बाहरी राज्यों के विश्वविद्यालयों के नाम से मध्यप्रदेश में डिग्री बेच रहे शैक्षणिक संस्थाओं को छोड़ने राज्य शासन तैयार नहीं है। बल्कि इनके खिलाफ शिकंजा लगातार सख्त किया जा रहा है। इनका फर्जीवाड़ा उजागर करने के बाद शासन ने अब इनमें तालाबंदी के लिए मुहिम शुरू कर दी है। इसी कवायद को अंजाम देते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने उन सभी जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजे गए हैं, जहां फर्जी संस्थान पकड़े गए थे। सोमवार को एक साथ 16 कलेक्टरों को पत्र लिखकर अभियान के दौरान पकड़े गए फर्जी संस्थाओं में तालाबंदी करने के निर्देश दिए हैं। शासन ने कलेक्टरों को इन सभी फर्जी संस्थाओं को तत्काल बंद कराने कहा है। अपने पत्र में विभाग ने उप महाधिवक्ता की राय और मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम का भी हवाला दिया है। वहीं जिन जिलों ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई है, उनके निरीक्षण दल के साथ ही जिला प्रशासन को भी रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार चार दिन चली कार्रवाई में शासन ने कुल 49 संस्थाओं पर छापे मारे थे। छानबीन में नौ संस्थाओं को राहत मिल गई है। इनमें से तीन संस्थाओं का संचालन ही बंद मिला, जबकि छह में क्षेत्रीय विवि की संबद्धता से ही पाठ्यक्रम चल रहे हैं। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद इनके खिलाफ एफआईआर रोक दी गई है। वहीं इस अभियान की अगली कड़ी की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इसके तहत प्रदेश भर गुप्त सर्वे कराया जा रहा है। जल्द ही पूरी रणनीति बनाकर ऐसे संस्थाओं पर छापामार कार्रवाई की जाएगी, जो दूसरे राज्यों के विवि के पाठ्यक्रम यहां संचालित कर रहे हैं(दैनिक जागरण,भोपाल,7.12.2010)।
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