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19 दिसंबर 2010

बैंक एजेंट के तौर पर करिअर

बैंकों द्वारा ग्रामीण इलाकों में लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोडऩे के वित्तीय समावेशन कार्यक्रम ने रोजगार के नए अवसर पैदा कर दिए हैं। जिसके तहत गांव में ही रहकर हर महीने 4000-8000 रुपये तक की आय हासिल की जा सकती है। बैंक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तहत देशभर में कंपनियों को अपना बिजनेस कारस्पांडेंट बना रहे हैं। ये कंपनियां ग्रामीण इलाकों में लोगों का खाता खोलने और उसे चलाने के लिए काफी संख्या में बिजनेस कारस्पांडेंट एजेंट बना रही हैं।

ऐसी ही कंपनी सीड फाइनेंशियल सर्विसेज जो कि देश के कई बैंकों के लिए बिजनेस कारस्पांडेंट के रूप में काम कर रही है, के प्रबंध निदेशक अनिरबन रॉय ने बिजनेस भास्कर को बताया कि कंपनी का इस समय पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक, फेडरल बैंक सहित प्रमुख बैंकों के साथ बिजनेस कारस्पांडेंट के तहत समझौता है। कंपनी देश के 20 राज्यों के 380 जिलों में काम कर रही है।


रॉय के अनुसार कंपनी सभी क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को बिजनेस कॉरस्पांडेंट एजेंट बनाती है, जो कि अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों के खाते खुलवाते हैं जो कि अभी तक बैंकिंग व्यवस्था से अभी तक नहीं जुड़ पाए है। जिसके तहत शून्य बैलेंस वाले खाते खोले जाते हैं। एजेंट को एक पीओएस मशीन दी जाती है, जो ग्राहकों के खाते के लिए लेनदेन का काम करती है। एजेंट खाताधारक को बायोमेट्रिक कार्ड देते हैं, जो स्मार्ट कार्ड की तरह होता है। इसके जरिए खाता धारक अपने खाते से अधिकतम 5000 रुपये तक प्रतिदिन निकाल सकता है। 

रॉय के अनुसार कंपनी एजेंट के लिए ऐसे लोगों को चुनती है जो कम से कम 10वीं पास हो, साथ ही उन्हें कम्प्यूटर की थोड़ी-बहुत जानकारी हो, जिससे वह रोजमर्रा का काम कर सकें। राय के अनुसार एक एजेंट हर महीने 4000-8000 रुपये तक की आय कर सकता है। रॉय ने बताया कि कंपनी मौजूदा बैंकों के अलावा एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई और आईडीबीआई बैंक के साथ समझौते करने के लिए बातचीत कर रही है। इसके अलावा कंपनी ने तकनीकी सहयोग के लिए टीसीएस, एचसीएल, कॉरोमंडल इंफोटेक के साथ समझौता किया है। इसके अलावा कंपनी बीमा, नॉन फाइनेंशियल और दूसरे प्रोडक्ट्स को भी अपने कारोबार में शामिल करने के लिए इनसे जुड़ी कंपनियों के साथ बातचीत कर रही है। 

कंपनी की अगले तीन महीने में 2000-2200 से एजेंट बनाने की योजना है। भारत सरकार ने देश के ऐसे लोगों को वित्तीय समावेशन कार्यक्रम के तहत जोडऩे के लिए बैंकों को कहा है, जो अभी तक बैंकिंग व्यवस्था से नहीं जुड़ पाएं हैं। इसके तहत देश के सभी बैंकों को रिजर्व बैंक के दिशा निर्देशों अनुसार वित्त वर्ष 2011-12 तक 2000 से ज्यादा आबादी वाले गांवों को इस कार्यक्रम से जोडऩा है। बैंक इसके लिए बिजनेस कारस्पांडेंट बनाकर लोगों को अपने साथ जोड़ रहे हैं(प्रशांत श्रीवास्तव,बिजनेस भास्कर,दिल्ली,18.12.2010)।

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