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06 दिसंबर 2010

चंडीगढ़ःनिजी स्कूलों को पूरा करना होगा गरीब बच्चों का 15% कोटा

यूटी प्रशासन का एजुकेशन डिपार्टमेंट राइट टू एजूकेशन एक्ट को लागू करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है। सिटी के सभी 67 प्राइवेट स्कूलों को नए शिक्षा सत्र के जुलाई माह से 9वीं क्लास तक आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग से संबंधित व निर्धारित 15 प्रतिशत का कोटा भी राइट टू एजुकेशन एक्ट के तहत पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर इन स्कूलों की मान्यता खतरे में भी पड़ सकती है। स्कूल की मान्यता के लिए आवश्यक है कि कम से कम 15 प्रतिशत स्टूडेंट्स आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग से संबंधित जरूर होने चाहिए, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस कवायद के बाद भी चंडीगढ़ के महंगे स्कूलों में गरीबों के लाल पढ़ सकेंगे। बीते दिनों चंडीगढ़ के प्रसिद्ध प्राइवेट स्कूल स्ट्राबेरी फील्ड व‌र्ल्ड द्वारा सेकेंडरी स्तर की प्रोविजनल मान्यता के आवेदन करने पर एक निरीक्षण कमेटी ने स्कूल का दौरा कर वर्तमान मापदंडों को पूरा नहीं पाया था। स्कूल में सीबीएससी की गाइडलाइन के अनुसार स्टूडेंट्स की संख्या के अनुपात में न तो कंप्यूटर पूरे थे और न ही आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग से संबंधित 15 प्रतिशत छात्र। स्कूल प्रबंधन को तीन माह में सभी मापदंड पूरे करने का समय दिया गया था। वहीं, स्कूलों में अध्यापकों की कमी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने शहर के सरकारी स्कूलों से 200 ठेके पर काम कर रहे टीचर्स को न हटाने का निर्णय लिया है। यह तय है कि सिटी ब्यूटीफुल के अधिकांश महंगे स्कूलों में स्टूडेंट्स के अभिभावकों से मोटी फीस ली जाती है। इन प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधन की ऊंची पहुंच है व राजनीतिक रसूखदारों से मजबूत संबंध भी हैं, लेकिन अब समाज के प्रभावशाली वर्ग के स्कूल प्रबंधन को अपने-अपने स्कूलों में दिल्ली पैटर्न को लागू करना होगा। यूटी का शिक्षा विभाग प्राइवेट स्कूलों के लिए पॉलिसी का एक ऐसा ड्राफ्ट तैयार कर सुप्रीम कोर्ट में दायर कर चुका है। वर्ष 2011 में यह पूरी तरह से यूटी के सभी स्कूलों में लागू हो जाएगा(दैनिक जागरण,चंडीगढ़,6.12.2010)।

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