आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे गुर्जरों की गुरुवार को पहले दौर की बातचीत हालांकि किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन सकारात्मक रही।
धरना स्थल पीलूपुरा के निकट कारवाड़ी गांव में करीब ढाई घंटे तक चली बातचीत के दौरान गुर्जरों के 9 बिंदुओं में से सरकारी पक्ष ने 8 पर सहमति जताई। गुर्जर पांच फीसदी आरक्षण होने तक भर्तियां रोकने पर अड़े रहे। वार्ता मंगतू राम पटेल के घर पर हुई। बाद में गुर्जरों के प्रतिनिधिमंडल ने धरने पर बैठे समाज के लोगों को बातचीत की जानकारी दी।कर्नल किरोड़ी सिंह बैसला ने कहा कि दूसरे दौर की बात शुक्रवार को बयाना में सरकारी कॉलेज या बीएड कॉलेज में हो सकती है।
ऐसा माना जा रहा है कि दूसरे दौर की बातचीत मंत्रियों और उच्चधिकारियों के साथ होगी। गुर्जर समाज के नेताओं ने संकेत दिया है कि इसमें मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केंद्रीय मंत्री सी.पी. जोशी, सचिन पायलट, ऊर्जा मंत्री डॉ. जितेंद्रसिंह और पुलिस महानिदेशक को भी शामिल कराया जा सकता है। इससे पहले गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने सुबह प्रतिनिधिमंडल तय करने के लिए समाज के पंच-पटेलों से बात कर नाम तय किए।
गुरुवार को हुई वार्ता में सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधु ने बताया कि गुर्जरों के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की ओर से उठाए गए बिंदुओं में से अधिकांश पर सहमति बन गई है। पांच प्रतिशत आरक्षण का फैसला होने तक भर्तियां रोकने की मांग पर कोई सहमति नहीं बन पाई। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि सरकार एक प्रतिशत आरक्षण अभी दे रही है, जबकि चार प्रतिशत सर्वे के बाद दे देगी। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर भर्तियां कर दी जाएंगी।
ये थे गुर्जरों के प्रतिनिधि: भीमसिंह खटाणा के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में बसंता गुर्जर, राजाराम सरपंच, गुर्जर मल सागणा, दरबारीसिंह, रमण हवलदार, बाबूसिंह, श्रीराम बैसला, हरिकिशन, दीवानसिंह, महाराज सिंह, देवीसिंह और बनेसिंह शामिल थे। सरकार की ओर से नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव जी.एस. संधु, संभागीय आयुक्त राजेश्वरसिंह, भरतपुर कलेक्टर कृष्ण कुणाल, पाली कलेक्टर नीरज के. पवन और स्थानीय पुलिस अधिकारी शामिल थे।
गृहमंत्री आंदोलनकारियों को भड़काएं नहीं: गृहमंत्री शांति धारीवाल के बयान की गुरुवार को आंदोलनकारियों में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। संघर्ष समिति के सदस्य एडवोकेट अतरसिंह ने कहा कि गृहमंत्री उकसाने वाली भाषा का प्रयोग करके आंदोलन को भड़काने का प्रयास न करें तो ही अच्छा है।
नौ में से आठ मांगों पर बनी सहमति, गुर्जरों की ओर से रखे गए मुद्दे: 5 प्रतिशत आरक्षण तत्काल मिले। आरक्षण मिलने तक भर्तियों पर रोक लगाएं। गुर्जरों के आरक्षण विधेयक को नौवीं सूची में डलवाएं। गुर्जरों पर लगाए गए मुकदमे वापस लिए जाएं। घायलों को मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए। पिछले आंदोलन में स्थायी घायल हुए गुर्जरों को पेंशन दें। देवनारायण बोर्ड का गठन किया जाए और बजट बढ़ाएं। जेलों में बंद गुर्जरों को तुरंत रिहा करें। जब्त हथियार वापस दें और लाइसेंसों का नवीनीकरण करें।
सरकार का प्रस्ताव: सरकार ने गुर्जरों के 5% आरक्षण देने की मांग को छोड़कर सभी पर सहमति जता दी। आरक्षण के मुद्दे पर कहा गया कि 1% अभी दे दिया जाएगा शेष 4% सर्वे कराने के बाद लागू होगा।
सर्वे के समय पर बहस
गुर्जर: सर्वे का काम तीन माह में पूरा किया जाए। विधेयक संबंधी औपचारिकताएं भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर पूरी की जाएं। विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करवाया जाए।
सरकार: तीन माह में सर्वे करवाना और विधेयक बनवाना संभव नहीं। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार एक साल की अवधि में सर्वे करा लिया जाएगा। इसके लिए एजेंसी नियुक्त करने के लिए काम शुरू हो गया है।
सामान्य रहा रेल यातायातः जयपुर-दिल्ली और जयपुर-कोटा के बीच रेल यातायात गुरुवार को सामान्य रहा। इन ट्रैकों पर बांदीकुई और निवाई के निकट गुर्जर जमे थे, जो बुधवार को हट गए थे। उधर, पीलूपुरा में दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर ग्यारहवें दिन भी गुर्जर बैठे रहे। इस कारण किसी ट्रेन का संचालन नहीं हुआ। अधिकांश गाड़ियां मार्ग बदलकर चलाई गईं। आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जरों की प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर जाम, बंद और प्रदर्शन का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। भरतपुर, कुम्हेर और अन्य कस्बों में बंद सफल रहा। भरतपुर में हाईवे पर जाम दूसरे दिन भी जारी रहा(दीनदयाल सारस्वत,अनिल पाराशऱ,दैनिक भास्कर,जयपुर/हिंडौनसिटी/बयाना,31.12.2010)।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।