प्रदेश के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी के चलते रोगियों को मुश्किलों से दो-चार होना पड़ रहा है। वर्तमान में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित स्वास्थ्य संस्थानों में 295 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं, जिनमें जिला शिमला में सबसे अधिक 79, मंडी में 57 और जिला कांगड़ा में 44 डॉक्टरों के पद रिक्त हैं। यही नहीं प्रदेश के 39 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सिविल डिस्पेंसरी (सीडी) बिना डाक्टरों के संचालित किए जा रहे हैं।
प्रदेश के लोगों को घर द्वार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलव्ध करवाने के लिए 15 डॉक्टरों की नियुक्ति नियमित आधार पर, जबकि 453 डाक्टरों की भर्ती विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों की रोगी कल्याण समितियों के माध्यम से अनुबंध आधार पर की गई थी। वर्ष 2008 से 20 नवंबर 2010 तक विभिन्न रोगी कल्याण समितियों के माध्यम से 643 डॉक्टरों का चयन कर नियुक्ति दी गई है। जिनमें से 453 डाक्टरों ने ज्वाइन किया लेकिन इनमें से 110 डाक्टर नौकरी छोड़ चुके हैं। बिना डॉक्टरों के संचालित किए जा रहे स्वास्थ्य संस्थानों में सरकार ने डॉक्टरों की नियुक्ति के संबंध में प्रयास तेज कर दिए हैं।
नियुक्ति के बारे में आवश्यक कदम उठा रही सरकार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजीव बिंदल का कहना है कि बिना डाक्टरों के संचालित किए जा रहे पीएचसी व सीडी में डाक्टरों की नियुक्ति के संबंध में सरकार आवश्यक कदम उठा रही है। हाल ही में सरकार ने हिमाचल प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन से मेडिकल ऑफिसर्स के 150 पदों को नियमित आधार पर भरने के लिए लिखित आग्रह किया है, जिससे प्रदेशवासियों को घर-द्वार पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें(दैनिक भास्कर,धर्मशाला,15.12.2010)।
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