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02 दिसंबर 2010

बिहार में चीन की तरह हो शिक्षा का विकासःआनंद कुमार(संस्थापक,सुपर-30)

इस बार विधानसभा चुनाव के दिन जब मैं वोट देने जा रहा था मेरी मुलाकात पड़ोस में रहनेवाली गरीब महिला आशा देवी से हुई । आशा देवी ने बड़े उत्साह से बगैर पूछे बताया कि उसने नीतीश कुमार के पक्ष में मतदान कि या है । मेरी उत्सुकता बढ़ी और मैंने पूछा आखिर क्यों ? तब उस महिला ने कहा कि ऐसा इसीलए कि मेरी छोटी बिटिया सुरभि ने कहा था कि मम्मी नीतीश कुमार को ही वोट देना क्योंकि अगर उनकी सरकार फिर से बनेगी तो वो मुझे साइकि ल देंगे और मैं स्कू ल पढ़ ने दीदी की तरह ही साइकि ल से जाऊंगी। समाज के सबसे निचले पायदान के लोगों में शिक्षा के प्रति जगी भूख भी इस बार के चुनाव में महत्वपूर्ण फै क्टर बना है । सच में यह कोई सुखद आश्चर्य से क म नहीं है । नीतीश सरकार ने पिछले सालों में शिक्षा के क्षेत्र कई अच्छे काम कि ए हैं । लेकि न जिस तरह से प्रचंड बहु मत के बाद आम जनता में उम्मीद जगी है, उसके मद्देनजर अभी सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है । अभी सुनने में आ रहा है कि सरकार तीन हजार शिक्षकों की बहाली करने जा रही है । मेरे विचार से शिक्षकों की बहाली में काफी सावधानी बरतने की जरूरत है। शिक्षकों की बहाली के लिए तीन स्तरों क्र मश: स्क्रीनिंग, मेंस और इंट रव्यू पर परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। इसके लिए अग देश के तमाम राज्यों से आवेदन आयें तो यह और अच्छी बात होगी। नव निर्वाचित शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन होना चाहिए जो न सिर्फ शिक्षकों को एक बार ट्रेंड करे बल्कि समय समय पर अपडे ट भी क रता रहे । विश्वविद्यालयों के विद्वान शिक्षकों को इस टास्क फोर्स में शामिल किया जा सकता है । जिन शिक्षकों का प्रदर्शन अच्छा हो उन्हें सरकार द्वारा सम्मानित किया जाए। लापरवाही बरतने वालों पर कारवाई हो। अब अगर माध्यमिक शिक्षा की बात की जाए तो बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने सीबीएसई पैटर्न लागू क रने से लेकर मॉडल पेपर बनाने जैसे मामलो में काफी सुधार किए हैं। लेकिन स्कूल स्तर पर सुधार की अभी सख्त जरूरत है। चीन के विकास की दर अधिक तम होने की एक बहुत ही महत्वपूर्ण वजह है यहां शिक्षा का आश्चर्यजनक रू प से विकास होना। चीन ने अपने माध्यमिक शिक्षा को इतना अच्छा किया है कि आज इस मामले में वह अमेरिका, इंग्लैंड , फ्रांस और रू स जैसे देशों से बहु त ही आगे है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले विभिन्न ओलंपियाड में पिछले कई वर्षों से वहां के बच्चे शीर्ष स्थान प्राप्त कर रहे हैं । अगर बिहार सही मायने में भारत को शिक्षा के क्षेत्र में नई राह दिखाना चाहता है तो उसे चीन के एजुकेशन पॉलिसी को समझकर उससे मिलते जुलते सिस्टम को यहां भी अपनाना होगा। चीन में प्राथमिक शिक्षा के बाद बच्चों में उनकी रुचि का पता किया जाता है और फिर बच्चों में उनकी रुचि का पता किया जाता है और फिर उसी अनुसार उनके लिए माध्यमिक शिक्षा की व्यवस्था की जाती है। अब वहां हर जिले के स्तर पर एक ऐसा विशेष स्कूल बनाया गया है जहां किसी खास विषय में प्रतिभाशाली बच्चों को