देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला दिलाने वाली परीक्षाएं आईआईटी-जेईई और एआईईईई की घोषणा हो चुकी है। जेईई परीक्षा जहां आपको देश के विभिन्न आईआईटी, आईटी-बीएचयू वाराणसी, आईएसएम धनबाद में दाखिला दिलाएगी, वहीं एआईईईई के जरिए आपको एनआईटी, आईआईआईटी, डीम्ड यूनिवर्सिटीज, टेक्निकल इंस्टीट्यूशन्स, डीटीयू और अन्य सरकारी अनुदान प्राप्त विभिन्न संस्थानों में दाखिला मिलेगा। आईआईटी-जेईई में दो एटेम्प्ट मिलते हैं, जिनमें पहला एटेम्प्ट 12वीं कक्षा की परीक्षा देते हुए तथा दूसरा 12वीं पास करने के तुरंत बाद मिलता है, जबकि एआईईईई में तीन एटेम्प्ट मिलते हैं।
प्रश्न-पत्र का प्रारूप
सामान्यतया हर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में प्रत्येक विषय में द्विस्तरीय प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें कुछ ज्यादा अंक वाले और कुछ कम अंक वाले प्रश्न होते हैं। गलत उत्तर देने पर निगेटिव मार्किंग का भी प्रावधान रहता है। अतः उसी प्रश्न का उत्तर देना चाहिए, जिसके बारे में आप पूरी तरह आश्वस्त हों। ऐसा देखा गया है कि 55-60 प्रतिशत सही उत्तर देने पर चयन की संभावना बनी रहती है, लेकिन यह भी जरूरी है कि गलती न हो। आईआईटी-जेईई प्रवेश परीक्षा के लिए प्रश्न-पत्रों की संख्या 2 होती है और प्रत्येक प्रश्न-पत्र के लिए 3 घंटों की अवधि निर्धारित रहती है। प्रश्न-पत्र 1 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स के 84 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि द्वितीय प्रश्न-पत्र में इन्हीं तीनों विषयों के 57 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। इस परीक्षा में 5 सेक्शन बनाए जाते हैं- 1. एक ही उत्तर सही है, 2. एक या एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं, 3. पैराग्राफ पर आधारित सवाल, 4. मैचिंग पर आधारित सवाल, 5. इंटीजर पर आधारित सवाल। अभ्यर्थियों को चाहिए कि वो सभी टाइप के प्रश्नों की प्रैक्टिस ज्यादा से ज्यादा करें। एआईईईई में फिजिक्स, केमिस्ट्री व मैथ्स के 90 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें निगेटिव मार्किंग 1/4 पैटर्न की होती है।
केमिस्ट्री पर पकड़ तो बढ़त तय
केमिस्ट्री पर पकड़ बनाकर अन्य प्रतियोगियों पर बढ़त बनाने का बेहतर मौका होता है। केमिस्ट्री में जनरल और ऑर्गेनिक केमिस्ट्री, रिएक्शन मैकेनिज्म, इलेक्ट्रो- केमिस्ट्री, को-ऑर्डिनेशन कम्पाउंड, केमिकल बाउंडिंग, एरोमैटिक कम्पाउंड्स, कार्बोनिल कम्पाउंड्स, बायो मॉलिक्यूल्स आदि विषयों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
जूझने से आती है गणित
गणित में बहुत से सवाल आसान मालूम पड़ते हैं। इसलिए अभ्यास के दौरान छात्र उन्हें बिना हल किए आगे बढ़ जाते हैं। यह प्रवृत्ति घातक सिद्ध हो सकती है। इसके लिए कठिन सवालों से जूझने की प्रवृत्ति विकसित करनी चाहिए। इससे सूत्रों का अभ्यास होता रहता है। गणित में महत्वपूर्ण टॉपिक्स फंक्शन, डिफ्रेन्सिबिलिटी, मैक्सिमा-मिनिमा, एरिया बाउंडेड रीजन, डेफिनिट इंटीगरल, डिफें्रशियल समीकरण, सर्किल, कोनिक सेक्शन, कॉम्प्लेक्स नंबर, क्वाड्रेटिक समीकरण, प्रोबैबिलिटी, वेक्टर, थ्रीडी आदि हैं।
