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02 दिसंबर 2010

राजस्थानःशिक्षा और रोज़गार समाचार

आरपीएमटी में अब एक ही पेपर की तैयारी
राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सहित अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाला राजस्थान प्री मेडिकल टैस्ट (आरपीएमटी ) एक ही पेपर से हो सकता है। इसकी अवधि साढ़े तीन घंटे होगी। राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की सहूलियत के लिए इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल यह परीक्षा एक ही दिन में दो चरणों में आयोजित की जा रही है।

विश्वविद्यालय प्रशासन इन दिनों नए सत्र में एमबीबीएस, डेंटल, वैटरिनरी सहित अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेशों के लिए आरपीएमटी में नए विकल्प तलाश रहा है। विशेषज्ञों ने परीक्षा को दो प्रश्न पत्रों के स्थान पर एक ही पेपर से कराने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि ऐसा होने से छात्रों पर अलग—अलग प्रश्न पत्रों का मनोवैज्ञानिक दबाव कम होगा और वे बेहतर रिजल्ट दे पाएंगे। यह विश्वविद्यालय के लिए भी ज्यादा आसान रहेगा। दो चरणों में अलग-अलग प्रश्न पत्रों से परीक्षा कराने और उनके लिए व्यवस्था का आर्थिक भार भी काफी हद तक कम हो जाएगा।

20 हजार छात्रों ने दी थी आरपीएमटी : इस बार 20 हजार छात्र आरपीएमटी में शामिल हुए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन फोटोग्राफी, बायोमैट्रिक्स सिस्टम को इस बार भी जारी रखेगा। प्रशासन का कहना है कि गड़बड़ी की आशंका वाले सेंटरों को बदला जाएगा।

एक ही पेपर के नए विकल्प को आजमाने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की मुहर लगने के साथ ही इसे नए सत्र की आरपीएमटी में शामिल कर लिया जाएगा। यह व्यवस्था देश के कुछ राज्यों में सफलतापूर्वक चल रही है-अरुण गर्ग, रजिस्ट्रार, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विवि(दैनिक भास्कर,जयपुर,2.12.2010).

सुखाड़िया विविःचहेतों के लिए मनमाना रोस्टर
सुखाडिया विश्वविद्यालय में शैक्षिक पदों पर भर्तियों में राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन चहेतों को रेवडियां बांटने की जुगत में मनमाने तरीके से रोस्टर प्रणाली तक में फेरबदल कर दिया। इससे पात्र अभ्यर्थियों के हक से खिलवाड हुआ है।

एक पद पर तो सुविवि के एक अधिष्ठाता के बेटे को लाने की भी कोशिश हो रही है। राज्य सरकार ने रोस्टर प्रणाली के आधार पर भर्ती के लिए विवि से रिक्त पदों की संख्या मांगी।

विवि की ओर से भेजी गए रोस्टर प्रणाली के अनुसार राज्य सरकार ने भर्तियों की स्वीकृति भी जारी कर दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ पदों पर अपना हित पूरा नहीं होते देख एक पत्र और भेज दिया। इसमें विवि की ओर से पहले भेजी गई रोस्टर प्रणाली में रह गर्ई गलतियां का ब्योरा देकर इन्हें सुधारने की बात कही गई।

