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23 नवंबर 2010

साझा मेडिकल परीक्षा के लिए झारखंड तैयार नहीं

एमबीबीएस में दाखिले के लिए प्रदेश के सभी मेडिकल कालेजों में साझा परीक्षा आयोजित करने के मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई )के सुझाव से राज्य सरकार सहमत नहीं है। अधिकारियों ने संचिका में अपनी टिप्पणी लिखकर इस पर आपत्ति की है। शीघ्र ही राज्य के रुख से केंद्र को अवगत करा दिया जाएगा। मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) ने सभी राज्यों की पूरी सीटों के लिए एक साझा प्रवेश परीक्षा लेने का निर्णय लिया है। इसके अनुसार, परीक्षा सीबीएसई के माध्यम से ही होगी। अर्हता व कट आफ मा‌र्क्स एमसीआई द्वारा पूर्व में जारी रेगुलेशन के तहत ही निर्धारित होगा। परीक्षा के आधार पर दो प्रकार की मेधा सूची जारी की जाएगी। पहली अखिल भारतीय मेधा सूची, जबकि दूसरी राज्य स्तरीय। राज्य स्तरीय सूची में संबंधित राज्य के अभ्यर्थी ही होंगे। राज्य स्तरीय सूची से यदि सीटें नहीं भरती हैं तो नामांकन दूसरे राज्यों के छात्रों का भी लिया जा सकेगा। इसी बिंदु पर आपत्ति की गई है। वर्तमान में एमसीआई द्वारा तय नियम के अनुसार, अर्हता परीक्षा व प्रवेश परीक्षा के लिए अलग-अलग सामान्य के लिए 50 प्रतिशत तथा एससी-एसटी के लिए 40 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य है। झारखंड में खासकर एससी व एसटी द्वारा तय अंक प्रतिशत नहीं लाने के कारण सीटें रिक्त रह जाती हैं। ऐसे में ये सीटें दूसरे राज्यों को चली जाएंगी। 2010-11 में भी अनुसूचित जनजाति की 19 सीटें रिक्त रह गई। हालांकि मेधा सूची में शामिल अभ्यर्थियों ने निर्धारित कट आफ मा‌र्क्स नहीं लाने के बावजूद उच्च न्यायालय के निर्देश के आलोक में अपने रिस्क पर दाखिला ले लिया। अदालत के निर्देश में यह कहा गया कि अभ्यर्थी बाद में अपने नामांकन को लेकर दावा नहीं कर सकेंगे। 2009-10 में भी निर्धारित 40 प्रतिशत से कम अंक लानेवाले 32 छात्र-छात्राओं को भी नामांकन ले लिया गया था। बाद में एमसीआई ने इनका नामांकन रद करने का निर्देश जारी कर दिया। प्रदेश के तीनों मेडिकल कालेजों की 190 सीटों में से 15 प्रतिशत पर दाखिला सीबीएसई द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है। शेष 85 प्रतिशत सीटों पर झारखंड साझा परीक्षा के माध्यम से होता है(नीरज अम्बष्ठ,दैनिक जागरण,रांची,23.11.2010)।

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