मेडिकल कालेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए यहां के शिक्षकों की सेवानिवृत्त आयु 70 साल करने पर सरकार विचार कर रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट में रखा जाएगा। मेडिकल कालेजों में शिक्षकों की मौजूदा सेवानिवृत्ति आयु 65 साल है। यह नियम लागू होने के बाद प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों में शिक्षकों की कमी दूर की जा सकेगी, साथ ही एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने में मदद मिलेगी। शिक्षकों की कमी के चलते प्रदेश के कुछ मेडिकल कालेजों में कई विभाग बंद हो चुके हैं। रीवा मेडिकल कालेज में रेडियोलाजी, एनेस्थीसिया और आर्थाेपोडिक्स विभाग बंद हैं। इसी तरह ग्वालियर में आर्थोपोडिक्स, इंदौर में डिप्लोमा आर्थोपोडिक्स व जीएमसी भोपाल में रेडियोथैरेपी विभाग बंद पड़ा है। इसकी बड़ी वजह शिक्षकों की कमी रही है। दूसरी बड़ी वजह उपकरणों की कमी है। देशभर में डाक्टरों की कमी को देखते हुए मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की जगह बनाई गई गवर्निग बाडी ने मापदण्ड शिथिल किए हैं। इसे केंद्र सरकार की हरी झंडी भी मिल गई है। इसके मुताबिक पहले 25 एकड़ की जगह अब 10 एकड़ जमीन में भी मेडिकल कालेज खोले जा सकेंगे। साथ ही 1100 बिस्तरों पर 250 मेडिकल छात्रों को प्रवेश दिया जा सकेगा। मेडिकल कालेजों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए निजी और सरकारी सभी कालेजों में सेवानिवृत्त आयु 65 से बढ़ाकर 70 साल करने का भी प्रावधान है। अब यह राज्यों को तय करना है कि वे मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की जगह बनाई गई गवर्निग बाडी के मापदण्डों के मुताबिक मेडिकल शिक्षकों की उम्र 70 साल करते हैं कि नहीं। प्रदेश में छह सरकारी मेडिकल कालेज हैं, यहां भी शिक्षकों की कमी है। हर साल लगभग बीस शिक्षक रिटायर हो रहे हैं, जबकि नए लोग आना नहीं चाहते, क्योंकि अन्य प्रदेशों की तुलना में यहां पर वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाएं कम हैं। सरकारी मेडिकल कालेजों के शिक्षक निजी मेडिकल कालेजों में जा रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी पूरा करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है, इसीलिए सरकार अब उनकी सेवानिवृत्त आयु 70 करने जा रही है। इस संबंध में मप्र मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के सचिव डा.बृजेन्द्र मिश्रा का कहना है कि उम्र बढ़ाने के पहले सरकार को एसोसिएशन से बात करना चाहिए(दैनिक जागरण,भोपाल,8.12.2010)।
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