प्रदेश के कई जिलों में शिक्षाकर्मियों को प्रधान पाठक बनाने में हो रहे गोलमाल पर सरकार ने सख्त रुख अख्तियार किया है। चयन में घोटाले, पैसा वसूली समेत कई गंभीर आरोपों के मद्देनजर शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने विभागीय अफसरों को गड़बड़ियों की पड़ताल कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
दैनिक भास्कर से अग्रवाल ने कहा कि भर्ती के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा की प्रक्रिया और उसके परिणामों को लेकर शिकायत आई है। इस पर अफसरों को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। शिकायतें सही मिलीं तो दोषियों पर कार्रवाई होगी।हालांकि अग्रवाल ने कहा कि प्रक्रिया से सब लोग नाखुश नहीं हैं।
प्रधान पाठकों की संख्या के बराबर नियुक्त होंगे शिक्षाकर्मी
अग्रवाल ने प्रधान पाठक बनाने के लिए विभागीय परीक्षा की वकालत की। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक परीक्षा मंडल से प्रक्रिया पूरी कराने में काफी वक्त लगता। प्रधान पाठक के हजारों पद खाली थे और इनको सरकार जल्द भरना चाहती थी।
फिर भी अगर प्रक्रिया में किसी प्रकार की चूक हुई है, तो सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी। अग्रवाल ने बताया कि जिन शिक्षाकर्मियों को प्रधानपाठक बनाया जाएगा उनके बदले नए शिक्षाकर्मियों की भर्ती की जाएगी।
मेरिट लिस्ट में नौकरशाहों और नेताओं के रिश्तेदारों का दबदबा
रायपुर जिले में भी प्रधानपाठक नियुक्ति में बेशुमार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। मेरिट लिस्ट में शिक्षा विभाग के अफसरों के रिश्तेदारों, शिक्षाकर्मी संघ के पदाधिकारियों और उनके नातेदारों का दबदबा है। इन पदों पर भर्ती के लिए राज्य शासन ने आदेश तो एक ही जारी किया, पर हर जिला शिक्षा अधिकारी ने अपनी सुविधा के मुताबिक नियमों को
बदल लिया। बलौदाबाजार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 10 दिसंबर को 518 शिक्षाकर्मियों को प्रधानपाठक बनाए जाने का आदेश जारी किया।
पुरुष प्रधान पाठकों के मेरिट लिस्ट में टॉप 14 शिक्षकों में से 12 या तो शिक्षा अधिकारियों के रिश्तेदार हैं या शिक्षाकर्मी संघ के नेता। इसी तरह महिलाओं की मेधा सूची में टॉप 10 में से छह शिक्षाकर्मी संघ के नेता अथवा अधिकारी के रिश्तेदार हैं।
चार समूहों में बंटी रेवड़ी
तीन हजार परीक्षार्थियों में से चुने गए प्रधान पाठकों की पूरी लिस्ट को देखा जाए तो करीब चार ऐसे ग्रुप साफ दिखते हैं, जो परीक्षा में एक साथ बैठे और मेरिट में भी आए। कुछ मामलों में पति-पत्नी एक साथ परीक्षा में बैठे और मेरिट में आए।
छबिराम वर्मा, नरेंद्र वर्मा, रमेश वर्मा की पत्नियों और एक अन्य महिला ने अगल-बगल बैठकर परीक्षा दी। चारों को प्रथम प्रकाशन में मेरिट में हैं।
160 में 140 का चयन
इस बाबत पड़ताल के लिए जिला शिक्षा अधिकारी जीआर चंद्राकर फोन पर या दफ्तर में भी नहीं मिल रहे। परीक्षा भले ही बलौदाबाजार शिक्षा जिले के लिए हुई, लेकिन इसमें भाटापारा ब्लॉक के शिक्षाकर्मी काफी संख्या में हैं।
इस ब्लॉक से करीब 160 शिक्षाकर्मियों ने परीक्षा दी थी, जिसमें 140 के करीब प्रधानपाठक चुन लिए गए। इस बाबत रायपुर के कमिश्नर मनोहर पांडे को शिकायत की गई है। कमिश्नर ने जिला पंचायत के सीईओ अंकित आनंद को जांच के आदेश दिए हैं।
ज्वानिंग के लिए रिलीव होने की जरूरत नहीं
प्रधानपाठक चुने गए शिक्षाकर्मियों को बलौदाबाजार जनपद पंचायत द्वारा रिलीव नहीं किए जाने से नाराज चयनित प्रधानपाठक संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिला पंचायत के सीईओ अंकित आनंद से मुलाकात की।
भेंट के बाद समिति के अध्यक्ष संतोष शर्मा ने बताया कि सीईओ से चर्चा के बाद भ्रम दूर हो गया है। सीईओ का कहना है कि शिक्षाकर्र्मियों को ज्वाइनिंग के लिए रिलीविंग आदेश की जरूरत नहीं है।
हालांकि इस बीच माखन चंद्राकर, खिलेंद्र चंद्राकर, धारिता चंद्राकर, श्रीमती कविता चंद्राकर, नरेंद्र चंद्राकर ने कलेक्टर को दिए शपथपत्र में कहा है कि उनकी जिला शिक्षा अधिकारी चंद्राकर से कोई रिश्तेदारी नहीं है।
राज्य शासन को नोटिस
हेडमास्टर परीक्षा में नेत्रहीनों को आरक्षण नहीं देने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य शासन, शिक्षा सचिव, बिलासपुर कलेक्टर व डीईओ को नोटिस जारी किया है। कोर्ट की सिंगल बेंच ने यह आदेश भी दिया है कि हेडमास्टर की नियुक्ति पर कोर्ट का आदेश लागू होगा।
ग्राम जयरामनगर के हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षाकर्मी वर्ग-एक के पद पर कार्यरत ईश्वर प्रसाद साहू नेत्रहीन हैं, वह प्रधान पाठक परीक्षा में शामिल हुआ था, जिसमें उसे 42 प्रतिशत अंक मिले।
इसके बाद भी उसका चयन नहीं हुआ। चयन न होने पर उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसने एक अक्टूबर 2005 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी सकरुलर का हवाला देते हुए कहा कि नेत्रहीनों को शासकीय पदों में दो प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है।
प्रधानपाठक के जिले में एक हजार 24 पद खाली हैं, इसके अनुसार कम से कम 20 पद इस वर्ग के आवेदकों के लिए आरक्षित किए जाने थे, लेकिन एक भी पद आरक्षित नहीं किए गए। यही वजह है कि उसका चयन नहीं हो पाया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा है(दैनिक भास्कर,रायपुर,15.12.2010)।
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