क्या हुई गडबडियां
1. प्राणीशास्त्र विभाग में 1 एससी, 1 एसटी और 1 ओबीसी का पद रिक्त विज्ञापित किया गया। इसमें अधिष्ठाता पुत्र को नियुक्ति दिलाने के लिए ओबीसी का 1 पद सामान्य करने के लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया गया। सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया तो एक और पत्र भेज दिया गया। 2. रसायन विज्ञान में एसो. प्रोफेसर के लिए 1 एससी, 1 एसटी और 3 सामान्य के पद राज्य सरकार ने स्वीकृत किए थे। इस पर विवि ने संशोधित रोस्टर भेजते हुए यह बताया कि इस मामले में लिपिकीय भूल हुई है और गलती से 1 के स्थान पर 2 लिख दिया गया। राज्य सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया। इससे एससी और एसटी के पद समाप्त हो गए और ओबीसी का तो नया पद जुड गया और सामान्य का एक पद और बढकर 3 से 4 हो गए।
3. हिन्दी में अस्सिटेंट प्रोफेसर में दोनों ही पद सामान्य के थे। संशोधित रोस्टर में बताया कि अब तक 6 पद भरे जा चुके हैं और रोस्टर के अनुसार 7 वां एससी और आठवां सामान्य से होना चाहिए। राज्य सरकार ने स्वीकार नहीं किया और एससी का पद कट गया।
4. वनस्पति शास्त्र विभाग में अस्सिटेंट प्रोफेसर के लिए 1 एससी, 1 एसटी, 1 ओबीसी और 1 सामान्य पद की स्वीकृति आई। बताया गया कि पूर्व में 5 पद सामान्य से भरे जा चुके हैं और रोस्टर से अब 1 एससी, 1 एसटी और 2 सामान्य के पद भरे जाने चाहिए। सरकार ने इसे नहीं माना और अपनी तरफ से दिए आदेश में कहा कि 1 एससी, 1 ओबीसी और 2 सामान्य के पद भर दिए जाए। इसमें भी एसटी का एक पद गायब हो गया। विश्वविद्यालय ने बाद में विज्ञापन भी निकाल दिया।

इनका कहना है
हमने राज्य सरकार से रोस्टर से स्वीकृत सीटें बदलने के लिए प्रार्थना की थी। अब उन्होंने कुछ मान ली हैं और कुछ नहीं मानी हैं तो इसमें हम क्या कर सकते हैं। कहीं पर विवि की बाबूओं ने गलती की है।
एम एल शर्मा, रजिस्ट्रार, सुविवि
(विकास चौधरी,राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,2.12.2010)




राजस्थान लोक सेवा आयोगःसाक्षात्कार व परीक्षा एक ही दिन होने से अभ्यर्थी परेशान
राजस्थान लोक सेवा आयोग अजमेर के परीक्षा समय सारिणी के कारण सैकडों अभ्यर्थियों को अपने विषय की परीक्षा में बैठने से वंचित होना पड़ेगा । राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित साक्षात्कार की समय सारिणी के अनुसार २१ दिसंबर और २२ दिसंबर को हिन्दी व्याख्याता का साक्षात्कार रखा गया है और इन्ही तारीखों में क्रमश: संस्कृत द्वितीय श्रेणी अध्यापक व हिन्दी द्वितीय श्रेणी अध्यापक की परीक्षा है। हिन्दी व्याख्याता के साक्षात्कार के अभ्यर्थी वर्षों बाद होने वाली इस भर्ती परीक्षा में बैठने से वंचित रह जाएंगे। अभ्यर्थियों द्वारा दोनों के समय में बदलाव करने की मांग पत्र द्वारा की है(दैनिक भास्कर,मोमासर-बीकानेर,2.12.2010)।


आईसीए मुख्यालय उदयपुर में ही रखने की पैरवी
आईआईएम सहित श्रेष्ठ प्रबंध एवं वाणिज्य अध्ययन के लिए शहर राष्ट्रीय हब बन रहा है ऐसे में इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन (आईसीए) का मुख्यालय उदयपुर में खुलने से वाणिज्य शिक्षा को राष्ट्रीय आयाम मिलेगा।

इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन के आजीवन सदस्यों की बुधवार को हुई बैठक में आईसीए का मुख्यालय उदयपुर में ही खोले जाने की पैरवी की गई। बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने माना कि मुख्यालय उदयपुर में खुलने से सुविवि में वाणिज्य विषय में अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। 

आईसीए सदस्य डॉ. अशोक नागर ने बताया कि प्रतिष्ठित जर्नल इंडियन जर्नल ऑफ कॉमर्स का प्रकाशन उदयपुर में होने से शोधार्थियों को रिसर्च पेपर के प्रकाशन की सुविधा मिलेगी। 

इसके अलावा आईसीए द्वारा आयोजित की जाने वाली ऑल इंडिया कॉमर्स कॉन्फ्रेस में देश के ख्यातनाम वाणिज्य विशेषज्ञ की सहभागिता का लाभ सुविवि के छात्रों, संकाय सदस्यों व समाज को प्राप्त होगा। 

