महाविद्यालयों द्वारा स्वीकृत सीटों से ज्यादा प्रवेश का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है। लखनऊ विश्र्वविद्यालय से संबद्ध कालीचरण पीजी कॉलेज ने एमकॉम प्रथम वर्ष में स्वीकृत संख्या से ज्यादा विद्यार्थियों को दाखिला दे दिया। बिना किसी आपत्ति के उनकी फीस भी विवि में जमा हो गई। चार माह तक कक्षाओं में पढ़ने के बाद इन विद्यार्थियों का परीक्षा फार्म भी लविवि भेज दिया गया। परीक्षा फार्मो की जांच के दौरान मामला खुला। लविवि के प्रवक्ता प्रो. एसके द्विवेदी ने बताया कि स्वीकृत सीटों से ज्यादा विद्यार्थियों को परीक्षा की अनुमति नहीं दी जा सकती। पिछले साल महाविद्यालयों द्वारा मानकों से ज्यादा प्रवेश के कई मामले सामने आये थे। इसके बाद लविवि ने परीक्षा से पहले परीक्षा फार्मो की गहन जांच की बात कही थी। इसी प्रकिया के तहत गत दिनों महाविद्यालयों द्वारा भरे गए परीक्षा फार्म की जांच के दौरान कालीचरण महाविद्यालय में स्वीकृत सीटों से ज्यादा प्रवेश का मामला प्रकाश में आया। महाविद्यालय को एमकॉम में 60 सीटों पर प्रवेश की अनुमति है, जबकि परीक्षा के लिए कुल 73 फार्म लविवि को भेजा गया था। परीक्षा विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि महाविद्यालय ने परीक्षा शुल्क जमा करने के लिए दो ड्राफ्ट लगाये थे। एक में साठ विद्यार्थियों का विवरण था जबकि दूसरे में तेरह का। शंका होने पर प्रवेश विभाग से सीटों का विवरण मांगा गया तो पता चला कि महाविद्यालय को केवल 60 सीटें पर ही प्रवेश की अनुमति है। अधिकारियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए अतिरिक्त 13 विद्यार्थियों के परीक्षा फार्म रोक लिया तथा उनके परीक्षा देने पर भी रोक लगा दी। प्रवेश अधर में लटकने से परेशान विद्यार्थी लविवि और महाविद्यालय के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पा रहा। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बीएन मिश्र ने बताया कि प्रवेश के दौरान सीट बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसी बीच विद्यार्थियों का उक्त पाठ्यक्रम में प्रवेश हो गया। उम्मीद थी कि परीक्षा से पहले सीट बढ़ाने की स्वीकृति मिल जाएगी, लेकिन उसमें विलम्ब हो गया। अभी भी लविवि अधिकारियों से बात चल रही है(दैनिक जागरण,लखनऊ,2.12.2010)।
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