बीटीसी के लिए निजी कालेजों में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी शासन की करनी का खामियाजा भुगतेंगे। निजी कालेजों को बीटीसी की संबद्धता देने में शासन की हीलाहवाली और लेटलतीफी के चलते उनका नौकरी पाने की होड़ में पिछड़ना तय है।
प्रदेश के 70 जिला शिक्षा व प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में बीटीसी की 10,400 सीटें हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर ही सही शासन ने सत्र 2010-11 से निजी कालेजों को बीटीसी की संबद्धता देने का निर्णय किया। इस फैसले के तहत शुरुआत में 47 निजी कालेजों को जुलाई माह में बीटीसी की संबद्धता दी गई। इनमें से चार कालेजों की संबद्धता बाद में समाप्त कर दी गई। सभी डायट में अगस्त माह से बीटीसी की पढ़ाई शुरू भी हो गई। लेकिन निजी कालेजों को संबद्धता देने का सिलसिला अब तक जारी है। इसी क्रम में 13 और निजी कालेजों को बीटीसी की संबद्धता दी गई है। प्रत्येक कालेज में बीटीसी की 50 सीटें स्वीकृत हैं। इन कालेजों को संबद्धता दिये जाने से सूबे में बीटीसी की 650 सीटें बढ़ गई हैं। इन कालेजों को मिलाकर सूबे में 73 निजी कालेजों को बीटीसी की संबद्धता दी जा चुकी है। निजी कालेजों को मिलाकर सूबे में 14050 सीटें हो चुकी हैं।
डायट का कोर्स सेमेस्टर आधारित है। दो वर्षीय इस कोर्स में चार सेमेस्टर होंगे। गौरतलब यह है कि जहां बीती जुलाई में डायट में बीटीसी में प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थी जहां पहला सेमेस्टर पूरा कर रहे होंगे, वहीं कई कालेजों को अब भी संबद्धता दी जा रही है। कुछ कालेजों में, जिन्हें कुछ दिन पहले संबद्धता दी गई है, अभी पढ़ाई भी नहीं शुरू हो पायी है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने भी माना कि संबद्धता में लेटलतीफी के चलते निजी कालेजों में प्रवेश लेने वाले पढ़ाई में पिछड़ जाएंगे। वे बीटीसी देर से उत्तीर्ण करेंगे और नौकरी पाने की दौड़ में भी पिछड़ जाएंगे(दैनिक जागरण संवाददाता,लखनऊ,1.12.2010)।
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