आईसीए के उदयपुर संभाग के सदस्य प्रो. एस.एल. मेनारिया, डॉ. रेणु जताणा, डॉ. दिप्ती भार्गव, डॉ. सीपी अग्रवाल, डॉ. पल्लवी मेहता, डॉ. जे.पी. मिश्रा आदि ने पूरजोर मांग करते हुए बताया कि आईसीए मुखयालय उदयपुर में सुविवि में स्थापित किया जाना उचित ही नही वरन समय की भी मांग है। 


सभी सदस्यों ने सुविवि कुलपति से पूर्व के निर्णय को जारी रखते हुए आईसीए को जमीन लीज पर उपलब्ध कराने की अपील की है। 

सुविवि प्रबंध अध्ययन संकाय के प्रो. कैलाश सोडानी ने कहा कि सुविवि में आईसीए का मुखयालय होना प्रतिष्ठा का द्योतक है। जानकारी के अभाव में विद्यार्थियों द्वारा विरोध किया जाना सही नहीं है। आईसीए की ओर से तत्काल 20 लाख रुपए भवन निर्माण पर खर्च किए जा रहे है जिसका व्यावहारिक उपयोग हमारे विद्यार्थी ही करेंगे(दैनिक भास्कर,उदयपुर,2.12.2010)।

अब 'ट्रेनी' नहीं रहेंगे वकील
इसी साल एलएलबी की डिग्री पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह खबर राहत भरी है। इन अभ्यर्थियों को अब वकालत शुरू करने के लिए अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) उत्तीर्ण करने तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। बार काउंसिल ऑफ इण्डिया ने हाल ही नई व्यस्था लागू करते हुए इन्हें अदालत में बतौर वकील हाजिरी देने की इजाजत दे दी है।

इसके तहत ऎसे अभ्यर्थियों को अब राज्य बार काउंसिल में अण्डरटेकिंग देनी पड़ेगी। जिसमें साफ तौर पर यह शर्त है कि मार्च महीने में आयोजित होने वाली वकालत पूर्व परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने पर ऎसे वकील अदालतों में जाने का अघिकार खो देंगे। परीक्षा में विफल रहने वाले अभ्यर्थियों को पुन: इसमें शामिल होना पड़ेगा और इसमें उत्तीर्ण होने के बाद ही वे वापस वकालत शुरू कर सकेंगे।

उल्लेखनीय है कि बीसीआई की ओर से पूर्व में जारी दिशा-निर्देश के अनुसार 2010 में एलएलबी करने वाले अभ्यर्थियों को एआईबीई परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ही वकालतनामे पेश करने या बतौर वकील पैरवी करने का अघिकार मिल सकता था। इससे पहले उन्हें ट्रेनी वकील के तौर पर किसी अनुभवी अघिवक्ता के साथ दफ्तरी कामकाज में सहयोग करने भर की इजाजत थी।

विरोध के चलते फैसला
जानकार बताते हैं कि बीसीआई ने यह फैसला विभिन्न राज्यों की बार काउंसिल के विरोध और दबाव के चलते किया है। दरअसल, एआईबीई लागू होने के बाद से ही राज्य बार काउंसिल इसको लेकर विरोध जता रहे हैं। इसके अलावा बार काउंसिल में पंजीकरण करवा चुके अभ्यर्थियों को वकालत करने से रोकने के लिए मोनीटरिंग की कोई पुख्ता व्यवस्था भी नहीं है(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,2.12.2010)।


वरिष्ठ अध्यापक राज्य सेवा का पद!
वरिष्ठ अध्यापक राज्य सेवा का पद है और इन्हें प्रदेश में कहीं भी पदस्थापित किया जा सकता है। उपनिदेशक वरिष्ठ अध्यापक की नियुक्ति एवं स्थानान्तरण में सक्षम अधिकारी है। ऎसे में सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया आदेश सही है।

माध्यमिक शिक्षा के उपनिदेशक (चूरू) ने तबादलों के सकारण आदेशों में यह दलील दी है। हकीकत में वरिष्ठ अध्यापक राज्य सेवा का नहीं बल्कि अधीनस्थ शिक्षा सेवा का पद है।

