परीक्षा शुरू होने के कुछ समय पहले ही बीटेक प्रथम वर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स कम्यूनिकेशन १०१ का पर्चा बाजार में आने की सूचना से जीबीटीयू अफसरों में ह़ड़कंप मच गया। आनन फानन में परीक्षा केंद्रों पर ई-मेल और फैक्स के जरिए दूसरे पेपर भेजकर परीक्षाएं कराई गईं। इस दौरान कई जगह एक से डे़ढ़ घंटे तक परीक्षा विलंब से शुरू हो सकीं। हालांकि विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक ए.के.मिश्र ने पेपर लीक होने की घटना से इंकार किया है। उन्होंने कहा कि प्रिंटिंग खराबी की वजह से पर्चा वापस लिया गया।
गौरतलब है कि गौतमबुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) की सेमेस्टर परीक्षाएं चल रही हैं। गुरुवार को बीटेक प्रथम वर्ष इलेक्ट्रॉनिक्स कम्युनिकेशन की परीक्षा थी। सूत्रों के अनुसार दोपहर दो बजे होने वाली इस परीक्षा का पेपर पहले ही बाजार में आ गया।
पर्चा लीक होने की खबर मिलते ही विश्वविद्यालय के कुलपति ने तत्काल उस पैकेट को रुकवाने के निर्देश दिए। बताया जाता है कि पर्चा गाजियाबाद और मेरठ के एक इंजीनियरिंग कालेज से लीक हुआ है। उनके निर्देश पर परीक्षा समन्वयकों को ई-मेल और फैक्स के जरिए दूसरा पर्चा भेजा गया। बाद में पर्चे की फोटो कॉपी बांटी गई(नई दुनिया,दिल्ली,31.12.2010 में लखनऊ से ख़बर)।
उधर,नकल माफिया उत्तर प्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) की परीक्षाओं में भी सेंध लगाने में सफल होते दिख रहे हैं। विश्वविद्यालय की बृहस्पतिवार को दूसरी पारी की परीक्षा आधे घंटे देर से शुरू हो सकी। इसके पीछे पेपर आउट होना कारण बताया जा रहा है। गौर करने वाली बात यह भी है कि नया प्रश्नपत्र फैक्स से कालेजों को भेजा गया जिसकी फोटो स्टेट कॉपी छात्र-छात्राओं को बांटी गई। प्रश्नपत्रों का दूसरा सेट नहीं था। जबकि यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में भी पेपर के चार सेट होते हैं। इसको लेकर विद्यार्थियों ने हंगामा भी किया और अफरातफरी मची रही।
इलेक्टॉनिक्स का पेपर देने पहुंचे विद्यार्थियों को दो बजे अचानक बताया कि पेपर में गड़बड़ी के कारण परीक्षा देर से शुरू होगी। एक बार तो लगा कि पेपर टल जाएगा लेकिन फैक्स से नया प्रश्नपत्र भेजे जाने की सूचना के बाद स्थिति कुछ सामान्य हो पाई। इसके बाद फोटो स्टेट कराकर छात्र-छात्राओं को पेपर बांटे गए। इस पूरी प्रक्रिया में तकरीबन आधा घंटा लग गया। हालांकि विद्यार्थियों को बाद में आधा घंटा अतिरिक्त समय दिया गया लेकिन इसको लेकर उनमें काफी नाराजगी रही। उनका कहना था कि इस तरह से आनन फानन में पेपर सेट तथा फैक्स करने में वह गलत हाथों में नहीं गया होगा इसकी क्या गारंटी है? छात्रों का यह भी कहना था कि पहले भी इस तरह की शिकायतें रही हैं। नोडल सेंटर आईईआरटी के ओएसडी डॉ. एससी रोहतगी ने बताया कि आधे घंटे के अंदर सभी कालेजों को पेपर भेज दिए गए थे। हालांकि पेपर आउट होने के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ भी बोलने से वह बचते रहे(अमर उजाला,इलाहाबाद,31.12.2010)।
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