राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज को छोड़कर राज्य के समस्त मेडिकल कॉलेजों में इस साल से पैरामेडिकल पाठ्यक्रम बंद कर दिया गया है। इस साल अन्य मेडिकल कॉलेजों के पाठ्यक्रम में केवल वही छात्र छात्राएं शामिल हुए हैं जो प्रथम वर्ष की परीक्षा पास करके द्वितीय वर्ष में आए हैं। अगले साल से इन मेडिकल कॉलेजों में इसकी पढ़ाई पूर्णतया बंद हो जाएगी।
सरकार ने 2005 में राज्य के छह मेडिकल कॉलेजों में पांच विषयों ईसीजी, एक्स-रे, लैब टेक्निशियन, ऑफ्थेल्मोलॉजी और प्रोस्थेटिक में दो वर्षीय पैरामेडिकल डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए थे। जोधपुर का डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज पाठ्यक्रम के पहले साल ही छात्र छात्राओं को तरस गया। प्रोस्थेटिक पाठ्यक्रम में तो एक भी छात्र के प्रवेश नहीं लेने से अगलेसाल ही 2006 में इसे बंद करना पड़ गया। यही हाल राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों का भी हुआ।
इक्का-दुक्का छात्र
राज्य सरकार ने पैरामेडिकल पाठ्यक्रम स्ववित्त पोषित आधार पर शुरू किया था। प्रत्येक पाठ्यक्रम की फीस 25 हजार रूपए सालाना थी। ऎसे में हर किसी के लिए इसमें प्रवेश लेना मुश्किल हो गया। वर्तमान में भी मेडिकल कॉलेज में लैब टेक्निशियन को छोड़कर अन्य पाठ्यक्रमों में इक्का दुक्का प्रवेशार्थी ही बचे हैं(राजस्थान पत्रिका,जोधपुर,21.12.2010)।
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