पिछले दिनों शिक्षा विभाग में हुए तबादलों के बाद कई शिक्षकों ने अदालत की शरण ली थी। अदालत ने स्थानान्तरण आदेशों पर स्थगन देते हुए सकारण आदेश जारी करने के निर्देश दिए। उपनिदेशक (चूरू) ने अपील करने वाले सोलह शिक्षकों के तबादला आदेशों में इस दलील के साथ कारण स्पष्ट किया है। इन सभी शिक्षकों को पूर्व में किए गए तबादला आदेशों के अनुसार नए पदस्थापन स्थानों पर कार्यग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि वरिष्ठ अध्यापकों सहित तृतीय श्रेणी अध्यापक, पुस्तकालयाध्यक्ष, लैब सहायक और द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी शारीरिक शिक्षकों के पद अधीनस्थ शिक्षा सेवा में आते हैं। इनके तबादले जिला स्तर पर किए जा सकते हैं और खुद कार्मिक के आग्रह पर रेंज में तबादला किया जा सकता है। जबकि व्याख्याता, प्रधानाचार्य व अन्य उच्च अधिकारी राज्य सेवा के पद हैं। इन्हें राज्य के किसी भी जिले में भेजा जा सकता है(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,1.12.2010)।

इंदिरा गांधी नहर बोर्ड के एक हजार पदों पर संकट
इंदिरा गांधी नहर बोर्ड के करीब एक हजार पदों को समाप्त करने की तैयारी हो गई है। बोर्ड ने इस आशय के प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिए हैं, इस पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत निर्णय करेंगे।बोर्ड सूत्रों के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के बीकानेर स्थित कार्यालयों में कार्योü की समीक्षा के बाद बडे स्तर पर पदों को अनुपयोगी माना गया था। इस आधार पर बीकानेर में स्थित नहर के वित्त सलाहकार और पूर्व अंकेक्षण (प्री ऑडिट) कार्यालयों की उपयोगिता पर भी सवाल उठाया गया है। इन कार्यालयों में फिलहाल विशेष काम नहीं होने के कारण पदों को अधिशेष माना जा रहा है। इन दोनों कार्यालयों को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। इसके अलावा जयपुर स्थित नहर बोर्ड मुख्यालय का भी एक कार्यालय बंद हो सकता है।

कार्मिक भी होंगे प्रभावित
नहर विभाग रिक्त पदों के साथ कार्यरत पदों को भी समाप्त करने की अनुशंसा कर चुका है। ऎसे में बीकानेर और जयपुर दोनों ही जगह कार्यरत कर्मचारियों को इधर-उधर होना पड सकता है। समाप्त हो रहे पदों की सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किस कर्मचारी को दूसरी जगह जाना पडेगा। हालांकि वित्त सलाहकार और पूर्व अंकेक्षण के सभी पदों पर संकट खडा हो गया है।

मुख्यमंत्री करेंगे निर्णय
इन पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को अन्यत्र विभागों में भेजा जाए या फिर नहर मण्डल व जल संसाधन विभाग में ही पदस्थापित किया जाए। इस बारे में मुख्यमंत्री निर्णय करेंगे। नहर व जल संसाधन विभाग के प्रमुख शासन सचिव स्तर से यह मामला मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया जा रहा है।

'जिन पदों का उपयोग नहीं है, उन्हें समाप्त किया जा रहा है। वित्त सलाहकार, प्री ऑडिट और बोर्ड कार्यालयों पर इसका असर पड सकता है।'भरत सिंघल, सचिव, इंदिरा गांधी नहर बोर्ड, जयपुर(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,2.12.2010)

परीक्षा सिर पर, विद्यार्थी असमंजस में 
कक्षा नौ और ग्यारह में इस सत्र में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम तो लागू कर दिया गया, लेकिन इन कक्षाओं की अद्धवार्षिक परीक्षा से एक महीने पहले तक शिक्षा विभाग अंक विभाजन जारी नहीं कर पाया है। मॉडल प्रश्नपत्र भी नहीं आए हैं। ऎसे में परीक्षक बिना मॉडल के प्रश्नपत्र तैयार कर रहे हैं। परीक्षार्थी असमंजस में है कि तैयारी किस मॉडल के अनुरूप करनी है। इन दोनों कक्षाओं में इसी सत्र से एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू हुआ है।

