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21 दिसंबर 2010

यूपीःखुल गई १५ हजार बीएड धारकों की किस्मत

बिना मान्यता वाले संस्थानों से बीएड कर बीटीसी २००७ का फॉर्म भरने वाले लगभग १५ हजार अभ्यर्थियों की किस्मत खुल गई। आवेदन निरस्त होने के बाद किसी ने सोचा भी नहीं था कि उन्हें बुलाकर शिक्षक की नौकरी दी जाएगी लेकिन हुआ ऐसा ही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रदेश सरकार ने उन बीटीसी अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के लिए बुलाना शुरू किया है जिनकी डिग्री अमान्य कर दी गई है। न्यायालय ने आदेश दिया था कि एनसीटीई के गठन से पहले जिसने बीएड की डिग्री ली, उन्हें संस्थान की मान्यता के आधार पर कतई नहीं रोका जा सकता। आदेश के बाद पहले चरण में वर्ष २००७ बीटीसी में आवेदन करने वालों को मौका दिया गया है। शासन के सूत्रों का कहना है कि इसके बाद उन अभ्यर्थियों को भी मौका मिलेगा जिन्होंने एनसीटीई के गठन के बाद बिना मान्यता वाले संस्थानों से बीएड किया है।

मान्यता के आधार पर रोके गए बीएडधारकों की जिलेवार लिस्ट तैयार कर ली गई है। शासन का आदेश है कि इन दो वर्षों में जो पद रिक्त हुए, जिन्हें लेकर कोई विवाद नहीं है, उन पर इन बीएडधारकों को नियुक्त किया जाए। बीटीसी २००७ में प्राइमरी शिक्षकों के ६० हजार पदों के लिए रिक्तियां घोषित की गई थीं। इसमें अन्य आवेदकों के अलावा लगभग १५ हजार ऐसे अभ्यर्थी थे जिनके आवेदन रद्द कर दिए गए थे। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ऐसे संस्थानों से डिग्री हासिल करने वाले प्रभावित युवाओं की संख्या तीन लाख से अधिक है लेकिन फिलहाल मौका केवल उन्हें मिला है जिन्होंने आवेदन किया था। जिन डिग्रीधारकों ने आवेदन नहीं किया, उनके बारे में विचार नहीं किया जा रहा है। डायट इलाहाबाद में काउंसलिंग का पहला चरण शुरू हो गया है। प्राचार्य संजय सिन्हा ने बताया कि बीटीसी २००७ लिस्ट से आवेदन करने वालों का ब्योरा निकाला गया है और अभ्यर्थियों को बुलाया जा रहा है। अब तक ४० लोग संपर्क कर चुके हैं, शेष को भी मौका दिया जाएगा(अमरउजाला,इलाहाबाद,21.12.2010)।

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