पीआरओ यानी पब्लिक रिलेशन ऑफिसर, किसी भी संस्थान की रीढ होता है। संस्थान चाहें सरकारी हो या फिर वह प्राइवेट ही क्यों न हो, सभी जनसम्पर्क अधिकारी की नियुक्ति को स्टेट्स सिम्बल मानते हैं। सरकारी अफसरों तथा मंझोले उद्योगों से लेकर फिल्मी हस्तियां तक, अपने पीआरओ के माध्यम से ही अब मिलना पसंद करते हैं। यदि आपमें लोगों के साथ अच्छी तरह से डील करने की कला है और आप अपनी बात को मधुरता और तर्क के साथ लोगों के समक्ष रखने की काबिलियत रखते हैं, तो पब्लिक रिलेशन का करियर आपके लिए सबसे उपयुक्त साबित होगा। कंपनियों की तरफ से लगातार डिमांड बढने से इस क्षेत्र में करियर की व्यापक संभावनाएं निकल रही हैं।
शैक्षिक योग्यता
यदि आपने पब्लिक रिलेशन से संबंधित फील्ड में जाने का मन बनाया है तो किसी भी स्ट्रीम से 50 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएट होना जरूरी है, लेकिन एडमिशन का बेस सिर्फ यह अंक नहीं होते हैं, कुछ संस्थानों में प्रवेश परीक्षा एवं साक्षात्कार के उपरांत उम्मीदवार की योग्यता को परखकर प्रवेश दिया जाता है। देश में ऐसी कई संस्थाएं हैं, जो पब्लिक रिलेशन में डिप्लोमा, पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा एवं सर्टिफि केट कोर्स कराती हैं। डिप्लोमा एक वर्षीय एवं सर्टिफि केट कोर्स कुछ महीनों के होते हैं। इसके अलावा पत्रकारिता एवं जनसंचार से स्नातक एवं परास्नातक करने वाले कैंडिडेट्स भी इस फील्ड में करियर बना सकते हैं।
क्या है जरूरी
इस फील्ड में सफलता उसी को मिलेगी, जो अच्छे कम्युनिकेशन स्किल्स का धनी है। बेहतर कम्युनिकेशन के माध्यम से आप अपने क्लाइंट के विचारों को व्यक्त करने में उसकी मदद कर सकेंगे। इसके अलावा अच्छा व्यक्तित्व होना, लोगों के साथ मधुर संबंध बनाना, दबाव के क्षणों में भी बेहतर कार्य करना एक्स्ट्रा क्वालिफिकेशन के की फैक्टर हैं। दूर दृष्टि, इवेंट मैनेजमेंट की जानकारी तथा आत्मविश्वास इस प्रोफेशन में निखार लाने का काम करता है।
कैसे होगी एंट्री
विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से पब्लिक रिलेशन में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स करने के लिए निर्धारित मानक अलग-अलग हैं। कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं और उसमें सफल होने वाले कैंडिडेट्स को मेरिट के आधार पर संस्थान में प्रवेश देते हैं। वहीं कुछ केन्द्रों में स्नातक स्तर पर मिले अंकों के आधार पर ही स्टूडेंट्स को एडमिशन दे दिया जाता है।
क्या है पाठ्यक्रम
संस्थानों के पाठ्यक्रम अलग-अलग हैं, लेकिन पब्लिक रिलेशन का कोर्स कर रहे स्टूडेंट्स को जनसम्पर्क की नीतियां तथा उसके सिद्घांत, जनसम्पर्क सिद्घान्त एवं तकनीक, जनसम्पर्क प्रबंधन एवं प्रशासन, समाचार लेखन की विधा, समाचार जारी करना, विजुअल कम्युनिकेशन आदि का गहन अध्ययन करना पडता है।
किस तरह की सम्भावनाएं
इस फील्ड के जानकार सरकारी एजेंसियों, कॉरपोरेट एवं पब्लिक सेक्टर, टूरिस्ट एजेंसीज, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, बैंक, होटल तथा प्राइवेट कंसल्टेंसी फर्म में पीआरओ के पद पर काम करते हैं। इसके अलावा अब राजनेताओं, फिल्म स्टारों, मॉडलों ने भी पीआरओ की नियुक्तियां शुरू कर इनकी डिमांड को बढा दिया है। यह लोग सिनेमा, प्रोफाइल एवं साक्षात्कार आदि का प्रकाशन पीआरओ के द्वारा ही कराना पसंद करते हैं।
पीआरओ का कार्य
एक पीआरओ का कार्य कॉरपोरेट पब्लिसिटी, प्रॉडक्ट पब्लिसिटी के लिए सरकार के साथ संबंध बनाना, समाचार, न्यूज लेटर्स लिखने के साथ संस्थान का प्रचार-प्रसार करना और लोगों के साथ मधुर संबंध रखना होता है। पीआरओ का दूसरा अहम कार्य होता है, अपने क्लाइंट को समाज में एक अलग पहचान देना। इनके क्लाइंट में फिल्म स्टार्स, राजनीतिक दल, मॉडल, नेता, खिलाडी हो सकते हैं। इन हस्तियों को पीआर पर्सन समय और परिस्थिति के आधार पर सलाह और सुझाव भी देते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि पीआर का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत है।
सैलरी
पीआर विशेषज्ञों को उनकी योग्यता एवं अनुभव के आधार पर सैलरी दी जाती है। वैसे शुरुआती दौर में गैर सरकारी संस्थाओं में इन्हें सात हजार से लेकर 18 हजार रुपये मासिक तक की सैलरी मिल जाती है। अनुभव के आधार पर इसमें हमेशा वृद्घि होती रहती है। सरकारी विभागों में जनसम्पर्क अधिकारी का स्केल सरकारी नियमानुसार निर्धारित है।
कहां से करें कोर्स
जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऐंड मास कम्युनिकेशन नोएडा, कानपुर
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, नई दिल्ली।
दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली।
भारतीय विद्या भवन, दिल्ली।
लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, पटना।
पंजाब यूनिवर्सिटी, पटियाला।
बीआर अम्बेडकर ओपेन यूनिवर्सिटी, हैदराबाद।
माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ जर्नलिज्म, भोपाल।
(दैनिक जागरण से साभार)
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