इनकी वार्षिक परीक्षा के लिए माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अंक विभाजन तो जारी कर दिया, लेकिन समान परीक्षा योजना के तहत होने वाली अद्धवार्षिक परीक्षा में इसका कितना भाग आएगा और अंक किस पद्धति से दिए जाएंगे, यह अब तक स्पष्ट नहीं किया है। इसी तरह कक्षा ग्यारह में वाणिज्य और कला संकाय के लिए जारी की गई अर्थशास्त्र की पुस्तक में पाठ्यक्रम एक ही रखा गया है, जबकि पूर्व में दोनों संकायों में अर्थशास्त्र का पाठ्यक्रम अलग-अलग था।

नए पाठ्यक्रम का वितरण भी स्पष्ट नहीं किया गया है। कमोबेश यही स्थिति विज्ञान, वाणिज्य और कला संकाय में भी है। अगर अर्द्धवार्षिक परीक्षा में कुल पाठ्यक्रम का सत्तर प्रतिशत भाग आएगा। तो किस पुस्तक के कितने अध्याय अर्द्धवार्षिक परीक्षा में शामिल होंगे, यह भी परीक्षा से एक महीने पहले तक तय नहीं है। गौरतलब है कि समान परीक्षा योजना के तहत कक्षा नौ और ग्यारह की भी अर्द्धवार्षिक परीक्षा 3 से 18 जनवरी के बीच प्रस्तावित है।

तैयार होने लगे प्रश्नपत्र
समान परीक्षा योजना के तहत कई जिलों में कक्षा नौ व ग्यारह के प्रश्नपत्र भी तैयार होने लगे हैं। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड या शिक्षा विभाग ने नए पाठ्यक्रम या इनके प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए कोई आमुखीकरण कार्यशाला भी नहीं की है। इसके चलते परीक्षक भी बिना मॉडल के नए पाठ्यक्रम में शामिल अध्यायों के पुराने पैटर्न पर ही प्रश्न बना रहे हैं(राजस्थान पत्रिका,बीकानेर,1.12.2010)।

पश्चिम-मध्य रेलवे में ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा रद्द
पश्चिम मध्य रेलवे की ओर से वर्ष 2008 में ली गई ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा को रेलवे बोर्ड के निर्देश पर रद्द कर दिया गया है। बोर्ड की ओर से सूचना जारी होने के बाद इस परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले सभी पात्र उम्मीदवारों की शारीरिक दक्षता और लिखित परीक्षा ली जाएगी। उम्मीदवारों को बुलावा पत्र भेजकर परीक्षा की तिथि की सूचना दी जाएगी। उम्मीदवारों को दुबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

भर्ती के लिए पूर्व में हुई परीक्षा में घपला होने के कारण परीक्षा रद्द की गई है। लम्बे समय से विजिलेंस इस मामले की जांच कर रही थी। इसमें कई स्तरों पर अनियमिताएं सामने आई थी। सीपीआरओ पीयूष माथुर ने बताया कि इससे संबंधित जानकारी के लिए रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ के दूरभाष नम्बर 0761-2480355 पर संपर्क किया जा सकता है(राजस्थान पत्रिका,कोटा,2.12.2010)।

राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय के छात्रों की घर बैठे दूर होगी परेशानी
'मेरा परिणाम कब आएगा, हमारी परीक्षाएं कब होंगी, मिड-टर्म के नम्बर पहुंचे या नहीं, परिणाम रूका तो कॉलेज की गलती है या विश्वविद्यालय ने रोका है?' इस तरह के कई सवालों के जवाब के लिए विद्यार्थियों को अब कोटा आने की जरूरत नहीं होगी। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान अब ऑनलाइन करेगा।

संभवत: अगले सेमेस्टर की परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर हेल्पलाइन का कॉर्नर मिल सकेगा, जिसमें विद्यार्थी अपनी परेशानी लिख सकेंगे। विद्यार्थियों को उनके सवाल का जवाब विश्वविद्यालय की ओर से तुरन्त देने का प्रयास किया जाएगा।

