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23 नवंबर 2010

इन क्षेत्रों में हो रही है रोज़गार की बारिश

ऐसा लग रहा है की देश में बेरोजगारी के बादल छंटने से लगे हैं. बैंकिंग से लेकर ऑटोमोबाइल, रीटेलिंग, कंस्ट्रकशन,पावर जेनरेशन, बीपीओ, आईटी, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन आदि में रोजाना सैकड़ों की संख्या में नौकरियों के विज्ञापन देखने को मिल रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं की देश की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार हुआ है और विशेषज्ञयों की राय में ये आर्थिक प्रगति का दौर अभी लंबे समय तक जारी रहने की उम्मीद है। वाकई यह आंकलन काफी राहत और सांत्वना देने वाला कहा जा सकता है। जिस मंदी और बेरोजगारी की मार से अमेरिका जैसा देश अभी तक उबर नहीं पाया हो उसी समय भारत जैसा विकासशील राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में कृषि से लेकर औद्योगिक क्षेत्र तक में तेजी के संकेत दिखाई पड़ना वाकई चौंकाने से कम नहीं कहा जा सकता है। इस लेख में विश्लेषण करते हैं कि किन क्षेत्रों में रोजगार सृजन और बढ़ोतरी का दौर कायम रहने की आशा है और युवाओं को किस तरह के प्रशिक्षण के बारे में अभी से सोचना चाहिए ताकि समय आने पर उनको जॉब्स मिलने में कोई परेशानी नहीं झेलनी पड़े।

बैंकिंग- 
निश्चित रूप से बैंकिंग इंडस्ट्री में गजब की तेजी इस वक्त देखने में आ रही है। इसके पीछे असल कारण है बैंकिंग सेवाओं का ज्यादातर शहरी क्षेत्रों तक सीमित होना और देश के लाखों गांवों में रहने वाले करोड़ो लोगों का इसका लाभ उठा पाने से वंचित होना। निजी और विदेशी बैंकों को देश में कारोबार की इजाजत मिलने के बाद पब्लिक सेक्टर बैंकों के लिए गहन स्पर्धा की स्थिति बन चुकी है और उनको अपने अस्तित्व को बचाने और प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाने के लिए ग्रामीण इलाकों में जाना पर रहा है। जाहिर है कि प्रसार के किए उनको बड़ी संख्या में ट्रेंड और अनट्रेंड दोनो ही प्रकार के कर्मियों की जरूरत है। यही कारण है कि भारी संख्या में इस तरह की भर्तियों के विज्ञापन आजकल अखबारों में देखने को मिल रहे हैं। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रायः स्थानीय और लोकल भाषाओं के जानकार लोगों को इन जॉब्स में तरजीह दी जाती है। इसके अलावा बैंकिंग या फाइनेंस क्षेत्र के अनुभवी लोगों के लिए भी मौके हो सकते हैं। कमोबेश यही बात निजी और विदेशी बैंकों के बारे में भी कही जा सकती है।

ऑटोमोबाइल
भारत की पहचान अब ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में बन चुकी है। बड़ी-बड़ी विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनियों ने देश में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित कर ली हैं। इसके अलावा देशी ऑटोमोबाइल कंपनियों की भी बिक्री काफी जोरों पर है। इस कारण ना केवल ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स और टेक्निकल लोगों की जरूरत इस क्षेत्र में बढ़ी है बल्कि मार्केटिंग के लोगों की भी मान में तेजी देखने को मिली है। उम्मीद है कि यह स्थिति अभी लंबे अरसे तक बनी रहेगी।

मार्केटिंग
कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के अलावा ड्यूरबल कंज्यूमर प्रोडक्ट्स निर्माताओ को बड़ी संख्या में मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की आज जरूरत पर रही है। रिक्त पदों के विज्ञापनों की अगर बात की जाए तो मार्केटिंग प्रोफेशनल्स की जॉब्स लगभग हर फील्ड में रोजाना तमाम अखबारों में प्रकाशित हो रही है। इसके लिए मार्केटिंग क्षेत्र का डिप्लोमा या एमबीए होना ही जरूरी नहीं है। मार्केटिंग फील्ड के अनुभवी लोगों के लिए लगभग हर इंडस्ट्री में जॉब्स के मौके मिल सकते हैं।

