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20 दिसंबर 2010

गोरखपुरःमदरसों में आईटीआई शुरू

दीनी तालीम की दुनिया में अहम दर्जा रखने वाले मदरसे जहां पाक कुरान और हदीस की रोशनी में इल्म हासिल करने वालों को मौलवी, मुफ्ती, कारी एवं हाफिज की डिग्री प्रदान करते हैं। उसका दूसरा पहलू भी है, जो करीब जाकर समझने के बाद ही नजर आएगा। वह यह कि दीनी इल्म के साथ ही वह तमाम तालीम जो केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, हर इंसान के लिए जरूरी है, मदरसों में शुरू हो गयी है। सरकारी पहल के बाद जनपद के आधा दर्जन मदरसों में मिनी आईटीआई खुल गयी है। दाखिले भी शुरू हो गए हैं।
मालूम हो कि मदरसों की शैक्षिक नींव मजबूत करने के लिए पहले सरकार ने हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और कम्प्यूटर की शिक्षा के लिए संविदा शिक्षकों की नियुक्ति की। मदरसों में सभी विषयों की पढ़ाई भी शुरू हो गयी। अब जनपद के आधा दर्जन मदरसों खूनीपुर स्थित अंजुमन इस्लामियां, दीवान बाजार स्थित दारूल उलूम हुसैनिया, चिलमापुर स्थित जामियां रजबिया मेराजुल उलूम, नूरिया खैरिया बगहीबारी आदि में मिनी आईटीआई की स्थापना कर दी गयी है। ताकि मदरसा छात्रों को इंजीनियर बनाने का ख्वाब पूरा हो सके। इसमें तीन ट्रेडों में पढ़ाई होगी। सिलाई-कढ़ाई, इलेक्ट्रिशियन और एसी-रेफ्रीजेटर के क्षेत्र में शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थी इंजीनियर बनने का रास्ता तय करेंगे। मदरसों के आईटीआई में प्रवेश के लिए मुंशी-मौलवी की डिग्री जरूरी है। इंजीनियर बनने का रास्ता दिखाने वाले उक्त मदरसों के प्रबंधकों ने भी इसके लिए ठोस कदम उठाया है। दीवान बाजार के मदरसा प्रबंधक का कहना है कि उन्होंने अपने स्तर से भी आईटीआई शिक्षा के लिए तमाम जरूरी सामान उपलब्ध कराया है। ताकि छात्रों को किसी चीज के लिए दिक्कत न हो सके(दैनिक जागरण,गोरखपुर,20.12.2010)।

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