दिल्ली विश्वविद्यालय के कैम्पस प्लेसमेंट में इकोनॉमिक्स ऑनर्स के एक छात्र को इस साल 39 लाख रुपए का पे-पैकज ऑफर हुआ। यह इस बात का संकेत है कि इकोनॉमिक्स डिग्रीधारियों के दिन बहुर रहे हैं। इकोनॉमिक्स में संभावनाओं पर अशोक सिंह की रिपोर्ट।
साइंस और कॉमर्स के अलावा किसी और फील्ड में कोई विशेष करियर नहीं है, ऐसा सोचने और समझने वालों की कमी नहीं है, लेकिन यह जान कर आश्चर्य होगा कि अब आर्ट्स साइड के तमाम ऐसे विषय और कोर्सेज हैं, जिन के जरिए बेहतरीन करियर बना पाना संभव है। ऐसे विषयों में इकोनॉमिक्स, साइकोलॉजी, इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस, ज्योग्राफी आदि का नाम लिया जा सकता है।
यहां हम इकोनॉमिक्स पर चर्चा कर रहे हैं। इसके तहत बुनियादी तौर पर सीमित संसाधनों के दक्षतापूर्ण उपयोग संबंधित अध्ययन किया जाता है। इन संसाधनों में कैपिटल, श्रम, भूमि और कच्चे माल को शामिल किया जा सकता है। किसी भी देश के उत्पादन कार्य को अधिक सुचारु बनाने और अधिक उत्पादन के लिए इकोनॉमिस्ट की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं, फाइनेंस, बैंकिंग, देश की पंचवर्षीय योजना तैयार करने, एक्सचेंज रेट्स के निर्धारण, विदेशी मुद्रा के मैनेजमेंट, देश की मौद्रिक नीतियों के निर्माण, ब्याज दर के निर्धारण आदि की जटिलताओं को सुलझाने में ऐसे विशेषज्ञों की आवश्यकता को भली-भांति समझा जा सकता है।
इकोनॉमिस्ट के महत्त्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि देश में अलग से इंडियन इकोनॉमिक्स सर्विस परीक्षा का आयोजन संघ लोक सेवा आयोग द्वारा प्रति वर्ष करवाया जाता है। इस परीक्षा के माध्यम से चयनित उम्मीदवारों को ही ऐसे पदों पर नियुक्त किया जाता है, जहां पर देश की आर्थिक नीतियां तय की जाती हैं।
शायद यही कारण है कि महज बीए (इकोनॉमिक्स) ऑनर्स की डिग्री के आधार पर न सिर्फ बेहतरीन नौकरियां मिल रही हैं, बल्कि कैम्पस प्लेसमेंट भी भारी संख्या में हो रहे हैं। कैम्पस प्लेसमेंट के जरिए नौकरियां देने वालों में सरकारी बैंकों से लेकर एमएनसी कंपनियां तक पीछे नहीं हैं। और तो और इनका पे-पैकेज भी आश्चर्य चकित करने वाला होता है, जो किसी भी मायने में फ्रेशर एमबीए से कम नहीं कहा जा सकता। हालांकि यह ट्रेंड देश के चंद नामी-गिरामी विश्वविद्यालयों में ही फिलहाल देखने को मिल रहा है, पर जानकारों की मानें तो वह दिन भी दूर नहीं, जब अन्य विश्वविद्यालयों के इकोनॉमिक्स डिग्रीधारकों को भी ऐसे ही मौके मिलने शुरू हो जाएंगे।
क्यों बढ़ी इकोनॉमिक्स की मांग
आखिर ऐसा क्या हुआ कि इकोनॉमिक्स वालों की मांग एकाएक तेज हो गयी? इसके कारणों की तह में जाने पर पता चलता है कि हाल की मंदी के दौर में एमबीए सरीखे प्रोफेशनल्स की मोटी सेलरी से छुटकारा पाने और खर्चों में कटौती के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बड़ी कंपनियों ने यह विकल्प तलाश किया है। कंपनियों द्वारा इन फेशर्स को इनहाउस ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की गयी, ताकि अपनी जरूरत के मुताबिक वे काम ले सकें।
इकोनॉमिक्स ऑनर्स के कोर्स में छात्रों को विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है, जिसके कारण वे आर्थिक समस्याओं से जुड़ी जटिलताओं को न सिर्फ भली-भांति समझ सकते हैं, बल्कि उपयुक्त हल भी तलाश सकते हैं। प्लानिंग की बात हो या उसके क्रियान्वयन की, इन सभी कार्य-कलापों में स्वयं को ढालने की अद्भुत क्षमता इकोनॉमिक्स की बैकग्राउंड वाले युवाओं के पास अपेक्षाकृत अधिक होती है।
इकोनॉमिक्स का प्रारंभिक कोर्स प्राय: स्कूल के स्तर से ही शुरू हो जाता है, लेकिन ग्यारहवीं के बाद बाकायदा गंभीर अध्ययन की शुरुआत होती है। असल परीक्षा तो कॉलेज में बीए (ऑनर्स) कोर्स से शुरू होती है। कहा जाता है कि इस कोर्स का सिलेबस आईएएस एग्जाम के सिलेबस के समकक्ष है। अब इसी तथ्य से इकोनॉमिक्स की डिग्री के महत्त्व को समझा जा सकता है। इसके तहत माइक्रो इकोनॉमिक्स, मेक्रो इकोनॉमिक्स, इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स, आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसीज, इकोनॉमिकल स्टेटिस्टिकल एप्लिकेशन्स तथा फाइनेंशियल अकाउंटिंग आदि की पूरी जानकारी दी जाती है।