मीडिया - 
फिल्म, टेलीवीजन,विज्ञापन उद्योग, न्यू मीडिया आदि का प्रचार-प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। इसमें क्रिएटिव लोगों के अलावा टेक्निकली ट्रेंड लोगों की भी बड़े पैमाने पर आवश्कता है। कल्पना की जा सकती है कि इन टीवी चैनल को कितनी बड़ी संख्या में अनुभवी और ट्रेंड लोगों की जरूरत होगी।

हेल्थकेयर
हेल्थ टूरिज्म के क्षेत्र में भारतीय डॉक्टरों नें दुनिया में झंडे गाड़े हुए हैं। देश विदेश से मरीज अपने असाध्य रोगों का इलाज करवाने के लिए भारत में आते हैं। देश में तेजी से पनप रहे कॉर्पोरेट हॉस्पिटल्स और हेल्थकेयर क्षेत्र की बदौलत यह संभव सका है। इसके अलावा पश्चिमी देशों के खर्चीले मेडिकल इलाज की तुलना में भारत में इलाज का खर्च कहीं कम है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोग मेडिकल टूरिज्म के बहाने देश में आ रहे हैं। इसका लाभ देश को विदेशी मुद्रा की कमाई के रूप में भी मिल रहा है। डॉक्टर्स और नर्सेस की ही नहीं बड़ी संख्या में परामेडिकल स्टाफ की भी आने वाले समय में जरूरत पड़ेगी इसमें कोई दो राय नहीं है।

डिजाइनिंग
इस तरह के प्रोफेशनल्स की जरूरत प्रायः सभी क्षेत्रों में देखी जा सकती हैं। एयरक्राफ्ट,ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग, फर्निचर, फुटवेयर, फैशन डिजाइनिंग, बुक डिजाइनिंग, ग्राफिक्स डिजाइनिंग के एक्सपर्ट प्रोफेशनल की मांग देश विदेश में काफी ज्यादा है। पेकेजिंग इंडस्ट्री भी ऐसा ही एक उभरता हुआ क्षेत्र है जहां पर इस तरह के एक्सपर्ट्‌स की आवश्यकता है।

टीचिंग
देश में स्कूल और कॉलेज के अलावा यूनिवर्सिटीस भी बड़ी संख्या में सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र में खोले जाने की भावी योजनाएं हैं। इसका कारण अशिक्षित आबादी को अशिक्षा के अंधकार से बाहर निकालना और उन्हें मुख्य धारा में शामिल करना है। ऐसे में बड़ी तादाद में ट्रेंड टीचर्स की जरूरत पड़ना स्वाभाविक है। इंडियन टीचर्स की मांग विदेशों में पहले से ही काफी बढ़ रही है। देश में अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा होने का लाभ इस रूप में भी देखने को मिल रहा है।

कॉमर्स
कमर्शियल गतिविधियों में दिन दूनी और रात चौगुनी बढ़ोतरी का नतीजा है की कॉमर्स शिक्षा की बैकग्राउंड वाले युवाओं के लिए हर तरफ नौकरियों का बाजार गरम होता दिख रहा है। खासतौर पर ऐसे लोग जो कंप्यूटर पारंगत होने के साथ कॉमर्स के सॉफ्टवेयर पर भी काम कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि उनके पास सीए सरीखी डिग्री हो। बीकॉम और ऐसी ही जनरल डिग्री की बदौलत भी अब दफ्तरों में जॉब्स की आशा की जा सकती है(अशोक सिंह,मेट्रो रंग,नई दुनिया,दिल्ली,22.11.2010)

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