प्रशिक्षित किया जाता है। सरकार की तरफ से बिहार में भी सिमुलतल्ला के आवासीय विद्यालय के रूप में ऐसा ही प्रयास हुआ है  लेकिन इस स्कूल को और भी सुविधा संपन्न बनाने के साथ ऐस और क ई स्कू लों की शुरू आत क रने की जरूरत है । कुछ साल पहले वाल स्ट्रीट जर्नल में छपी एक रिपोर्ट की बात अगर सच माने तो इंजीनियरिंग तथा मेडिकल की प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष लगभग 30 हजार बिहारी छात्र कोटा और दिल्ली जैसी जगहों पर चले जाते हैं। लेकिन यह आंकड़ा पुराना है और यह भी सच है कि बिहारी छात्रों का पलायन धीरे धीरे घट रहा है । विधि व्यवस्था में सुधार होने से इंजीनियरिं ग, मेडिकल और कई प्रतियोगी परीक्षाओं के बड़े कोचिंग सेंटर के फ्रैंचाइजी खुलने के अलावा बिहारी कोचिंग संचालकों ने भी अपना पैर जमाया है लेकिन एक बात तय है कि इस तरह के कोचिंग सेंटर का लाभ सिर्फ वही छात्र उठा रहे हैं जिनके पास पैसे हैं । सरकार को भी अपने स्कू ल के सबसे अच्छे शिक्षकों को स्पेशल पैकेज देना चाहिए ताकि वे छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार क र सकें। दूसरा तरीका यह भी हो सकता है कि सरकार कांट्रे क्ट बेसिस से कु छ खास लोगों को सिर्फ इसी काम के लिए बहाल करे । बिहार में अभी मेडिक ल तथा इंजीनियरिं ग कॉलेज की क मी काफी खलती है और मजबूर न बिहारी छात्रों को बाहर के राज्यों की तरफ रुख करना पड़ता है । बिहार के सरकारी कॉलेजों में सुधार के अलावा प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के आधार पर कई कॉलेज खोले जा सकते हैं । हालांकि सरकार ने भी पिछले पांच वर्षों में प्रयास किया है और इसी प्रयास के तहत चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट,चाणक्या नेशनल लॉ स्कूल, निफ्ट तथा सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ बिहार की स्थापना हुई है। बिहार यह चाहता है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह इतना विक सित राज्य बने जिसका अनुकरण ना सिर्फ भारत के अन्य राज्य करें बल्कि विदेशों में भी हो। तब इसके लिए सरकार को अमेरिका के सफल प्रयोग पर ध्यान देना होगा। 1959 में अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्टेट में 70 हजार एक ड़ में एक ट्रायंगुलर पार्क की स्थापना की गई। अब उस जगह पर इंस्टीट्यूशन खोलने के लिहाज से लगभग दुनिया की तमाम बड़ी संस्थाओं को बुलाया गया है । आज की तारीख में माइक्रोसॉफ्ट और इंटेल सहित सभी बड़ी कं पनियों के यहां रिसर्च सेंटर हैं । अगर बिहार में भी ऐसी सार्थक पहल होती है तो सफलता जरूर मिलेगी और अगर आप विश्वास माने तो अमेरिका सहित अन्य देशों के वैज्ञानिक और निवेशक अपना योगदान देने के लिए तत्पर रहें गे। लेकिन आम जनता को जिसका सबसे ज्यादा बेसब्री से इंतजार है , वो है नीतीश कु मार के उन वादों का जिसे उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान जनता से कि या था। उन्होंने क हा था कि जब वे सरकार में वापस आएंगे तो भ्रष्टाचारियों की संपति को जब्त करेंगे और उनके मकान में स्कूल खोलेंगे। अगर ऐसा सच में होता है तो यह बड़ी क्रांति होगी और बिहार दुनिया के नक्शे पर चमकता नजर आएगा(हिंदुस्तान,पटना,28.11.2010)।

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