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05 नवंबर 2010

हिमाचलःदूर-दराज के स्कूलों को युक्तिसंगत बनाया जाएगा

बच्चों की पहुंच से दूर और दूर- दराज के क्षेत्रों में चल रहे स्कूलों का भी युक्तिकरण किया जाएगा। इसके लिए शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों की पहचान करने की कवायद शुरू कर दी है। सरकार इनकी जगह नए 50 स्कूल खोलने की तैयारी कर रही है, जो दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित हैं। विभाग ने प्रपोजल भी तैयार कर लिया है जिसके लिए मंत्रिमंडल से मंजूरी लेना शेष है।

विदित रहे कि प्रदेश में वर्तमान में लगभग 10,713 प्राइमरी स्कूल और करीब 4357 एलीमेंटरी स्कूलों का नेटवर्क है, जिनमें दस लाख से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। केंद्र द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार 1.5 किलोमीटर और 3 किलोमीटर की परिधि में छात्रों के लिए स्कूल उपलब्ध कराना जरूरी है । लेकिन, पहले से चल रहे कई स्कूल ऐसे भी हैं जो इस परिधि में चल रहे हैं, लेकिन सुरक्षा की लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं।

इसके पीछे कारण यह है कि विभिन्न नदी-नालों के रास्ते में आने से छात्रों को इन तक पहुंचने में कई बार दिक्कत आती है जो बरसात व बर्फबारी के मौसम में और भी बढ़ जाती है। हाल में ही शिक्षा विभाग द्वारा ज्योग्राफिकल इंडेक्स के आधार पर राज्य के स्कूलों पर करवाए गए सर्वे मंे ऐसे तथ्य सामने आए हैं।

सरकार अगर इन स्कूलों को ऐसे सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की सोच रही है जो उनके लिए पूरा साल भर हर मौसम के लिहाज से सुरक्षित रहें। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के लागू हो जाने से छात्रों को ऐसे स्कूल मुहैया कराना और भी अनिवार्य हो गया है।

बैरियर फ्री स्कूल मुहैया कराने की दृष्टि से सरकार इस साल के शुरू में चंबा, सिरमौर, कुल्लू, मंडी और सोलन में इस तरह के स्कूल नोटिफाई कर चुकी है। जानकारों के अनुसार इन नए स्कूलों को खोलने के लिए प्रदेश सरकार ने मानव संसाधन मंत्रालय को इस तरह का प्रस्ताव भेजा गया है जिसमें केंद्र से अतिरिक्त वित्तीय सहायता मुहैया कराने की मांग की गई है।

शिक्षा मंत्री आईडी धीमान का मानना है कि ऐसी जगहों पर नए स्कूल खोलने की तैयारी की जा रही है जहां छात्र हर मौसम में पूरा साल भर आसानी से पहुंच सके । उनके अनुसार ऐसे स्कूलों को खोलने के लिए केंद्र सरकार से अतिरिक्त राशि मुहैया कराने का प्रपोजल भेजा गया है(दैनिक भास्कर,शिमला,5.11.2010)।

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