हेल्प सेंटर भी
विश्वविद्यालय से राज्यभर के विद्यार्थियों का संपर्क होने के कारण छोटी-छोटी बातों के लिए विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय नहीं आना पड़े। विद्यार्थियों की समस्याएं संभाग स्तर पर ही हल हो सकें, इसके लिए भी मंथन चल रहा है। विश्वविद्यालय की ओर से हेल्प सेंटर की तर्ज पर संभागीय मुख्यालयों पर कार्यालय शुरू किए जा सकते हैं। इसकी शुरूआत जयपुर से होगी। जयपुर कार्यालय के लिए विश्वविद्यालय ने प्रयास भी शुरू कर दिए हैं।
समस्याएं शीघ्र हल होंगी

विद्यार्थियों को राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों से कोटा आना पड़ता है। केवल विद्यार्थी ही नहीं, अभिभावकों को भी परेशानी होती है। ऎसे में कोशिश की जा रही है कि विद्यार्थियों की समस्याएं जल्दी और स्थानीय स्तर पर ही हल हो सके। पहले तो ऑनलाइन हेल्पलाइन शुरू करने की कोशिश है, जो संभवत: अगले सेमेस्टर से शुरू हो जाएगी।
-प्रो. आर.पी. यादव, कुलपति, राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय(राजस्थान पत्रिका,कोटा,1.12.2010)

अजमेर रेलवेःनए साल में मिलेंगे नियुक्ति पत्र 
रेलवे की ओर से तीन हजार बेरोजगारों को नए साल में नियुक्ति-पत्र का तोहफा मिलेगा। नॉन टेक्निकल पॉपुलर कैटेगिरी की दूसरे चरण की लिखित परीक्षाएं फरवरी तक संपन्न हो जाएंगी। मार्च-अप्रेल तक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंप दिए जाएंगे।

अजमेर रेलवे भर्ती बोर्ड एनटीपीसी के तहत देश भर में नोडल एजेंसी नियुक्त है। पूरे देश में इन पदों पर भर्ती अधिसूचना जारी करने, लिखित परीक्षाएं आयोजित करने एवं अभ्यर्थियों के चयन की जिम्मेदारी अजमेर भर्ती बोर्ड की है।

बोर्ड ने इस कोटि के तहत आने वाले लगभग तीन हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पिछले साल प्रारंभ की। इसके तहत प्रथम चरण की अंतिम लिखित पांच दिसम्बर को आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात दूसरे चरण की परीक्षाएं जनवरी से फरवरी तक ली जाएंगी।उत्तर पश्चिम रेलवे में 142 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। जबकि लगभग दो हजार आठ सौ पचास पद देश के अन्य हिस्सों में भरे जाएगे।

यह है एनटीपीसी पद- स्नातक श्रेणी
गार्ड, ईसीआरसी, ट्रेफिक अप्रेंटिस, कामर्शियल अप्रेंटिस, जूनियर अकाऊंट्स क्लर्क, सीनियर क्लर्क
गैर स्नातक श्रेणी- टीसी, टीटी, कामर्शियल क्लर्क, जूनियर क्लर्क
इनका कहना है
एनटीपीसी पदों के लिए लिखित परीक्षाएं अंतिम दौर में है। संभवत मार्च तक चयन प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इसके बाद नियक्ति पत्र दिए जाएंगे।
वी.डी.एस.कासवान, अध्यक्ष, रेलवे भर्ती बोर्ड अजमेर(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,2.12.2010)

आज तय होगी नई परीक्षा तिथि
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से अगले साल होने वाली सैकंडरी व सीनियर सैकंडरी परीक्षा की नई तिथियां गुरूवार को होने वाली परीक्षा समिति की बैठक में तय की जाएंगी। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सुभाष गर्ग ने बताया कि बैठक के एजेंडे में यह विषय भी शामिल है।

गौरतलब है कि जनगणना विभाग ने बोर्ड को पत्र लिखकर 15 जनवरी से 15 मार्च के बीच परीक्षा नहीं कराने का आग्रह किया है। इस कारण बोर्ड को 10 व 17 मार्च से होने वाली परीक्षा की तिथि बदलनी पड़ रही है(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,2.12.2010)।

