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08 दिसंबर 2010

कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा संबंधी विधेयक

टू जी स्पेक्ट्रम के मामले में हंगामे के बीच सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में बहुप्रतीक्षित विधेयक पेश किया जो कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण मुहैया कराने से संबंधित है। इस तरह से सरकार ने जेपीसी को लेकर हंगामे को किनारे करते हुए विधेयकों को संसद के पटल पर रखना शुरू कर दिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने स्पेक्ट्रम घोटाले की जांच के लिए जेपीसी गठित करने को लेकर विपक्ष की ओर से की जा रही नारेबाजी के बीच महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण विधेयक-२०१० पेश किया। इस विधेयक के दायरे में घरेलू सहायिकाओं को शामिल नहीं किया है।

इस मुद्दे पर कई महिला संगठन पहले ही विरोध जता चुके हैं। हालांकि इस विधेयक के सदन के पटल पर रखे जाने से कई महिला संगठनों को इस बात की राहत है कि कम से कम अब इसमें कुछ रद्दोबदल की गुंजाइश बचेगी। इस विधेयक को सुप्रीम कोर्ट के विशाखा फैसले के मद्देनजर लाया जा रहा है। इसके लिए लंबे समय से महिला संगठन मांग कर रहे थे। विधेयक में पहली बार घरों में चलने वाले लघु उद्योग में काम करने वाली महिलाकर्मियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि घरेलू काम करने वाली महिलाओं को भी इसमें शामिल करने की मांग थी। विधेयक में यह प्रावधान किया गया है कि सभी नियोजक-मालिक-छोटे और बड़े रोजगार देने वाले महिलाओं की शिकायतों एवं उनके खिलाफ लैंगिक उत्पीड़न और भेदभाव के मामलों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति गठित करेंगे। इस विधेयक के तहत तमाम छोटे-बड़े संस्थानों में काम करने वाली महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाने की बात कही गई है।

इस विधेयक को पेश करने का अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति की महासचिव सुधा सुंदरम्‌ ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में कई कमियों को दूर किया जाना चाहिए तभी महिलाओं को कार्यस्थलों पर सुरक्षा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के दायरे से घरों में काम करने वाली महिलाओं को बाहर रखा जाना कमजोर एवं वंचित तबके की हजारों महिलाओं एवं लड़कियों के साथ अन्याय है।

उन्होंने कहा कि आज काफी संख्या में गरीब महिलाएं घरों में काम करती हैं और ये महिलाएं उत्पीड़ित होने के खतरे से हमेशा घिरी रहती हैं। ऐसे में सरकार को सबसे पहले ऐसी महिलाओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक में इस बात के भी प्रावधान होने चाहिए जिससे शिकायत करने वाली महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पाए।

उन्होंने कहा कि चूंकि ये सारी लड़कियां या महिलाएं असंगठित क्षेत्र में हैं और इन्हें नौकरी की किसी भी तरह की सुरक्षा प्राप्त नहीं है इसलिए ये गारंटी उन्हें चाहिए ही। इस तरह से सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक तथा वुमेन पावर कनेक्ट की अध्यक्ष डॉ. रंजना कुमारी ने इस विधेयक में निहित कमियों को गिनाया।


उन्होंने कहा कि इसमें कहा गया है कि यौन उत्पीड़न की शिकार महिला को दोषी कर्मचारी या अधिकारी के वेतन के चौथाई हिस्से का भुगतान मुआवजे के तौर पर किया जाना चाहिए लेकिन दोषी कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की आपराधिक कार्यवाही शुरू किए जाने के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है। ऐसे में यह विधेयक दंतविहीन प्रतीत होता है(नई दुनिया,दिल्ली,8.12.2010)। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्टः
मंगलवार को लोकसभा में जेपीसी मांग पर हंगामे के बीच केंद्र ने कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण संबंधी अहम विधेयक पेश कर दिया। इसके पारित हो जाने के बाद कार्यस्थलों पर महिलाओं के विभिन्न प्रकार के यौन उत्पीड़न की रोकथाम के लिए कंपनी या संस्थान को आंतरिक समिति गठित करना अनिवार्य हो जाएगा जो संबंधित शिकायतों का निराकरण करेगी। 
लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य हर स्तर और उम्र की महिलाओं के लिए कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना है। इसके दायरे में घरेलू कामकाज करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशों में जिला स्तर पर उक्त व्यवस्था कायम करने की जवाबदेही स्थानीय प्रशासनकी होगी। 

अगर कोई कंपनी या संस्थान अपनी महिला कर्मचारियों की यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए आंतरिक समिति का गठन नहीं करती है, तो उस पर पचास हजार रुपए तक का हर्जाना ठोंका जा सकता है। लेकिन किसी महिला कर्मचारी की शिकायत जांच के दौरान ‘झूठी या शरारतपूर्ण’ पाए जाने पर उस सेवा नियमों के तहत या अन्य कानूनों के तहत कार्रवाई का प्रावधान भी है। 
हालांकि विपक्षी दल शिवसेना ने साफ संकेत दिए है कि वह इस अहम विधेयक को बगैर चर्चा के पारित नहीं होने देगी। 

शिवसेना सांसद चंद्रकांत खेरे ने कहा कि विपक्ष ने देशहित में वर्ष 2010-11 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों तथा विनियोग विधेयक और रेलवे की वर्ष २क्१क्-११ की अनुपूरक मांगों एंव विनियोग विधेयकों को पिछले सप्ताह बिना चर्चा के पारित होने दिया लेकिन अन्य अहम विधेयकों को बिना चर्चा के पारित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं कार्यस्थल यौन उत्पीड़न से संरक्षण संबंधी विधेयक को हमारा पूरा समर्थन है, लेकिन इस अहम विषय पर सदन में चर्चा आवश्यक है। 

इससे पहले लोकसभा में सुबह अध्यक्ष मीरा कुमार और राज्यसभा में सभापति हामिद अंसारी ने जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने को कहा तो रोज की तरह भाजपा, शिवसेना, जदयू और अन्नाद्रमुक तथा सपा, राजद और बीजद के अधिकतर सदस्य जेपीसी की मांग लेकर नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए। हंगामा न थमते देख दोनों सदन की बैठक दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में स्वास्थ्य एंव परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान बंगलूर विधेयक 2010 पेश किया। दोनों सदनों में हंगामा बदस्तूर जारी रहा और बैठकें दिन भर के लिए स्थगित कर दी गईं।

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