का कारण है बीयू की प्रशासनिक अक्षमता। प्रबंधन के पास शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता सुधारने के लिए समय ही नहीं है, वह अन्य विवादों में ही फंसा रहता है। ये विभाग सालों से शिक्षकों के बिना चल रहे हैं, लेकिन इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
लॉ विभाग
इस विभाग में बीए एलएलबी (60 सीट), एलएलएम(30 सीट) और चार पीजी डिप्लोमा कोर्स (कुल 170) संचालित किए जा रहे हैं। बार काउंसिल के नियमों के मुताबिक यहां करीब 12 शिक्षक होना चाहिए, लेकिन महज दो शिक्षक डॉ. एमके श्रीवास्तव और डॉ. मोना पुरोहित पदस्थ हैं। इन्हीं के भरोसे पूरा विभाग चल रहा है।
बीयूआईटी
बीयू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से चार साल का इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम करवाया जा रहा है। इसकी अलग-अलग ब्रांच में 270 सीटें हैं। इसके अलावा मास्टर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन, मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी, एमएससी और पीजी डिप्लोमा कोर्स भी संचालित हैं। इनमें भी 200 सीट हैं,फिर भी विभाग,निदेशक आरके पांडे के भरोसे चल रहा है,जबकि वे भी भौतिकी विषय के प्रोफेसर हैं। नियमों के मुताबिक यहां 40 शिक्षकों की आवश्यकता है।
योग विभाग
इस विभाग में 5 कोर्स चलाए जा रहे हैं। इनमें पीजी डिप्लोमा इन योगिक साइंस,स्ट्रेस मैनेजमेंट और योगा थैरेपी शामिल हैं। योग में एमफिल और पीएचडी भी करवाई जाती है। इन सभी कोर्सेस के लिए यहां महज एक व्याख्याता डॉ. साधना दोनेरिया पदस्थ हैं। डॉ. दोनेरिया इस विभाग की विभागाध्यक्ष हैं,जबकि इन्होंने एमए और पीएचडी संस्कृत में की है।
प्रौढ़ एवं सतत शिक्षा विभाग
यूजीसी ने यहां 4 पाठ्यक्रमों को चलाने की अनुमति दी थी, लेकिन 4 साल में एक भी छात्र का एडमिशन नहीं हुआ। इसके चलते ये विभाग अब अस्तित्व में नहीं है। अब यहां बीएड व एमएड संचालित किया जा रहा है। एनसीटीई के मापदंडों के मुताबिक यहां कोई शिक्षकनहीं है, जो शिक्षक हैं उनके खिलाफ धारा 420 के तहत थाने में शिकायत दर्ज है।
मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट(क्रिम)
यह संस्थान बुरे दौर से गुजर रहा है। यहां से एमबीए जैसी प्रोफेशनल डिग्री दी जाती है,लेकिन इसका प्रबंधन संभालने वाला कोई नहीं है। पूर्व निदेशक प्रो.पीके मिश्रा, देवी अहिल्या विवि के कुलपति बन गए। अब यहां एक मात्र शिक्षक डॉ.विवेक शर्मा बचे हैं,जो वाणिज्य के रीडर हैं।
प्रयास जारी है..
बीयू प्रशासन शिक्षकों की संख्या बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। कुछ शिक्षकों की भर्ती के लिए शासन को भी लिखा गया है-संजय पी तिवारी,कुलसचिव,बीयू(दैनिक भास्कर,भोपाल,21.11.2010)
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