देश में इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की काफी व्यापक व्यवस्था है। समस्त प्रदेशों की यूनिवर्सिटीज और कॉलेज में इकोनॉमिक्स पर आधारित बीए अथवा एमए स्तर के कोर्स उपलब्ध हैं। प्राय: इनमें 10+2 के अंकों के आधार पर दाखिले का प्रावधान है। हालांकि नामी कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिले दिए जाते हैं। प्रोफेशनल कोर्स की तुलना में इकोनॉमिक्स पाठय़क्रमों में प्रवेश पाने के लिए कोई ज्यादा मारा-मारी की स्थिति फिलहाल नहीं है, लेकिन बढ़ती लोकप्रियता और रोजगार बाजार में ऐसे डिग्रीधारकों की बढ़ती मांग से आने वाले समय में कंपिटिशन बढ़ने की पूरी संभावना है।
इकोनॉमिस्ट के विभिन्न स्पेशलाइजेशन
माइक्रो इकोनॉमिस्ट
ये बुनियादी तौर पर निजी कंपनियों या लोगों से संबंधित अध्ययन करते हैं और मांग और पूर्ति के बीच के संतुलन को बनाए रखने का काम करते हैं। इसके अलावा किसी खास प्रोडक्ट की आने वाले समय में कितनी मांग होगी, इसका पूर्वानुमान भी लगाते हैं।
मेक्रो इकोनॉमिस्ट
इनका दृष्टिकोण व्यापक होता है और ये देश की संपूर्ण अर्थव्यवस्था पर नजर रखते हुए आर्थिक संतुलन कायम रखने संबंधित नीतियों के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फाइनेंशियल इकोनॉमिस्ट
बैंकों की वित्तीय देखरेख एवं ब्याज दरें तय करने संबंधित जिम्मेदारियां इन लोगों पर होती हैं।
इंटरनेशनल इकोनॉमिस्ट
अन्य देशों की आर्थिक नीतियों के सन्दर्भ में सरकार को सुझाव देना जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस प्रकार के नीतिगत बदलाव जरूरी तौर पर किए जाने चाहिए।
इंडस्ट्रियल इकोनॉमिस्ट
विभिन्न इंडस्ट्रीज में उनके प्रॉडक्ट्स की मांग में आने वाले समय में किस तरह का ट्रेंड हो सकता है, इस तरह के अध्ययन करने का दायित्व इस विधा के इकोनॉमिस्ट संभालते हैं।
लेबर इकोनॉमिस्ट
लेबर की सप्लाई एवं न्यूनतम श्रमिक दरों का निर्धारण करना अथवा डेमोग्राफिक ट्रेंड का एनालिसिस आदि का काम इन विशेषज्ञों पर होती है।
इकोनॉमिक्स स्टूडेंट को 39 लाख का पे-पैकेज
दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के इकोनॉमिक्स ऑनर्स के स्टूडेंट को इस साल एक जर्मन कंपनी द्वारा रिकॉर्ड 39 लाख का पे-पैकेज इस वर्ष के कैम्पस प्लेसमेंट में ऑफर किया गया है। गत वर्ष इसी कॉलेज के इको ऑनर्स के ही स्टूडेंट को 32 लाख पर अपॉइंटमेंट दिया गया था। डीयू के ही सेंट स्टीफंस कॉलेज के इको ऑनर्स के स्टूडेंट को भी गत वर्ष 32 लाख का पे-पैकेज मिला था। श्रीराम कॉलेज में इस वर्ष कैम्पस प्लेसमेंट के लिए रजिस्टर्ड 480 स्टूडेंट्स में से 80 फीसदी को अब तक जॉब्स के ऑफर मिल चुके हैं। इनमें इकोनॉमिक्स के अलावा बीकॉम के स्टूडेंट्स भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि औसतन 5 से 7 लाख का पे-पैकेज इन स्टूडेंट्स को अब तक मिला है।
इकोनॉमिक्स डिग्री के आधार पर करियर की राहें
बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों में पॉलिसी मेकर की भूमिका
इंडियन इकोनॉमिक सर्विस के माध्यम से विभिन्न मंत्रलयों में इकोनॉमिक एडवाइजर
वर्ल्ड बैंक और आईएम सरीखे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में नियुक्तियां
आरबीआई के विभिन्न पदों पर सेलेक्शन
योजना आयोग में महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियां
कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में लेक्चररशिप
स्कूल में टीचिंग
कारपोरेट क्षेत्रों में इकोनॉमिक एडवाइजर
इंडियन इकोनॉमिक/ स्टेटिस्टिकल सर्विस एग्जाम
यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन द्वारा इस परीक्षा का आयोजन किया जाता है। इस परीक्षा के आधार पर विभिन्न मंत्रालयों में इकोनॉमिक प्लानिंग और इसी तरह के महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां की जाती हैं। क्लास 1 के इन पदों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं होती।
परीक्षा का आयोजन नवंबर या दिसंबर माह में अखिल भारतीय स्तर पर किया जाता है। इसमें 21 से 30 वर्ष की आयु के युवा शामिल हो सकते हैं। इनके पास इकोनॉमिक्स या स्टेटिस्टिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री होनी आवश्यक है। इंडियन इकोनॉमिक सर्विस एग्जाम में कुल 6 प्रश्न पत्र होते हैं। इनमें 4 प्रश्न पत्र इकॉनोमिक्स पर ही आधारित होते हैं। ये प्रत्येक 200 अंक के होते हैं। शेष दो प्रश्न पत्र अंग्रेजी और जीके पर आधारित होते हैं, जिनका मान 100-100 अंकों का होता है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए वेबसाइट www.upsc.gov.in देख सकते हैं(अशोक सिंह,हिंदुस्तान,दिल्ली,15.12.2010)।
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