शहर के विभिन्न स्कूलों के नर्सरी कक्षा में दाखिलों को लेकर केन्द्र सरकार के दिशा-निर्देशों और राजधानी के स्कूलों व अभिभावकों के दबाव में सैंडविच बनी दिल्ली सरकार इतना जरूर सुनिश्चित करेगी कि सगे भाई-बहन एक ही स्कूल में पढ़ सकें। सरकार का दावा है कि वह नर्सरी एडमिशन की गुत्थी एक सप्ताह में सुलझा लेगी।
दिल्ली सरकार के विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि केन्द्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप नर्सरी एडमिशन के मामले में दिल्ली में भी लॉटरी प्रणाली पर अमल किया जाए जबकि यहां के स्कूल और अभिभावकों का कहना है कि पिछले साल लागू किए गए प्वाइंट सिस्टम को ही बहाल रखा जाए। दोनों ओर के दबाव के मद्देनजर दिल्ली सरकार बीच का रास्ता तलाश रही है।
सूत्रों ने बताया कि दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने अपने कानून विभाग से यह पूछा है कि केन्द्र सरकार के शिक्षा के अधिकार कानून के तहत लागू किए गए रैंडम शब्द का मतलब पूछा है। इसके अलावा सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि लॉटरी किए जाने की सूरत में सगे भाई-बहनों के मामले में लॉटरी अलग से की जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई बच्चा किसी खास स्कूल में पढ़ता है तो उसके भाई अथवा बहन के लिए उसके मां-बाप उसी स्कूल में आवेदन कर सकें।
सूत्रों ने बताया कि यदि किसी का बच्चा पूर्वी दिल्ली में पढ़ता हो और लॉटरी में उसके छोटे भाई का नाम दक्षिण दिल्ली के स्कूल के लिए निकल गया, तो उनके मां-बाप को भारी मशक्कत करनी होगी। खासकर पीटीएम सहित स्कूलों में होने वाली अन्य गतिविधियों में शिरकत करने के लिए उन्हें अलग-अलग दौड़ना होगा।
वर्तमान प्वाइंट वाली प्रणाली में किसी खास स्कूल में प्ढ़ने वाले बच्चे के भाई-बहन को उसी स्कूल में एडमिशन लेने के क्रम में अतिरिक्त प्वाइंट मिल जाते हैं। इसीलिए तय किया गया है कि सगे भाई-बहनों के मामले में एक लॉटरी अलग से की जाए जबकि बाकी सामान्य बच्चों के लिए अलग से लाटरी हो।
सरकार के सूत्रों ने बताया कि नर्सरी एडमिशन के मामले में सरकार अगले सप्ताह तक अपनी नीति का खुलासा कर देगी। इस बीच कानून विभाग की राय भी मिल जाएगी और विभिन्न स्कूलों के प्रधानाचार्यों व अभिभावकों से भी राय मशविरा कर लिया जाएगा(नई दुनिया,दिल्ली,8.12.2010)।
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