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17 दिसंबर 2010

दिल्ली में नर्सरी दाखिलाःफीस वृद्धि पर नहीं चली स्कूलों की

नर्सरी दाखिला प्रक्रिया को लेकर दिल्ली सरकार पर दबाव बनाने में सफल रहने वाले पब्लिक स्कूलों को फीस बढ़ाने के मुद्दे पर मुंह की खानी पड़ी। नर्सरी दाखिला को लेकर स्कूलों के दबाव में आकर सरकार ने उन्हें इसमें स्वायत्तता दे दी। वहीं बृहस्पतिवार को शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली के साथ हुई बैठक में निजी स्कूलों ने फीस बढ़ोतरी के लिए दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। दरअसल, स्कूलों में 25 फीसदी गरीबी कोटा लागू करने के एवज में स्कूल प्रशासन फीस बढ़ाने की मांग कर रहे थे। लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया कि स्कूल प्रशासन चाहें तो सीटों में इजाफा कर सकते हैं। नर्सरी दाखिले के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के बाद शिक्षा मंत्री अरविंदर सिंह लवली ने करीब दो सौ स्कूलों के प्रिंसिपल के साथ बैठक की। बैठक में दिशा-निर्देश को लेकर स्कूलों के भ्रम को दूर किया गया। उन्हें यह भी स्पष्ट किया गया कि 25 फीसदी कोटे की बात शिक्षा के अधिकार कानून में है। लिहाजा स्कूल इसके लिए मना नहीं कर सकते। स्कूलों के साथ हुई बातचीत में लवली ने कहा कि स्कूलों को दाखिला प्रक्रिया तय करने का अधिकार मिला है। इसका मतलब यह नहीं कि वे मनमानी करें। स्कूल पारदर्शी व आरटीइ को पालन करने वाले नियम ही बनाएं। दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आरसी जैन ने बताया कि बैठक में शिक्षा मंत्री के सामने 25 फीसदी कोटे को लेकर विरोध जताया गया। 

अलग शेड्यूल से होगी परेशानी
अपने नौनिहालों को नर्सरी कक्षा में दाखिला कराने के लिए अभिभावकों को पापड़ बेलने पड़ेंगे। दिल्ली सरकार द्वारा नर्सरी दाखिले में स्कूलों को दी गई आजादी देने का खामियाजा अभिभावकों को उठाना पड़ेगा। वजह यह है कि हर बार सरकार का कड़ा नियंत्रण होने के बाद भी स्कूल प्रशासन मनमानी करते थे। इस बार तो उन्हें मनमानी करने की पूरी छूट ही मिल गई। पहले दिल्ली के सभी स्कूलों में फार्म भरने की तारीख, जमा करने की तारीख, पहली, दूसरी और तीसरी दाखिला सूची निकलने की तारीख आदि एक होती थी और इसे शिक्षा निदेशालय ही जारी करता था। वहीं इस बार अपने हिसाब से दाखिला पक्रिया अपनाने की छूट मिलने के बाद स्कूल अलग-अलग तारीख रखने की बात कह रहे हैं। नर्सरी दाखिले में स्वायत्तता मिलने से भले ही स्कूलों की लॉटरी खुल गई हो लेकिन अभिभावकों के मुसीबतें खड़ी हो गई हैं। गागुंली समिति की सिफारिशों के आधार पर तय किए गए प्वाइंट सिस्टम को लागू करने के बाद से सरकार ही केंद्रीयकृत शेडयूल तय करती थी। इस वर्ष सरकार ने सिर्फ पहली जनवरी से प्रक्रिया शुरू करने व 31 मार्च तक प्रक्रिया पूर्ण करने का शेडयूल जारी किया है। दिल्ली में छोटे-बड़े मिलाकर निजी स्कूलों की संख्या 1950 हैं। ऐसे में हर स्कूल अपना शेडयूल तय करेंगे। अलग-अलग शेडयूल होने से परेशानी यह होगी कि अभिभावकों के लिए भागमभाग की स्थिति बनी रहेगी। उन्हें आवेदन फॉर्म लेने के लिए अलग-अलग दिन स्कूलों के चक्कर काटने होंगे। इसके बाद जमा कराने की तिथियां भी अलग-अलग होने के कारण परेशानी और बढ़ जाएगी। एक अभिभावक ने बताया कि स्कूलों में अलग-अलग शेड्यूल होने के कारण उन्हें ऑफिस से कई बार छुट्टी लेनी होगी। साथ ही दाखिला प्रक्रिया अलग होने पर परेशानी होगी सो अलग(दैनिक जागरण,दिल्ली,17.12.2010)।

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