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22 दिसंबर 2010

यूपीःसार्वजनिक उद्यमों में स्वतंत्र निदेशकों के 350 पद खाली

सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) के निदेशक मंडलों में स्वतंत्र निदेशकों के 350 पद खाली हैं। यह जानकारी मंगलवार को यहां पीएसई के हितों को देखने वाली शीर्ष संस्था स्टैन्डिंग कान्फ्रेंस ऑफ पब्लिक इंटरप्राइजेज (स्कोप) के महानिदेशक डा.यूडी चौबे ने दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को पीएसई के स्वतंत्र निदेशकों के इन रिक्त पदों को भरने के लिए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक उद्यमों में स्वायत्तता का अभाव है। निजी क्षेत्र से प्रतिस्पर्धा और खुद को बेहतर साबित करने के लिए पीएसयू अधिक स्वायत्तता चाहते हैं। स्कोप ने केंद्र सरकार के सार्वजनिक उद्यम विभाग से मांग की है कि पीएसई के प्रबंधन में निदेशक मंडल के स्तर पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होना चाहिए।
यहां स्कोप की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत करने आये डा.चौबे ने बताया कि पीएसई के अध्यक्ष व निदेशकों के चयन की प्रक्रिया उनकी सेवानिवृत्ति के बाद शुरू होती है। इसमें काफी समय लगता है। इसकी वजह से यह पद लंबे समय तक खाली रहते हैं। इसलिए स्कोप ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पीएसई के अध्यक्ष व निदेशकों के चयन की प्रक्रिया बोर्ड के मौजूदा सदस्यों की सेवानिवृत्ति से छह महीने पहले शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने पीएसई के स्वतंत्र निदेशकों को प्रशिक्षण दिये जाने की वकालत की और उनके कार्य के मूल्यांकन का भी सुझाव दिया। उनके मुताबिक स्वायत्तता के इच्छुक पीएसई चाहते हैं कि कंपनी के मामले निदेशक मंडल पर छोड़ दिये जाएं। स्वायत्तता मिलने पर पीएसई का प्रबंधन और उत्पादकता दोनों सुधरेंगे। यह उन्हें देश के बाहर भी अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बनायेगा।
बकौल डा.चौबे आर्थिक सुधारों के लागू होने के बाद सार्वजनिक उद्यम अपनी उत्पादकता और ढांचे के आकार को लेकर सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि जहां 1991 से पहले पीएसई में कुल 23 लाख कर्मचारी काम करते थे, वहीं अब उनमें 15 लाख कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 51 बीमार उद्यमों में से 20 लाभ

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