राजस्थान लोक सेवा आयोगःशेष विषयों की परीक्षा मार्च-अप्रैल में
राजस्थान लोक सेवा आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के शेष पांच विषयों की परीक्षा मार्च या अप्रेल 2011 में ही होगी। इससे पहले 19 से 22 दिसम्बर के बीच उर्दू, गणित, सिंधी, संस्कृत व हिंदी की परीक्षा आयोजित की जाएगी।

सचिव के.के. पाठक ने बताया कि दिसम्बर की परीक्षाओं का कार्यक्रम यथावत रहेगा। इस परीक्षा में 3.20 लाख परीक्षार्थी भाग लेंगे। इन अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र निर्धारित कर वेबसाइट पर सूची उपलब्ध करवा दी गई है। प्रवेश-पत्र भेजे जाने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। अभ्यर्थी वेबसाइट से प्रवेश-पत्र डाउनलोड करके भी परीक्षा में बैठ सकते हैं।

अध्यापक भर्ती के शेष विषय गुजराती, पंजाबी, अंग्रेजी, विज्ञान तथा सामाजिक विज्ञान के लिए भी आयोग की ओर से कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। राष्ट्रीय जनगणना कार्यक्रम के चलते इन विषयों की परीक्षा मार्च-अप्रेल में ली जाएंगी। तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। आयोग की ओर से इस साल आयोजित सभी परीक्षाओं का परिणाम भी इसी साल जारी करने का लक्ष्य रखा गया है(राजस्थान पत्रिका,अजमेर,1.12.2010)।

आईआईएम ढीकली में नहीं
आईआईएम के भवन का मामला एक बार फिर लटक गया है। पिछले कुछ महीने से शहर के समीप ढीकली में बालिका मॉडल रेजिडेंशियल पब्लिक स्कूल के जिस नए भवन में इसकी स्थापना की बात चल रही थी उस पर मुख्यमंत्री के नए निर्देश के साथ ही विराम लग गया है और अब नए विकल्प की तलाश शुरू हो गई है।

मुख्यमंत्री ने ढीकली में नवनिर्मित परिसर का उपयोग जनजाति बालिका मॉडल रेजिडेंशियल पब्लिक स्कूल के लिए ही करने के निर्देश दिए हैं। यह भवन इसी मकसद से बनाया गया था। इसके बाद आईआईएम के लिए अस्थायी परिसर के अन्य विकल्पों के रूप में हरिशचंद्र माथुर लोक प्रशिक्षण संस्थान [ओटीसी] और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान [एसआईईआरटी] के नाम राज्य सरकार को भेजे गए हैं।

यूं आए निर्देश
पता चला है कि आईआईएम के लिए नियुक्त ओएसडी ने जब जनजाति विभाग से एमआरपी स्कूल भवन का कब्जा मांगा तब विभाग को आश्चर्य हुआ और उसने राज्य सरकार से इस बारे में मार्गदर्शन मांगा। तब मुख्यमंत्री के निर्देश आए कि एमआरपी स्कूल भवन दूसरे काम में नहीं लिया जाएगा।

कहती हैं जनजाति आयुक्त
-जनजाति विभाग के पास इस सम्बंध में अब तक कोई पत्र नहीं है कि ढीकली में निर्मित एमआरपी स्कूल परिसर आईआईएम के लिए लिया जाना है। न ही नहीं लिए जाने का पत्र है। विभाग को स्कूल शुरू करने की तैयारी के निर्देश हैं और इस सम्बंध में कार्यवाही शुरू कर दी गई है। -अपर्णा अरोरा, जनजाति आयुक्त

कहते हैं प्रमुख शासन सचिव
-मुख्यमंत्री आदिवासी बच्चों खासकर जनजाति बालिकाओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। उनकी मंशा है कि जनजाति बालिकाओं को किसी तरह का नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने अन्य विकल्पों पर विचार करने को कहा है। अब ओटीसी और एसआईईआरटी के बारे में विचार किया जा रहा है। -विपिनचंद्र शर्मा, प्रमुख शासन सचिव, तकनीकी शिक्षा(राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,2.12.2010)

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