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15 दिसंबर 2010

सुपर-30 की 'फिल्मी सफलता' से हॉलीवुड में खलबली

जेम्स कैमरन ने जब देश के लिए इंजीनियर तैयार करने वाले बिहार के निशुल्क शिक्षण संस्थान सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार से उनके संस्थान से निकले विद्यार्थियों की साल दर साल सफलता की कहानियां सुनीं तो वह हतप्रभ हो गए।

महाराष्ट्र के लावासा में आयोजित नवाचार एवं ज्ञान सम्मेलन में कुमार की मुलाकात कैमरन से हुई। कुमार ने बताया, "कैमरन ने मुझसे कहा कि आपकी उम्मीदों से भरपूर जीवंत कहानियां सुनना बहुत आश्चर्यजनक अनुभव है। वह इससे काफी प्रभावित थे।"

कुमार के सुपर-30 संस्थान से कई गरीब छात्रों को प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में प्रवेश लेने में मदद मिली है।

कुमार ने कहा कि कैमरन ने उनके प्रयासों की सराहना की और पटना का दौरा करने का वादा किया। कैमरन ने 'टाइटेनिक', 'टर्मिनेटर', 'एलियन्स' और 'अवतार' जैसी फिल्मों का निर्माण किया है। ये सभी कालजयी फिल्में मानी जाती हैं।

विभिन्न क्षेत्रों में नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी, मनोरंजन, डिजाइन (टीईडी) संगठन के सहयोग से 'हिल सिटी ऑफ लवासा' में यह सम्मेलन आयोजित किया गया।

सम्मेलन में कुमार ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि मुझ जैसे एक शिक्षक को यहां जानी-मानी हस्तियों के बीच बोलने का अवसर दिया गया। उन्होंने कहा, "यह मेरे प्रदेश के लिए भी गर्व का विषय है, जहां मैंने अपने संस्थान की शुरूआत की।"


कुमार ने कहा कि उन्होंने सम्मेलन में बिहार के कुछ युवा प्रतिभाशाली गरीब छात्रों के आईआईटी में प्रवेश तक के सफर की कहानियां सुनाईं। कुमार ने कहा कि श्रोताओं से इन विद्यार्थियों को उनकी सफलता के लिए काफी सराहना मिली।

उन्होंने कहा, "जब मैंने एक ऐसे विद्यार्थी की कहानी बताई जो अपनी अत्यंत गरीबी के कारण पढ़ाई जारी रखने के लिए संघर्ष कर रहा था और बाद में वह उम्मीद का अग्रदूत बन गया तब उन्होंने तालियां बजाईं।"

"यह एक शांत सामाजिक क्रांति है जिसने कई परिवारों की किस्मत बदल दी, लेकिन यह सिर्फ एक छोटा सा प्रयास है।" उन्होंने कहा कि मेरा सपना गरीब से गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोलने का था।

कुमार स्वयं कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला लेना चाहते थे लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाए क्योंकि उनके पास इसके लिए पर्याप्त पैसा नहीं था। अब वह अपने संस्थान के सभी 30 बच्चों को पूर्ण छात्रवृत्ति देते हैं।

क्या है सुपर-30
सुपर-30 की शुरुआत पटना में एक शिक्षा कार्यक्रम के तहत "रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमैटिक्स" के बैनर तले आनंद कुमार ने 2002 में थी। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक वर्ष आर्थिक रूप से पिछड़े 30 मेधावी और प्रतिभावान छात्रों का चयन कर उन्हें आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षा की निशुल्क तैयारी कराई जाती है। "टाइम" पत्रिका ने सुपर-30 का नाम एशिया के सबसे अच्छे शिक्षण संस्थान के रूप में प्रकाशित किया था। 

2003 में सुपर-30 के 30 छात्रों में से 18 छात्रों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की थी । जो कि अगले वर्ष 2004 में बढ़कर 22 हो गई । उसके बाद 2005 में 26 छात्रों ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में बाजी मारी। पिछले 2 सालों से भी सुपर -30 के सभी छात्र आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्ण हो रहे हैं।

रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमैटिक्स’ के बैनर तले चलने वाला ‘सुपर 30’ अपने सभी छात्रों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके रहने की व्यवस्था भी मुफ्त करता है । सुपर-30 के सभी छात्र गरीब घरों से आते हैं। जिनमें प्रतिभा तो कूटकूट के भरी होती है पर पैसे के अभाव में उच्च शिक्षा पाना उनका सपना होता है। सुपर-30 परीक्षा के माध्यम से इन्हीं सभी छात्रों का चयन दूर दराज के इलाकों से करता है और उन्हें आईआईटी के कैंपस तक पहुंचाता है।किसी जमाने में पैसे के अभाव में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं ले पाने वाले आनंद कुमार आज तारीख में लाखों छात्रों के भविष्य को संवारने में जुटे हैं(दैनिक भास्कर,पटना,15.12.2010)।

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