बरकतउल्ला विवि (बीयू) एक भी परीक्षा ढंग से नहीं करवा पा रहा है। विवि ने जो परीक्षा आयोजित करवाई,उसमें विवाद की स्थिति बन गई। बीते तीन -चार माह में करीब 7 परीक्षाएं विवाद का कारण बनीं।
विवि हर परीक्षा में ऐसा पेंच ले आता है, जिससे पहले छात्र परेशान होते हैं, बाद में या तो विवि नियम शिथिल कर देता है या छात्र कोर्ट के माध्यम से परीक्षा में शामिल हो जाता है। परीक्षाओं के बाद अब रिजल्ट भी रुक सकते हैं।
पहले छात्र को एडमिशन दे दिया जाता है और बाद में विवि, कॉलेज की मान्यता पर सवाल लगाता है या छात्र को अपात्र बताता है। यदि दोनों ही स्थिति विवि को पहले से पता होती है,तो छात्र को एडमिशन ही क्यों दिया जाता है? यह सवाल छात्रों को परेशान कर रहा है।
अब तक सातों परीक्षाओं में इसी तरह के विवाद सामने आए। छात्रांे ने बाकायदा एडमिशन लिया और फीस भरी, लेकिन जब भी वे परीक्षा देने पहुंचे, तो पता चला कि वे अपात्र हैं। नतीजा विवाद।
निरीक्षण समिति पर सवाल-विवि किसी भी कॉलेज को मान्यता देने के पहले उसका निरीक्षण करता है। इसके लिए एक निरीक्षण समिति बनाई जाती है। अब इस समिति की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मामला आर्थिक लेन-देन का-एनएसयूआई के महासचिव संजय वर्मा ने इसको लेकर विवि पर लेन-देन करने का आरोप लगाया है।
वे कहते हैं कि जिस कॉलेज से लेन-देन हो जाता है, उसे पात्र बताया जाता है और शेष को अपात्र। विवि परीक्षा तक इंतजार करता है। इसी आधार पर नियम तय होते हैं।
विवादों में घिरी ये परीक्षाएं
1. बीपीएड-एमपीएड : इनमें विवि ने प्रवेश सूची के आधार पर छात्रों को शामिल न करते हुए, अपने ढंग से नियम बनाए थे। इससे कई छात्र विवि की परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए। सत्यसाईं कॉलेज के छात्र कोर्ट के माध्यम से परीक्षा में शामिल हुए। छात्र संगठनों ने उच्च शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के बंगले का घेराव भी किया था।
2. नर्सिंग : पहले छात्रों को एडमिशन दे दिए और परीक्षा के दो दिन पहले कॉलेजों की संबद्धता पर सवाल खड़े कर दिए। विवाद की स्थिति बनी, तो अंतिम समय में छात्रों को परीक्षा में शामिल किया गया।
3. बीएचएमएस : पहले छात्रों को एडमिशन दिए गए और बाद में कहा गया कि छात्र ओवर एज हो चुके हैं। फिर प्रोविजनल एडमिशन देकर परीक्षा ली गई और रिजल्ट रोक दिए गए।
4. बीडीएस : विवि ने परीक्षा के कुछ दिन पहले नए नियम लागू कर कई छात्रों को अपात्र घोषित कर दिया। बाद में छात्र न्यायालय की शरण लेकर परीक्षा में शामिल हुए।
5. एमएससी : एमएससी थर्ड सेमेस्टर के छात्रों की परीक्षा की तारीख अचानक घोषित करने पर विवाद हुआ।
6. एमबीबीएस : विवि ने कुछ छात्रों को परीक्षा के पहले अपात्र घोषित कर दिया था। बाद में कोर्ट के माध्यम से छात्र परीक्षा में शामिल हुए।
7. बीएड : विवाद अब भी में जारी है। कुछ ऐसे छात्रों को परीक्षा में शामिल कर लिया, जो अपात्र थे। वहीं कुछ कॉलेज के छात्रों को एनसीईटी की मान्यता न होने का हवाला देते हुए शामिल करने से इंकार कर दिया गया। जिन्हें परीक्षा में शामिल नहीं किया गया, उन्होंने परीक्षा केंद्र पर पथराव किया।
बाद में इन छात्रों की परीक्षा करवाई गई और इसे निरस्त भी कर दिया गया। अब विवि 31 दिसंबर को इनकी परीक्षा करवाने जा रहा है।
आरोप गलत
विवि का प्रयास रहता है कि सभी परीक्षाएं नियम से हों। कुछ ही परीक्षाओं में विवाद की स्थिति बनी। शेष व्यवस्थित तौर तरीकों से आयोजित की गईं। ऐसे में विवि पर आरोप लगाना गलत होगा-संजय पी तिवारी, कुलसचिव,बीयू(दैनिक भास्कर,भोपाल,20.12.2010)
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