सबसे बड़ी चुनौती है फिजिक्स
गणित के विद्यार्थियों का यह मनपसंद विषय होता है। फिजिक्स में मैकेनिक्स, इलेक्ट्रो-स्टैटिक्स और मॉडर्न फिजिक्स पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा मैकेनिक्स, क्वांटम फिजिक्स
आदि टॉपिक्स गणित और केमिस्ट्री के विभिन्न अध्यायों का भी हिस्सा होते हैं। इसलिए इनकी तैयारी से तिहरा लाभ होता है।
बारहवीं के छात्र
जो छात्र 12वीं एपियरिंग हैं, उनकी तैयारी के लिए दोहरे मापदंड की जरूरत होती हैं। उन्हें बोर्ड और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी साथ-साथ करनी पड़ती है। ऐसे अभ्यर्थियों को चाहिए कि वे बोर्ड सिलेबस के सब्जेक्टिव एवं ऑब्जेक्टिव प्रश्नों का चयन अच्छे ढंग से करें। सब्जेक्टिव प्रश्नों को बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण मानें, जबकि ऑब्जेक्टिव प्रश्नों को दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए तैयारी करें। एक खास बात यह भी है कि बोर्ड परीक्षाओं में सिर्फ 12वीं के प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में 11वीं और 12वीं दोनों सिलेबस के प्रश्न पूछे जाते हैं। अतः 11वीं का रिवीजन भी अनिवार्य है। प्रायः ऐसा देखा गया है कि आईआईटी में 11वीं के पाठ्यक्रम से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि एआईईईई में 12वीं के पाठ्यक्रम से अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं।
बारहवीं पास विद्यार्थी
जो अभ्यर्थी 12वीं की परीक्षा पास कर चुके हैं, उनके लिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी करना थोड़ा आसान इसलिए है कि वे अपनी पढ़ाई का सारा समय एक ही बिंदु पर केंद्रित कर सकते हैं। इसके लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम का क्रमवार अध्ययन, रिवीजन तथा रेगुलर टेस्ट सीरीज करना अनिवार्य है। आईआईटी की तैयारी के लिए हर विषय के कुछ खास टॉपिक्स पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
टाइम मैनेजमेंट और सफलता का मंत्र
आगामी चार महीने के अंदर तैयारी करने के लिए अपनी पढ़ाई की कुल अवधि को तीन भागों में (तीन विषयों के लिए) सुनिश्चित करें। इसके बाद प्रत्येक विषय के कुल टॉपिक्स के आधार पर समय का विभाजन करें। याद रहे कि तैयार किए गए टॉपिक्स का रिवीजन बहुत महत्वपूर्ण है और इसके लिए हर विषय के 10 वर्षों में पूछे गए प्रश्नों को जरूर हल करें तथा नियमित रूप से टेस्ट सीरीज करें। जितना आप अभ्यास करेंगे, उतना ही सफलता की संभावना बढ़ेगी। जहां तक कोचिंग का सवाल है, तो तैयारी की पूर्णता के लिए यह काफी लाभदायक सिद्ध हो सकती है। लेकिन कोचिंग संस्थान का चयन करते समय उसके पूर्व रिकॉर्ड, शिक्षकों की उत्कृष्टता व शैक्षिक योग्यता एवं सटीक मार्गदर्शन की क्षमता का ध्यान विशेष रूप से रखना चाहिए। कोचिंग से मिले एसाइनमेंट, प्रैक्टिस टेस्ट, यूनिट वाइज टेस्ट, माइलस्टोन टेस्ट व मॉडल टेस्ट विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं(डॉ.सी.पी.शर्मा,अमर उजाला,14.12.2010)।
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